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सोमवती अमावस्या पर करें इन चीजों क दान, मिलेगा पितरों और भगवान शिव की विशेष कृपा

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Vinod Shukla Updated Sun, 14 Jun 2026 01:56 PM IST
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सार

Amavasya Kab Hai: सनातन धर्म में सोमवती अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। इस तिथि पर दान करने के से पितरों की विशेष कृपा मिलती है। 

Somvati Amavasya 2026 Snan Daan Know Puja Vidhi in Hindi
सोमवती अमावस्या - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

Somvati Amavasya 2026: 15 जून को सोमवती अमावस्या तिथि है। जब सोमवार के दिन अमावस्या तिथि पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। पंचांग गणना के अनुसार अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से शुरू हो चुकी है जो 15 जून को सुबह 08 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। अमावस्या तिथि को हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह तिथि पितरों की पूजा-आराधना के लिए समर्पित होती है। इस दिन गंगा स्नान, दान, पूजा-पाठ और जप करने का विशेष महत्व होता है। विशेष रूप से इस दिन पितरों को तर्पण और दान दिया जाता है। आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या पर किन चीजों का दान करना सबसे शुभ और अच्छा माना जाता है। 


काले तिल और जौ का दान
अमावस्या तिथि पितरों की पूजा और उनकी श्रद्धा के प्रति समर्पित होती है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि पर काले तिल का दान करने से पितरदेव प्रसन्न होते हैं। तिल के अलावा इस दिन जौ का दान करना भी अच्छा माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे पितृदोष के प्रभावों में कमी आती है। 
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अनाज का दान करना 
सोमवती अमावस्या पर अन्न दान करना सबसे शुभ कामों में एक माना जाता है। इस दिन चावल, गेंहू, जौ और दाल आदि का दान करने से जीवन में कभी भी अन्न की कमी नहीं होती है। 
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सोमवती अमावस्या पर कपड़ों का दान
सोमवती अमावस्या पर गरीबों और जरूतमंदों को कपड़े दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन कंबल, साड़ी और दूसरे तरह के कपड़ों को दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

गाय की सेवा करने का महत्व 
सोमवती अमावस्या पर गाय की सेवा और उसको हरा चारा, रोटी और गुड़ खिलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गौसेवा करने से कई गुने पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

ब्राह्मणों को भोजन करवाएं
सोमवती अमावस्या पर जहां अन्न, दूध, फल, चावल, तिल और आवंले का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है वहीं गरीबों, साधु, महात्मा तथा ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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