Adhik Mass 2026: अधिक मास में करें शालिग्राम और तुलसी की आराधना, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की बरसेगी कृपा
17 मई से अधिक मास की शुरू हो चुका है। अधिकमास को पुरूषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में इस मास में भगवान विष्णु का पूजन करने का खास महत्व होता है।
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Adhik Mass 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार मलमास या अधिक मास का आधार सूर्य और चंद्रमा की चाल से है। सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। इन दोनों वर्षों के बीच 11 दिनों का अंतर होता है और यही अंतर तीन साल में एक महीने के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास आता है और इसी को मलमास कहा जाता है। अधिकमास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इसीलिए अधिकमास को पुरूषोत्तम मास के नाम से भी पुकारा जाता है। शास्त्रों में इस मास में भगवान विष्णु का पूजन कई गुना फलदाई बताया गया है।
शालिग्राम को माना गया भगवान विष्णु का साक्षात स्वरूप
स्कंद पुराण के अनुसार शालिग्राम भगवान विष्णु का प्रत्यक्ष और स्वयंभू स्वरूप माने जाते हैं। गंडकी नदी से प्राप्त शालिग्राम शिला को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि जहां शालिग्राम विराजमान होते हैं, वहां भगवान विष्णु का स्थायी निवास रहता है। पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि शालिग्राम का पूजन करने से अनेक यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है। पुरुषोत्तम मास में शालिग्राम का जल, पंचामृत, चंदन और तुलसी दल से अभिषेक करना विशेष फलदायी माना गया है। इस दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”मंत्र का जाप करने से भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
तुलसी में मां लक्ष्मी का निवास
पद्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल के बिना पूर्ण नहीं मानी जाती। कथा के अनुसार देवी तुलसी ने भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, जिसके बाद श्रीहरि ने उन्हें सदैव अपने प्रिय रूप में स्वीकार किया। इसी कारण भगवान विष्णु को अर्पित हर भोग और पूजा में तुलसी का विशेष महत्व बताया गया है। पुरुषोत्तम मास में तुलसी की पूजा करने, जल अर्पित करने और संध्या समय दीपक जलाने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
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पुरुषोत्तम मास में पूजन और नियमों का महत्व
नारद पुराण के अनुसार पुरुषोत्तम मास में नियमपूर्वक भगवान विष्णु की आराधना करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। इस माह में प्रातःकाल स्नान कर पीले वस्त्र धारण करना और शालिग्राम व तुलसी की पूजा करना शुभ माना गया है। भगवान विष्णु को पीले पुष्प, चने की दाल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं। साथ ही विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भागवत और गीता पाठ का भी विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार इस माह में व्रत, दान और सत्संग करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों में बताया गया विशेष पुण्यफल
स्कंद पुराण में वर्णन मिलता है कि पुरुषोत्तम मास में शालिग्राम और तुलसी की संयुक्त पूजा करने वाला व्यक्ति भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करता है। मान्यता है कि इससे घर में धन-धान्य, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। धार्मिक दृष्टि से यह माह आत्मशुद्धि, भक्ति और साधना का श्रेष्ठ अवसर माना गया है। यही कारण है कि श्रद्धालु पूरे पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु और तुलसी पूजन को विशेष महत्व देते हैं।