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Amar Ujala Samwad 2026: दुनिया की हर एक समस्या का हल 'संवाद': स्वामी चिदानंद सरस्वती
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Megha Kumari
Updated Mon, 18 May 2026 12:03 PM IST
सार
Amar Ujala Samwad 2026: लखनऊ में 'संवाद उत्तर प्रदेश 2026' का आयोजन किया गया है। इस विशेष संवाद में स्वामी चिदानंद सरस्वती ने भी शिरकत की, जिन्हें विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु के रूप में जाना जाता है।
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Amar Ujala Samwad 2026
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Amar Ujala Samwad 2026: अमर उजाला 'संवाद उत्तर प्रदेश 2026' का भव्य आयोजन लखनऊ स्थित 'द सेंट्रम' होटल में किया गया है। इस खास कार्यक्रम में सिनेमा और खेल जगत की कई प्रसिद्ध हस्तियों ने शिरकत की। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए हैं। धर्म-अध्यात्म के क्षेत्र से स्वामी चिदानंद सरस्वती भी शामिल हुए, जो परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष और विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु के रूप में जाने जाते हैं।
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सबको अपनी भूमिका निभानी है: स्वामी चिदानंद सरस्वती
'संवाद उत्तर प्रदेश 2026' के दौरान स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने जीवन, अध्यात्म से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि, बचपन से ही उन्होंने मौन और ध्यान की साधना की। इसके बाद वह हिमालय पहुंचे। स्वामी जी ने कहा कि, आज पूरे विश्व को जिन समाधानों की आवश्यकता है और जिन चुनौतियों से बाहर निकलने के उत्तर चाहिए, वे हिमालय की शांति में मौजूद हैं। उनका मानना है कि प्रभु ने हम सभी को किसी न किसी उद्देश्य के लिए चुना है और हर व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
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संवाद ही समाधान: स्वामी चिदानंद सरस्वती
जीवन में संवाद के महत्व को समझाते हुए स्वामी जी ने कहा कि 'संवाद ही समाधान है।' संवाद से दीवारें टूटती हैं, दूरियां मिटती हैं और दिल से दिल जुड़ते हैं, चाहे वह राष्ट्र हो, समाज हो या कोई संस्थान। उन्होंने कहा कि, आज अधिकांश संकटों की सबसे बड़ी वजह संवाद का अभाव है। डायलॉग, डायलिसिस की तरह है।
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सोच तय करती है आगे बढ़ने की दिशा- स्वामी चिदानंद सरस्वती
अनुशासन पर अपने विचार रखते हुए स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि अनुशासन का अर्थ है- स्वयं पर शासन। उनका मानना है कि इंसान की अधिकतर समस्याएं उसकी अपनी सोच से जन्म लेती हैं। यदि सोच छोटी हो जाए, तो समाधान भी समस्या जैसा दिखाई देने लगता है।
अटलजी का नाम लेते हुए कहा कि, वह कहते थे कि, 'छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता।' स्वामी जी के अनुसार पहला अनुशासन विचारों का अनुशासन है और दूसरा वाणी पर नियंत्रण का अनुशासन। इंसान की सोच ही तय करती है कि उसे किस दिशा में आगे बढ़ना है।
स्वामी जी ने आगे कहा कि व्यक्ति को हर कार्य में अपना शत-प्रतिशत देना चाहिए, क्योंकि उसकी सोच ही उसके भाग्य का निर्माण करती है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां विचारों और वाणी पर नियंत्रण नहीं रहा, वहां-वहां समाज कमजोर पड़ा। सनातन संस्कृति को संवाद की संस्कृति बताते हुए उन्होंने कहा कि आक्रमण करने वाले समय के साथ समाप्त हो गए, लेकिन सोमनाथ आज भी अडिग खड़ा है। उनका कहना था कि जहां वाणी पर नियंत्रण का अभाव होता है, वहीं से समस्याएं जन्म लेती हैं।
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