Amar Ujala Samwad 2026: अनुशासन, आकांक्षाएं और संकल्प से सबकुछ संभव: 'स्वामी चिदानंद सरस्वती'
Amar Ujala Samwad 2026: आज लखनऊ में अमर उजाला समूह द्वारा 'संवाद उत्तर प्रदेश 2026' का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में धर्म और अध्यात्म जगत से स्वामी चिदानंद सरस्वती तथा साध्वी भगवती सरस्वती जी भी शामिल हुए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Amar Ujala Samwad 2026: आज लखनऊ में अमर उजाला 'संवाद उत्तर प्रदेश 2026' का भव्य आयोजन किया गया है। इस महा मंथन में देशभर की कई बड़ी हस्तियां शामिल हैं। इस विशेष संवाद में स्वामी चिदानंद सरस्वती ने भी शिरकत की, जो परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष और विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु के रूप में भी जाने जाते हैं। इसके अलावा साध्वी भगवती सरस्वती जी भी अमर उजाला के इस विशेष संवाद का हिस्सा बनीं हैं, जो 'डिवाइन शक्ति फाउंडेशन' की अध्यक्ष होने के साथ-साथ अपने आध्यात्मिक विचारों के लिए विश्वभर में जानी जाती हैं।
संवाद ही समाधान: स्वामी चिदानंद सरस्वती
स्वामी चिदानंद स्वामी से ने विशेष मंत्र 'मंगलम भगवान विष्णु मंगलम गरुड़ ध्वजा' के साथ संवाद की शुरुआत की। बातचीते के दौरान स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि, सारा जीवन दैवीय आज्ञा पर होता है। प्रभु ने हमें चुन लिया है। सभी को अपनी-अपनी भूमिका निभानी है। परमार्थ का अर्थ ही यह है कि दूसरों के लिए जीवन। बचपन से मौन की साधना की। ध्यान की साधना की। फिर हम हिमालय पर गए। आज पूरे विश्व को जिस समाधान की आवश्यकता है, चुनौतियों से निजात पाने के लिए जो उत्तर चाहिए, वो हिमालय की शांति ने दिए।
व्यस्त रहते हुए मस्त और स्वस्थ कैसे रहें, यह उसी से मिले जीवन का प्रभाव है। जीवन में संवाद का क्या प्रभाव होता है, इसके सूत्र हिमालय से मिले। आज प्रसन्नता है कि अमर उजाला ने सभी संस्थाओं के साथ मिलकर इस कार्यक्रम का नाम संवाद रखा है। संवाद ही समाधान है। संवाद से ही सभी दीवारें गिरती हैं, सारी दरारें भरती हैं, दिल से दिल जुड़ते हैं, फिर चाहे वह राष्ट्र में हों, समाज में हों, संस्थान में हों। आज संकट का एक ही कारण है- संवाद का अभाव। डायलॉग, डायलिसिस की तरह है।
अनुशासन, आकांक्षाएं और संकल्प के बारे में...
स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि, अनुशासन यानी निज पर शासन। सारी समस्याएं खुद से खड़ी होती हैं। अपनी सोच छोटी हो, तो समाधान ही समस्या बन जाती है। अटलजी कहते थे कि छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता। पहला अनुशासन सोच का अनुशासन है। दूसरा अनुशासन जिह्वा पर नियंत्रण का अनुशासन है। सोच ही निर्धारित करती है कि हमें क्या करना है। अमर उजाला का उदाहरण लें, तो इसके संस्थापक पहले सोच को अनुशासन में लाए। फिर तन्मय होकर इस काम में लग गए। आप अपना सौ फीसदी दीजिए। आपकी सोच ही आपके भाग्य का परिणाम है। उत्तर-दक्षिण में देखिए। जहां-जहां सोच को नियंत्रित नहीं किया, वहां-वहां हम फिसल गए। सनातन संस्कृति संवाद की संस्कृति है। गर्जना करने वाले गजनी गिरते गए, लेकिन सोमनाथ आज भी खड़ा है। जिह्वा नियंत्रण का जहां-जहां अभाव है, वहां-वहां समस्या है।