Sawan 2020: शिवपुराण को पढ़ते या सुनते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, सत्कर्मों का हो जाता है नाश
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महादेव बहुत ही भोले हैं, वह सिर्फ एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों पर कृपा करके अपने भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं। लेकिन शिव जी जितने भोले हैं, उनसे जुड़े रहस्य उतने ही जटिल हैं। भगवान शिव की महिमा कई पुराणों और ग्रंथो में बताई गई है।
शिव जी शैव सम्प्रदाय के आराध्य देव हैं। शिवपुराण शैव मत से संबंधित ग्रंथ हैं इसमें शिव जी के बारे में विस्तार से बताया गया है। ऐसी आस्था है कि शिवपुराण को पढ़ने से और उसका श्रवण करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। लेकिन शिवपुराण पढ़ने के लिए और उसका पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए नियमों का पालन करना अति आवश्यक है। जानते हैं किन नियमों का पालन करना चाहिए।
- कथा सुनने से पहले पूरी तरह से स्वच्छ होना अति आवश्यक है। अपने बाल नाखून आदि को काट लें स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- ब्रह्मचर्य का पालन करना बहुत आवश्यक होता है। ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए व्रत करें। इस दौरान भूमि पर ही सोना चाहिए।
- मन में भगवान शिव के प्रति पूर्ण श्रद्धा और आस्था रखनी चाहिए।
- किसी के प्रति अपने मन में ईर्ष्या की भावना न रखें किसी को अपशब्द न कहें न ही किसी की निंदा करें। ऐसे कार्य करने से सारे पुण्य नष्ट हो जाते हैं।
- तामसिक भोजन या किसी भी तामसिक पदार्थ का सेवन न करें। लहसुन प्याज भी तामसिक माने गए हैं, इसलिए इनका सेवन भी न करें। सात्विक भोजन करें।
- इस समय किसी भी प्रकार का नशा बिल्कुल भी न करें।
- जब कथा पूर्ण हो जाए तो शिवपुराण और शिव जी का पूरे परिवार समेत पूजन करें।
- कथा सुनने से पूर्व या बाद में कोई ऐसा कार्य ने करें जिससे किसी रोगी, विधवा, अनाथ, गौ आदि का दिल दुखे ऐसा करने वाला व्यक्ति पाप का भागी होता है और उसके द्वारा किए गए सत्कर्म नष्ट हो जाते हैं।
इस बात का भी रखें ध्यान
अगर आप स्वयं ही शिव जी का पूजन कर रहें है, तो पूजन से पहले ही सारी आवश्यक सामाग्री जैसे तांबे का पात्र जिससे जल या दूध चढ़ाना हो, पूजा में अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, अक्षत,धूप,दीप, नैवेद्य,तेल,घी रुई,चंदन,धतूरा, बिल्व पत्र,जनेऊ,नारियल,पंचामृत, पान, दक्षिणा आदि अपने पास रख लें। ताकि पूजा करते समय कोई विघ्न न पड़े।