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Shani Pradosh 2026: कब है शनि प्रदोष व्रत, जानिए संपूर्ण पूजा विधि के साथ नियम और धार्मिक महत्व

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 25 Jun 2026 03:54 PM IST
सार

हिंदू धर्म में शनि प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। जब शनिवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ता है तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहते हैं। 

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27 जून को शनि प्रदोष व्रत - फोटो : amar ujala

विस्तार

Shani Pradosh 2026: निर्जला एकादशी के बाद 27 जून को शनि प्रदोष का व्रत रखा जाएगा। हिंदू धर्म में शनि प्रदोष व्रत भगवान शिव और शनिदेव की आराधना के लिए बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। हर माह शुक्ल और कृष्ण पक्ष पर प्रदोष व्रत रखा जाएगा। जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि प्रदोष व्रत पर सच्चे मन और भाव से जो भी भगवान शिव की पूजा करते हैं उनको शनिदेव की भी कृपा मिलती है। शनि प्रदोष पर व्रत रखने से कष्टों, बाधाओं, आर्थिक परेशानियों और शनि संबंधी दोषों स मुक्ति मिलती है। आइए जानते है 27 जून को होने वाले प्रदोष व्रत की तिथि और महत्व के बारे में।

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शनि प्रदोष व्रत तिथि 2026
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 26 जून को रात 10 बजकर 21 मिनट पर आरंभ होगी और इस तिथि का समापन 28 जून को देर रात 12 बजकर 42 मिनट पर होगी फिर पूर्णिमा तिथि लग जाएगी। उदया तिथि के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत 27 जून को रखा जाएगा।
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शनि प्रदोष पूजा व्रत 

  • शनि प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहने और व्रत का संकल्प लें।
  • शनि प्रदोष पर दिन भर व्रत रखते हुए भगवान शिव और माता पार्वती के नाम का स्मरण करें। 
  • शाम को यानी प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की विधि-विधान के साथ पूजा आरंभ करें।
  • पूजा में शिवलिंग पर जलाभिषेक, गंगा जल, दूध, दही, शहद और गन्ने के रस से अभिषेक करें। 
  • इसके बाद शिवलिंग को बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, आक, भस्म और भांग अर्पित करें। 
  • फिर पूजा करते हुए ऊं नमा शिवाय के मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा, शिव पंचाक्षर और प्रदोष कथा सुने।


शनि प्रदोष का धार्मिक महत्व 
शनि प्रदोष व्रत करने और भगवान शिव की पूजा करने से भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होकर अपने भक्तों को कष्ट और बाधाओं को फौरन दूर करते हैं। इसके अलावा शनि प्रदोष का व्रत रखने से कुंडली में मौजूद शनि से संबंधित दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत मिलती है। शनि प्रदोष व्रत करने से  सुख-शांति और धन संपदा में बढ़ोतरी होती है और भगवान शिव की विशेष कृपा मिलती है। 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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