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CWG 2026: रणनीतिक चूक के कारण पदक नहीं ला सकीं भारोत्तोलक निरुपमा देवी? स्पर्धा पूरी करने में भी रहीं नाकाम
Tue, 28 Jul 2026 10:06 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Tue, 28 Jul 2026 10:06 PM IST
सार
भारतीय भारोत्तोलक निरुपमा देवी महिला 63 किलो वजन वर्ग में पदक की दौड़ से बाहर हो गईं। निरुपमा क्लीन एंड जर्क के तीनों प्रयास में ही विफल रहीं। यह निरुपमा के लिए बेहद निराशाजनक प्रदर्शन है।
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निरुपमा देवी
- फोटो : PTI
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विस्तार
राष्ट्रमंडल खेलों में डेब्यू करने वाली भारतीय भारोत्तोलक निरुपमा देवी का महिलाओं के 63 किग्रा वर्ग में मंगलवार को अभियान निराशाजनक रूप से समाप्त हुआ। वह छह में से केवल एक सफल प्रयास कर सकीं और कुल वजन दर्ज करने में नाकाम रहीं। 25 वर्षीय निरुपमा पूरे मुकाबले के दौरान लय में नहीं दिखीं। उन्होंने छह प्रयासों में केवल स्नैच में 93 किग्रा का एक सफल प्रयास किया।
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क्या वजन बढ़ाना पड़ा भारी?
निरुपमा ने स्नैच में 93 किग्रा वजन अपने दूसरे प्रयास में उठाया, जबकि वह पहले प्रयास में ऐसा करने में नाकाम रहीं थी। वह तीसरे प्रयास में 95 किग्रा वजन उठाने में भी असफल रहीं। स्नैच चरण के बाद वह पांचवें स्थान पर थीं। पदक की दौड़ में बने रहने के लिए उन्हें क्लीन एवं जर्क में अच्छे प्रदर्शन की जरूरत थी। उन्होंने क्लीन एंड जर्क में पहले 115 किलो वजन रजिस्टर कराया था, लेकिन निरुपमा ने इसे बढ़ाकर 123 किलो कर दिया। निरुपमा तीनों ही प्रयास में 123 किलो वजन सही से नहीं उठा सकीं। वह वजन को कंधों तक (क्लीन) लाने में सफल रहीं, लेकिन उसे सिर के ऊपर स्थिर (जर्क) नहीं कर सकीं। उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 126 किलोग्राम है।
भारतीय साथियों के जोरदार उत्साहवर्धन के बीच निरुपमा ने दूसरे प्रयास में फिर 123 किग्रा वजन उठाने की कोशिश की। इस बार भी वह क्लीन करने में सफल रहीं, लेकिन जर्क के दौरान संतुलन खो बैठीं और बारबेल उनके पीछे गिर गई। प्रतियोगिता में बने रहने और कांस्य पदक की उम्मीद कायम रखने के दबाव में वह तीसरे और अंतिम प्रयास में भी 123 किग्रा वजन उठाने में नाकाम रहीं। इसके साथ ही वह कुल वजन दर्ज नहीं कर सकीं और उनका अभियान समाप्त हो गया।
निरुपमा ने स्नैच में 93 किग्रा वजन अपने दूसरे प्रयास में उठाया, जबकि वह पहले प्रयास में ऐसा करने में नाकाम रहीं थी। वह तीसरे प्रयास में 95 किग्रा वजन उठाने में भी असफल रहीं। स्नैच चरण के बाद वह पांचवें स्थान पर थीं। पदक की दौड़ में बने रहने के लिए उन्हें क्लीन एवं जर्क में अच्छे प्रदर्शन की जरूरत थी। उन्होंने क्लीन एंड जर्क में पहले 115 किलो वजन रजिस्टर कराया था, लेकिन निरुपमा ने इसे बढ़ाकर 123 किलो कर दिया। निरुपमा तीनों ही प्रयास में 123 किलो वजन सही से नहीं उठा सकीं। वह वजन को कंधों तक (क्लीन) लाने में सफल रहीं, लेकिन उसे सिर के ऊपर स्थिर (जर्क) नहीं कर सकीं। उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 126 किलोग्राम है।
भारतीय साथियों के जोरदार उत्साहवर्धन के बीच निरुपमा ने दूसरे प्रयास में फिर 123 किग्रा वजन उठाने की कोशिश की। इस बार भी वह क्लीन करने में सफल रहीं, लेकिन जर्क के दौरान संतुलन खो बैठीं और बारबेल उनके पीछे गिर गई। प्रतियोगिता में बने रहने और कांस्य पदक की उम्मीद कायम रखने के दबाव में वह तीसरे और अंतिम प्रयास में भी 123 किग्रा वजन उठाने में नाकाम रहीं। इसके साथ ही वह कुल वजन दर्ज नहीं कर सकीं और उनका अभियान समाप्त हो गया।
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टोक्यो ओलंपिक चैंपियन शेरोन ने जीता स्वर्ण
कनाडा की टोक्यो ओलंपिक चैंपियन मॉड शेरोन ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखते हुए तीनों वर्गों (स्नैच, क्लीन एवं जर्क और कुल वजन) में राष्ट्रमंडल खेलों के रिकॉर्ड बनाए और लगातार तीसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया। शेरोन ने स्नैच में 102 किग्रा और क्लीन एवं जर्क में 130 किग्रा से रिकॉर्ड कुल 232 किग्रा वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। इंग्लैंड की सारा डेविस स्मेल ने कुल 217 किग्रा (95 किग्रा और 122 किग्रा) वजन के साथ रजत पदक जीता जबकि नौरू की 17 वर्षीय फेमिली क्रिस्टी नोटे ने 216 किग्रा (100 किग्रा और 116 किग्रा) के साथ कांस्य पदक हासिल किया।
कनाडा की टोक्यो ओलंपिक चैंपियन मॉड शेरोन ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखते हुए तीनों वर्गों (स्नैच, क्लीन एवं जर्क और कुल वजन) में राष्ट्रमंडल खेलों के रिकॉर्ड बनाए और लगातार तीसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया। शेरोन ने स्नैच में 102 किग्रा और क्लीन एवं जर्क में 130 किग्रा से रिकॉर्ड कुल 232 किग्रा वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। इंग्लैंड की सारा डेविस स्मेल ने कुल 217 किग्रा (95 किग्रा और 122 किग्रा) वजन के साथ रजत पदक जीता जबकि नौरू की 17 वर्षीय फेमिली क्रिस्टी नोटे ने 216 किग्रा (100 किग्रा और 116 किग्रा) के साथ कांस्य पदक हासिल किया।
भारोत्तोलन में शानदार रहा है भारत का प्रदर्शन
राष्ट्रमंडल खेलों में अब तक भारोत्तोलन भारत के लिए सबसे सफल खेल रहा है जहां उसने अब तक के 10 पदक में से छह पदक जीते हैं। इसमें पैरा पावरलिफ्टिंग का एक पदक भी शामिल है। निरुपमा मौजूदा राष्ट्रमंडल खेलों में फिलहाल पहली भारोत्तोलक हैं जो पदक नहीं जीत सकी हैं।
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