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CWG 2026: पोडियम पर खूब रोईं मीराबाई, बताया- क्यों हुईं भावुक? मुथुपांडी बोले- रजत पदक माता-पिता और कोच के नाम
Mon, 27 Jul 2026 10:13 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 27 Jul 2026 10:13 AM IST
सार
राष्ट्रमंडल खेल 2026 में स्वर्ण जीतने के बाद मीराबाई चानू ने अपने संघर्ष, चोटों और त्याग को याद करते हुए भावुक प्रतिक्रिया दी। वहीं रजत पदक विजेता राजा मुथुपांडी ने स्वर्ण नहीं जीत पाने का अफसोस जताया और अपना पदक माता-पिता तथा कोच विजय शर्मा को समर्पित किया।
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भावुक मीराबाई
- फोटो : IANS
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विस्तार
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के लिए चौथा दिन यादगार रहा। एक ओर मीराबाई चानू ने राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया, तो दूसरी ओर पोडियम पर उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। मीराबाई ने बताया कि यह खुशी वर्षों के त्याग, चोटों और मानसिक संघर्ष का परिणाम थी। वहीं पुरुषों के 65 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाले राजा मुथुपांडी ने स्वर्ण से चूकने का अफसोस जताया और अपनी सफलता माता-पिता तथा कोच विजय शर्मा को समर्पित करते हुए भावुक बयान दिया। दोनों भारतीय भारोत्तोलकों के ये शब्द उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी खुद बयां करते हैं।
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मीराबाई चानू
- फोटो : IANS
मीराबाई बोलीं- इतने त्याग किए, इसलिए आज भावुक हूं
महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीतने के बाद मीराबाई चानू काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के पीछे कई वर्षों की मेहनत, चोटों से जंग और मानसिक दबाव रहा है। मीराबाई ने कहा, 'मैं बहुत खुश हूं और बहुत भावुक भी हूं। यहां तक पहुंचने और पदक जीतने के लिए मैंने बहुत त्याग किए हैं। मैंने मानसिक तनाव और चोटों का सामना किया। मुझे नहीं पता था कि मैं राष्ट्रमंडल खेलों का रिकॉर्ड बना दूंगी। मेरा पूरा ध्यान सिर्फ अपने कोच द्वारा दिए गए वजन को सफलतापूर्वक उठाने पर था।'
मीराबाई ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में कुल 190 किग्रा (85 किग्रा स्नैच और 105 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वजन उठाकर न केवल स्वर्ण पदक जीता, बल्कि नया राष्ट्रमंडल खेल और राष्ट्रमंडल रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। इसके साथ ही वह गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 के बाद लगातार तीसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों की चैंपियन बनीं।
महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीतने के बाद मीराबाई चानू काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के पीछे कई वर्षों की मेहनत, चोटों से जंग और मानसिक दबाव रहा है। मीराबाई ने कहा, 'मैं बहुत खुश हूं और बहुत भावुक भी हूं। यहां तक पहुंचने और पदक जीतने के लिए मैंने बहुत त्याग किए हैं। मैंने मानसिक तनाव और चोटों का सामना किया। मुझे नहीं पता था कि मैं राष्ट्रमंडल खेलों का रिकॉर्ड बना दूंगी। मेरा पूरा ध्यान सिर्फ अपने कोच द्वारा दिए गए वजन को सफलतापूर्वक उठाने पर था।'
मीराबाई ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में कुल 190 किग्रा (85 किग्रा स्नैच और 105 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वजन उठाकर न केवल स्वर्ण पदक जीता, बल्कि नया राष्ट्रमंडल खेल और राष्ट्रमंडल रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। इसके साथ ही वह गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 के बाद लगातार तीसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों की चैंपियन बनीं।
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राजा मुथुपांडी
- फोटो : IANS
मुथुपांडी बोले- स्वर्ण नहीं जीत पाया, इसका दुख रहेगा
पुरुषों के 65 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाले राजा मुथुपांडी अपनी उपलब्धि से खुश जरूर थे, लेकिन उनके चेहरे पर स्वर्ण नहीं जीत पाने की कसक भी साफ दिखाई दी। उन्होंने कहा कि उनके कोच विजय शर्मा को उन पर स्वर्ण जीतने का भरोसा था और वह उस उम्मीद पर पूरी तरह खरे नहीं उतर सके।
मुथुपांडी ने कहा, 'मुझे निश्चित रूप से निराशा है, क्योंकि मेरे कोच को मुझ पर भरोसा था कि हम पूरा प्रयास करके स्वर्ण पदक जीतेंगे। लेकिन मैं वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाया। मैं यह पदक अपने माता-पिता और अपने कोच विजय शर्मा को समर्पित करता हूं। यहां से जो सीख मिली है, उसे लेकर आगे बढ़ूंगा। मैं अपने कोच के निर्देशों के अनुसार प्रशिक्षण करूंगा और पहले से भी ज्यादा मेहनत करूंगा।'
26 वर्षीय मुथुपांडी ने स्नैच में 126 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 160 किग्रा वजन उठाकर कुल 286 किग्रा के साथ रजत पदक अपने नाम किया। स्वर्ण पदक मलेशिया के अजनिल बिन बिदिन मोहम्मद ने 299 किग्रा के राष्ट्रमंडल खेल रिकॉर्ड के साथ जीता।
पुरुषों के 65 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाले राजा मुथुपांडी अपनी उपलब्धि से खुश जरूर थे, लेकिन उनके चेहरे पर स्वर्ण नहीं जीत पाने की कसक भी साफ दिखाई दी। उन्होंने कहा कि उनके कोच विजय शर्मा को उन पर स्वर्ण जीतने का भरोसा था और वह उस उम्मीद पर पूरी तरह खरे नहीं उतर सके।
मुथुपांडी ने कहा, 'मुझे निश्चित रूप से निराशा है, क्योंकि मेरे कोच को मुझ पर भरोसा था कि हम पूरा प्रयास करके स्वर्ण पदक जीतेंगे। लेकिन मैं वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाया। मैं यह पदक अपने माता-पिता और अपने कोच विजय शर्मा को समर्पित करता हूं। यहां से जो सीख मिली है, उसे लेकर आगे बढ़ूंगा। मैं अपने कोच के निर्देशों के अनुसार प्रशिक्षण करूंगा और पहले से भी ज्यादा मेहनत करूंगा।'
26 वर्षीय मुथुपांडी ने स्नैच में 126 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 160 किग्रा वजन उठाकर कुल 286 किग्रा के साथ रजत पदक अपने नाम किया। स्वर्ण पदक मलेशिया के अजनिल बिन बिदिन मोहम्मद ने 299 किग्रा के राष्ट्रमंडल खेल रिकॉर्ड के साथ जीता।
राजा मुथुपांडी
- फोटो : IANS
भारत के लिए शानदार रहा भारोत्तोलन का दिन
ग्लास्गो में भारोत्तोलन में अब तक भारत की चुनौती शानदार रही है। मीराबाई चानू ने देश को पहला स्वर्ण दिलाया, जबकि चनामबाम ऋषिकांत सिंह और राजा मुथुपांडी ने रजत पदक जीतकर भारत की पदक संख्या बढ़ाई। भारत ने अब तक ग्लास्गो में चार पदक जीत लिए हैं।
ग्लास्गो में भारोत्तोलन में अब तक भारत की चुनौती शानदार रही है। मीराबाई चानू ने देश को पहला स्वर्ण दिलाया, जबकि चनामबाम ऋषिकांत सिंह और राजा मुथुपांडी ने रजत पदक जीतकर भारत की पदक संख्या बढ़ाई। भारत ने अब तक ग्लास्गो में चार पदक जीत लिए हैं।