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CWG 2026: 'भारत के लिए पदक जीतना गर्व की बात', बोले सेल्वा; पिता ने कहा- बेटा ओलंपिक में भी जीतेगा मेडल
Sun, 02 Aug 2026 01:11 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ताइपे
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ताइपे
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 02 Aug 2026 01:11 PM IST
सार
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ट्रिपल जंप में कांस्य जीतने वाले सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने कहा कि भारत के लिए पदक जीतना उनके लिए गर्व की बात है। वहीं, उनके पिता ने भरोसा जताया कि बेहतर सुविधाएं मिलती रहीं तो सेल्वा भविष्य में ओलंपिक पदक भी जीत सकते हैं।
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सेल्वा प्रभु
- फोटो : IANS
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विस्तार
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने पुरुष ट्रिपल जंप में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो पदक अपने नाम किए। प्रवीण चित्रावेल ने रजत और सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने कांस्य पदक जीता। कांस्य पदक जीतने के बाद सेल्वा ने इसे अपने करियर का सबसे यादगार पल बताया, जबकि उनके पिता थिरुमारन ने विश्वास जताया कि उनका बेटा आने वाले वर्षों में भारत के लिए ओलंपिक पदक भी जीत सकता है।
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सेल्वा प्रभु और प्रवीण चित्रावेल
- फोटो : ANI
'भारत के लिए मेडल जीतकर गर्व महसूस कर रहा हूं'
21 वर्षीय सेल्वा प्रभु ने कहा कि यह उनके करियर का पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय पदक है और इसकी खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, 'मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं। यह मेरा पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय मेडल है। भारत के लिए पदक जीतकर मुझे गर्व महसूस हो रहा है। यहां तक पहुंचना बिल्कुल आसान नहीं था। मैं अपना यह मेडल अपने परिवार, कोच और उन सभी लोगों को समर्पित करता हूं, जिन्होंने इस सफर में मेरा साथ दिया।'
प्रवीण बोले- मेडल से ज्यादा प्रदर्शन मायने रखता है
राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी प्रवीण चित्रावेल ने 16.58 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ रजत पदक जीता। हालांकि, वह अपने प्रदर्शन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे। प्रवीण ने कहा, 'मैं मेडल से ज्यादा अपने प्रदर्शन पर ध्यान दे रहा था। अपने प्रदर्शन से थोड़ा निराश हूं, लेकिन 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में मैं बहुत मामूली अंतर से पदक से चूक गया था। इसलिए इस बार रजत पदक जीतकर खुशी भी है। अब एशियन गेम्स में इससे बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगा।'
21 वर्षीय सेल्वा प्रभु ने कहा कि यह उनके करियर का पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय पदक है और इसकी खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, 'मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं। यह मेरा पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय मेडल है। भारत के लिए पदक जीतकर मुझे गर्व महसूस हो रहा है। यहां तक पहुंचना बिल्कुल आसान नहीं था। मैं अपना यह मेडल अपने परिवार, कोच और उन सभी लोगों को समर्पित करता हूं, जिन्होंने इस सफर में मेरा साथ दिया।'
प्रवीण बोले- मेडल से ज्यादा प्रदर्शन मायने रखता है
राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी प्रवीण चित्रावेल ने 16.58 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ रजत पदक जीता। हालांकि, वह अपने प्रदर्शन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे। प्रवीण ने कहा, 'मैं मेडल से ज्यादा अपने प्रदर्शन पर ध्यान दे रहा था। अपने प्रदर्शन से थोड़ा निराश हूं, लेकिन 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में मैं बहुत मामूली अंतर से पदक से चूक गया था। इसलिए इस बार रजत पदक जीतकर खुशी भी है। अब एशियन गेम्स में इससे बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगा।'
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सेल्वा प्रभु
- फोटो : IANS
चार साल पहले आईसीयू में था, आज देश के लिए जीता पदक
पुरुष एफ57 शॉटपुट में रजत पदक जीतने वाले पैरा एथलीट शुभम जुयाल ने अपनी सफलता को भावुक पल बताया। उन्होंने कहा, 'चार साल पहले एक अगस्त को मैं आईसीयू में भर्ती था। तब मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए मेडल जीतूंगा। परिवार, दोस्तों, भारतीय सेना और मेरे कोच ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। यह पदक उन्हीं की बदौलत है।'
पिता बोले- बेटा ओलंपिक में भी मेडल जीत सकता है
सेल्वा के पिता थिरुमारन ने कहा कि उन्हें अपने बेटे से स्वर्ण पदक की उम्मीद थी, लेकिन मौसम ने उसके प्रदर्शन को प्रभावित किया। उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा था कि वह 17 मीटर से ज्यादा की छलांग लगाएगा, लेकिन मौसम की वजह से ऐसा नहीं हो सका। फिर भी कांस्य पदक हमारे लिए बेहद खास है। पूरा परिवार इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।'
उन्होंने आगे कहा, 'सेल्वा अभी सिर्फ 21 साल का है। अगर केंद्र और तमिलनाडु सरकार का सहयोग इसी तरह मिलता रहा तो वह निश्चित रूप से ओलंपिक पदक जीत सकता है। एशियन गेम्स में भी उससे स्वर्ण पदक की उम्मीद है।' तमिलनाडु के किसान परिवार से आने वाले सेल्वा फिलहाल अमेरिका की कंसास यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं। उनके पिता का मानना है कि निरंतर सहयोग और बेहतर सुविधाएं मिलने पर वह भारतीय एथलेटिक्स के अगले बड़े सितारे बन सकते हैं।
पुरुष एफ57 शॉटपुट में रजत पदक जीतने वाले पैरा एथलीट शुभम जुयाल ने अपनी सफलता को भावुक पल बताया। उन्होंने कहा, 'चार साल पहले एक अगस्त को मैं आईसीयू में भर्ती था। तब मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए मेडल जीतूंगा। परिवार, दोस्तों, भारतीय सेना और मेरे कोच ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। यह पदक उन्हीं की बदौलत है।'
पिता बोले- बेटा ओलंपिक में भी मेडल जीत सकता है
सेल्वा के पिता थिरुमारन ने कहा कि उन्हें अपने बेटे से स्वर्ण पदक की उम्मीद थी, लेकिन मौसम ने उसके प्रदर्शन को प्रभावित किया। उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा था कि वह 17 मीटर से ज्यादा की छलांग लगाएगा, लेकिन मौसम की वजह से ऐसा नहीं हो सका। फिर भी कांस्य पदक हमारे लिए बेहद खास है। पूरा परिवार इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।'
उन्होंने आगे कहा, 'सेल्वा अभी सिर्फ 21 साल का है। अगर केंद्र और तमिलनाडु सरकार का सहयोग इसी तरह मिलता रहा तो वह निश्चित रूप से ओलंपिक पदक जीत सकता है। एशियन गेम्स में भी उससे स्वर्ण पदक की उम्मीद है।' तमिलनाडु के किसान परिवार से आने वाले सेल्वा फिलहाल अमेरिका की कंसास यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं। उनके पिता का मानना है कि निरंतर सहयोग और बेहतर सुविधाएं मिलने पर वह भारतीय एथलेटिक्स के अगले बड़े सितारे बन सकते हैं।