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Baldev Singh: भारतीय हॉकी के 'गुरु' को बड़ा सम्मान, बलदेव सिंह को मिलेगा पद्मश्री
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Wed, 20 May 2026 11:11 PM IST
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सार
बलदेव सिंह को भारतीय हॉकी में चार दशक से अधिक के योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। शाहाबाद मारकंडा को हॉकी प्रतिभाओं की नर्सरी बनाने वाले बलदेव सिंह ने 80 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और कई भारतीय कप्तान तैयार किए हैं।
बलदेव सिंह
- फोटो : X
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विस्तार
बलदेव सिंह को भारतीय हॉकी में उनके लंबे और उल्लेखनीय योगदान के लिए देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 25 मई को उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी।
शाहाबाद मारकंडा को बनाया हॉकी की नर्सरी
75 वर्षीय बलदेव सिंह ने हरियाणा के शाहाबाद मारकंडा को देश की प्रमुख हॉकी प्रतिभाओं के केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। वह वर्ष 1982 में हरियाणा खेल विभाग में कोच के रूप में शाहाबाद पहुंचे थे और चार वर्षों तक वहां सेवाएं दीं। इसके बाद 1993 में उन्होंने दोबारा वापसी की और हॉकी अकादमी को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाओं का बड़ा केंद्र बना दिया।
80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को दिया प्रशिक्षण
बलदेव सिंह ने अपने करियर की शुरुआत नमधारी हॉकी टीम, भैणी साहिब से की थी। उन्होंने शुरुआती दौर में बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआईएस) से हॉकी कोचिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। अपने चार दशक लंबे करियर में उन्होंने 80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और आठ भारतीय कप्तानों को प्रशिक्षित किया।
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भारतीय हॉकी टीम के साथ निभाई अहम जिम्मेदारियां
उन्होंने भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम के मुख्य कोच और चयनकर्ता के रूप में भी काम किया। वर्ष 1996 में मद्रास में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली भारतीय टीम के सहायक कोच रहे। बाद में उन्हें भारतीय सीनियर हॉकी टीम का मुख्य कोच बनाया गया।
एशिया कप में दिलाया गोल्ड मेडल
साल 2001 से 2004 तक बलदेव सिंह भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कोच रहे। इस दौरान उन्होंने नीदरलैंड्स के एम्सटेलवीन में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी में टीम का मार्गदर्शन किया। उनके नेतृत्व में भारत ने 2004 एशिया कप में स्वर्ण पदक जीता।
शिक्षा संस्थानों और ओलंपिक टास्क फोर्स में भी योगदान
बलदेव सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी, खालसा कॉलेज सहित कई संस्थानों में हॉकी कोच के रूप में सेवाएं दीं। इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा गठित ओलंपिक टास्क फोर्स के सदस्य के रूप में उन्होंने 2020 टोक्यो, 2024 पेरिस और 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक की तैयारी के लिए रोडमैप तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शाहाबाद मारकंडा को बनाया हॉकी की नर्सरी
75 वर्षीय बलदेव सिंह ने हरियाणा के शाहाबाद मारकंडा को देश की प्रमुख हॉकी प्रतिभाओं के केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। वह वर्ष 1982 में हरियाणा खेल विभाग में कोच के रूप में शाहाबाद पहुंचे थे और चार वर्षों तक वहां सेवाएं दीं। इसके बाद 1993 में उन्होंने दोबारा वापसी की और हॉकी अकादमी को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाओं का बड़ा केंद्र बना दिया।
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80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को दिया प्रशिक्षण
बलदेव सिंह ने अपने करियर की शुरुआत नमधारी हॉकी टीम, भैणी साहिब से की थी। उन्होंने शुरुआती दौर में बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआईएस) से हॉकी कोचिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। अपने चार दशक लंबे करियर में उन्होंने 80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और आठ भारतीय कप्तानों को प्रशिक्षित किया।
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उन्होंने भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम के मुख्य कोच और चयनकर्ता के रूप में भी काम किया। वर्ष 1996 में मद्रास में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली भारतीय टीम के सहायक कोच रहे। बाद में उन्हें भारतीय सीनियर हॉकी टीम का मुख्य कोच बनाया गया।
एशिया कप में दिलाया गोल्ड मेडल
साल 2001 से 2004 तक बलदेव सिंह भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कोच रहे। इस दौरान उन्होंने नीदरलैंड्स के एम्सटेलवीन में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी में टीम का मार्गदर्शन किया। उनके नेतृत्व में भारत ने 2004 एशिया कप में स्वर्ण पदक जीता।
शिक्षा संस्थानों और ओलंपिक टास्क फोर्स में भी योगदान
बलदेव सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी, खालसा कॉलेज सहित कई संस्थानों में हॉकी कोच के रूप में सेवाएं दीं। इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा गठित ओलंपिक टास्क फोर्स के सदस्य के रूप में उन्होंने 2020 टोक्यो, 2024 पेरिस और 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक की तैयारी के लिए रोडमैप तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।