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Badminton: BWF चैंपियनशिप से पहले इंदिरा गांधी स्टेडियम का हुआ कायाकल्प, कबूतर-बंदरों से निपटने के भी इंतजाम
Mon, 10 Aug 2026 09:34 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 10 Aug 2026 09:34 PM IST
सार
BWF विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप की भारत में 17 साल बाद वापसी से पहले इंदिरा गांधी स्टेडियम का व्यापक कायाकल्प किया गया है। इंडिया ओपन के दौरान सामने आई कबूतर, बारिश, कोर्ट लाइट और स्वच्छता संबंधी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए स्टेडियम में संरचनात्मक और सौंदर्यात्मक बदलाव किए गए हैं।
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इंदिरा गांधी स्टेडियम
- फोटो : PTI
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विस्तार
भारत में 17 साल बाद होने जा रही बीडब्ल्यूएफ विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप से पहले इंदिरा गांधी स्टेडियम को विश्वस्तरीय आयोजन के लिए तैयार कर दिया गया है। भारतीय बैडमिंटन संघ (BAI) और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने जनवरी में हुए इंडिया ओपन के दौरान सामने आई समस्याओं से सबक लेते हुए स्टेडियम में व्यापक सुधार किए हैं।
17 से 23 अगस्त तक होने वाली इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए आयोजकों ने बुनियादी ढांचे के साथ-साथ सुरक्षा, स्वच्छता और तकनीकी सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया है।
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17 से 23 अगस्त तक होने वाली इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए आयोजकों ने बुनियादी ढांचे के साथ-साथ सुरक्षा, स्वच्छता और तकनीकी सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया है।
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आईजी स्टेडियम का कायाकल्प
- फोटो : PTI
इंडिया ओपन में कबूतरों ने कराया था मैच बाधित
इस साल जनवरी में इंडिया ओपन के दौरान एचएस प्रणय और लोह कीन यू के बीच दूसरे दौर का मुकाबला कबूतरों के कारण दो बार रोकना पड़ा था। इसके अलावा स्टेडियम की स्वच्छता और दिल्ली के प्रदूषण को लेकर भी शिकायतें सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद साई और बीएआई ने स्टेडियम में व्यापक बदलाव की योजना बनाई। अधिकारियों के मुताबिक, फरवरी से ही इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई थीं।
कबूतरों को रोकने के लिए हाईटेक इंतजाम
स्टेडियम में पक्षियों और कीड़ों को रोकने के लिए कई स्तरों पर इंतजाम किए गए हैं। ‘वेंट’ को पूरी तरह सील कर दिया गया है, जबकि पुराने लकड़ी के दरवाजों की जगह डबल-डोर एंट्री सिस्टम लगाया गया है। इसमें बाहर की ओर ऑटोमैटिक दरवाजा भी लगाया गया है। अमेरिका से विशेष गैर-विषैला जैल मंगाकर स्टेडियम की डक्टिंग के आसपास लगाया गया है। इसके अलावा ऐसे पोर्टेबल उपकरण लगाए गए हैं जो शिकारी पक्षियों जैसी आवाज निकालते हैं, ताकि कबूतर स्टेडियम के आसपास न आएं।
साई के कार्यकारी निदेशक अंबर प्रताप सिंह ने कहा, 'जनवरी में इंडिया ओपन के दौरान हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। तभी हमने तय किया कि स्टेडियम की स्थिति में व्यापक सुधार किया जाएगा। हमने फरवरी से ही इसकी योजना बनानी शुरू कर दी थी। यह काफी पुराना स्टेडियम है और इसकी आधारभूत संरचना भी पुरानी हो चुकी थी। इसलिए हमारा लक्ष्य इसे नया स्वरूप देना और इसे विश्वस्तरीय आयोजन के अनुरूप तैयार करना था।'
इस साल जनवरी में इंडिया ओपन के दौरान एचएस प्रणय और लोह कीन यू के बीच दूसरे दौर का मुकाबला कबूतरों के कारण दो बार रोकना पड़ा था। इसके अलावा स्टेडियम की स्वच्छता और दिल्ली के प्रदूषण को लेकर भी शिकायतें सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद साई और बीएआई ने स्टेडियम में व्यापक बदलाव की योजना बनाई। अधिकारियों के मुताबिक, फरवरी से ही इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई थीं।
कबूतरों को रोकने के लिए हाईटेक इंतजाम
स्टेडियम में पक्षियों और कीड़ों को रोकने के लिए कई स्तरों पर इंतजाम किए गए हैं। ‘वेंट’ को पूरी तरह सील कर दिया गया है, जबकि पुराने लकड़ी के दरवाजों की जगह डबल-डोर एंट्री सिस्टम लगाया गया है। इसमें बाहर की ओर ऑटोमैटिक दरवाजा भी लगाया गया है। अमेरिका से विशेष गैर-विषैला जैल मंगाकर स्टेडियम की डक्टिंग के आसपास लगाया गया है। इसके अलावा ऐसे पोर्टेबल उपकरण लगाए गए हैं जो शिकारी पक्षियों जैसी आवाज निकालते हैं, ताकि कबूतर स्टेडियम के आसपास न आएं।
साई के कार्यकारी निदेशक अंबर प्रताप सिंह ने कहा, 'जनवरी में इंडिया ओपन के दौरान हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। तभी हमने तय किया कि स्टेडियम की स्थिति में व्यापक सुधार किया जाएगा। हमने फरवरी से ही इसकी योजना बनानी शुरू कर दी थी। यह काफी पुराना स्टेडियम है और इसकी आधारभूत संरचना भी पुरानी हो चुकी थी। इसलिए हमारा लक्ष्य इसे नया स्वरूप देना और इसे विश्वस्तरीय आयोजन के अनुरूप तैयार करना था।'
आईजी स्टेडियम का कायाकल्प
- फोटो : PTI
छत से लेकर झील तक, कई बदलाव
स्टेडियम में केवल संरचनात्मक सुधार ही नहीं किए गए हैं, बल्कि इसकी खूबसूरती बढ़ाने के लिए भी कई काम हुए हैं। छत की मरम्मत, एक्सपेंशन जॉइंट की मरम्मत, नई कुर्सियों की स्थापना, पुरानी कुर्सियों की पॉलिश और पूरे परिसर की रंगाई-पुताई की गई है। स्टेडियम के सामने स्थित झील को भी विकसित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि चैंपियनशिप शुरू होने तक इसका स्वरूप काफी आकर्षक नजर आएगा।
अंबर प्रताप सिंह ने कहा, 'यह केवल संरचनात्मक सुधार नहीं है, बल्कि कई सौंदर्यात्मक सुधार भी किए गए हैं। उदाहरण के लिए स्टेडियम के सामने स्थित झील को विकसित किया गया है। प्रतियोगिता शुरू होने तक यह झील बेहद आकर्षक दिखाई देगी।'
बंदर और आवारा कुत्तों से निपटने की भी तैयारी
स्टेडियम में बंदरों और आवारा कुत्तों की समस्या को देखते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) के साथ भी लगातार समन्वय किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, डबल-डोर और ऑटोमैटिक क्लोजिंग सिस्टम के बाद बंदरों के लिए एरिना के अंदर प्रवेश करना लगभग असंभव होगा। हालांकि, पूरे परिसर में उनके आने की संभावना को देखते हुए एमसीडी के साथ संपर्क जारी रहेगा। आवारा कुत्तों को भी आवश्यक कार्रवाई के बाद शेल्टर होम भेजा जाएगा।
स्टेडियम में केवल संरचनात्मक सुधार ही नहीं किए गए हैं, बल्कि इसकी खूबसूरती बढ़ाने के लिए भी कई काम हुए हैं। छत की मरम्मत, एक्सपेंशन जॉइंट की मरम्मत, नई कुर्सियों की स्थापना, पुरानी कुर्सियों की पॉलिश और पूरे परिसर की रंगाई-पुताई की गई है। स्टेडियम के सामने स्थित झील को भी विकसित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि चैंपियनशिप शुरू होने तक इसका स्वरूप काफी आकर्षक नजर आएगा।
अंबर प्रताप सिंह ने कहा, 'यह केवल संरचनात्मक सुधार नहीं है, बल्कि कई सौंदर्यात्मक सुधार भी किए गए हैं। उदाहरण के लिए स्टेडियम के सामने स्थित झील को विकसित किया गया है। प्रतियोगिता शुरू होने तक यह झील बेहद आकर्षक दिखाई देगी।'
बंदर और आवारा कुत्तों से निपटने की भी तैयारी
स्टेडियम में बंदरों और आवारा कुत्तों की समस्या को देखते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) के साथ भी लगातार समन्वय किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, डबल-डोर और ऑटोमैटिक क्लोजिंग सिस्टम के बाद बंदरों के लिए एरिना के अंदर प्रवेश करना लगभग असंभव होगा। हालांकि, पूरे परिसर में उनके आने की संभावना को देखते हुए एमसीडी के साथ संपर्क जारी रहेगा। आवारा कुत्तों को भी आवश्यक कार्रवाई के बाद शेल्टर होम भेजा जाएगा।
आईजी स्टेडियम का कायाकल्प
- फोटो : PTI
कोर्ट की लाइट और ड्रिफ्ट कंट्रोल में भी सुधार
इंडिया ओपन के दौरान कोर्ट पर हल्की छाया की समस्या सामने आई थी। अब इसे दूर कर दिया गया है। कोर्ट की लाइटिंग और ड्रिफ्ट कंट्रोल का परीक्षण बीडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञों ने किया है। अंबर प्रताप सिंह ने कहा, 'कोर्ट की लाइट की व्यवस्था और ‘ड्रिफ्ट कंट्रोल’ का परीक्षण बीडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञों ने किया है। यह तकनीकी विषय है और उनकी संतुष्टि हमारे लिए महत्वपूर्ण है। इंडिया ओपन के दौरान कोर्ट पर हल्की छाया की समस्या थी जिसे अब पूरी तरह दूर कर दिया गया है।' उन्होंने बताया कि इंडोनेशिया से एक विशेषज्ञ अंतिम परीक्षण के लिए आएंगे, हालांकि बीडब्ल्यूएफ पहले ही मौजूदा सुविधाओं से संतुष्ट है।
इंडिया ओपन के दौरान कोर्ट पर हल्की छाया की समस्या सामने आई थी। अब इसे दूर कर दिया गया है। कोर्ट की लाइटिंग और ड्रिफ्ट कंट्रोल का परीक्षण बीडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञों ने किया है। अंबर प्रताप सिंह ने कहा, 'कोर्ट की लाइट की व्यवस्था और ‘ड्रिफ्ट कंट्रोल’ का परीक्षण बीडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञों ने किया है। यह तकनीकी विषय है और उनकी संतुष्टि हमारे लिए महत्वपूर्ण है। इंडिया ओपन के दौरान कोर्ट पर हल्की छाया की समस्या थी जिसे अब पूरी तरह दूर कर दिया गया है।' उन्होंने बताया कि इंडोनेशिया से एक विशेषज्ञ अंतिम परीक्षण के लिए आएंगे, हालांकि बीडब्ल्यूएफ पहले ही मौजूदा सुविधाओं से संतुष्ट है।
आईजी स्टेडियम का कायाकल्प
- फोटो : PTI
बारिश की चुनौती भी हुई दूर
पुरानी इमारत होने के कारण बारिश के दौरान छत से पानी टपकने की समस्या भी स्टेडियम के लिए बड़ी चुनौती थी। अधिकारियों के मुताबिक, इसे भी पूरी तरह दूर कर दिया गया है। अंबर प्रताप सिंह ने कहा, 'छत से पानी टपकने की समस्या भी पूरी तरह दूर कर दी गई है। यह बहुत पुरानी इमारत है और बारिश के दौरान रिसाव एक बड़ी चुनौती थी। पिछले कुछ दिनों में हुई भारी बारिश ने हमारी तैयारियों की परीक्षा ली और इंजीनियरिंग टीम ने बेहतरीन काम किया है।'
उन्होंने बताया कि पूरा नवीनीकरण कार्य साई, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) और बीएआई के संयुक्त प्रयासों से किया गया है। साई के विशेष इंजीनियरिंग विभाग और सीपीडब्ल्यूडी ने अलग-अलग काम पूरे किए, जबकि अब स्टेडियम को टूर्नामेंट के लिए अंतिम रूप से तैयार करने की जिम्मेदारी बीएआई के पास है। बीडब्ल्यूएफ भी स्टेडियम में किए गए काम से संतुष्ट है। हालांकि, अधिकारियों ने नवीनीकरण पर हुए कुल खर्च का खुलासा नहीं किया।
पुरानी इमारत होने के कारण बारिश के दौरान छत से पानी टपकने की समस्या भी स्टेडियम के लिए बड़ी चुनौती थी। अधिकारियों के मुताबिक, इसे भी पूरी तरह दूर कर दिया गया है। अंबर प्रताप सिंह ने कहा, 'छत से पानी टपकने की समस्या भी पूरी तरह दूर कर दी गई है। यह बहुत पुरानी इमारत है और बारिश के दौरान रिसाव एक बड़ी चुनौती थी। पिछले कुछ दिनों में हुई भारी बारिश ने हमारी तैयारियों की परीक्षा ली और इंजीनियरिंग टीम ने बेहतरीन काम किया है।'
उन्होंने बताया कि पूरा नवीनीकरण कार्य साई, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) और बीएआई के संयुक्त प्रयासों से किया गया है। साई के विशेष इंजीनियरिंग विभाग और सीपीडब्ल्यूडी ने अलग-अलग काम पूरे किए, जबकि अब स्टेडियम को टूर्नामेंट के लिए अंतिम रूप से तैयार करने की जिम्मेदारी बीएआई के पास है। बीडब्ल्यूएफ भी स्टेडियम में किए गए काम से संतुष्ट है। हालांकि, अधिकारियों ने नवीनीकरण पर हुए कुल खर्च का खुलासा नहीं किया।