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महिला हॉकी विश्व कप: एमएस धोनी को आदर्श मानती हैं भारतीय गोलकीपर बिछू देवी, बोलीं- दबाव में शांत रहना सीखा
Fri, 14 Aug 2026 04:04 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Fri, 14 Aug 2026 04:04 PM IST
सार
भारतीय महिला हॉकी टीम की गोलकीपर बिछू देवी ने दबाव में शांत रहने के लिए पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी को अपना आदर्श बताया है। दूसरे विश्व कप में खेल रहीं बिछू ने कहा कि पिछले अनुभव से उनमें परिपक्वता आई है और अब उनका ध्यान सिर्फ अच्छे प्रदर्शन पर है।
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बिछू देवी-एमएस धोनी
- फोटो : HI-ANI
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विस्तार
भारतीय महिला हॉकी टीम की गोलकीपर बिछू देवी विश्व कप जैसे बड़े मंच पर दबाव का सामना शांत रहकर करने को सफलता की कुंजी मानती हैं। मणिपुर की 26 वर्षीय खिलाड़ी इस मामले में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और 'कैप्टन कूल' के नाम से मशहूर महेंद्र सिंह धोनी को अपना आदर्श मानती हैं।
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क्या बोलीं बिछू देवी?
दूसरे विश्व कप में हिस्सा ले रहीं बिछू ने भाषा को दिए इंटरव्यू में कहा कि वह दबाव में धोनी की तरह शांत रहने की कोशिश करती हैं। उन्होंने कहा, 'धोनी जिस तरह से दबाव में भी शांत रहते हैं, मैं भी वैसा ही करने की कोशिश करती हूं। यही सोचती हूं कि डर के आगे जीत है। कितना भी दबाव सामने आए, मैं शांत रहूंगी।' बिछू ने कहा कि धोनी के जीवन के संघर्ष और सफलता से उन्हें काफी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने बताया कि जब धोनी पर बनी फिल्म रिलीज हुई थी तो उन्होंने उसे कई बार देखा था।
दूसरे विश्व कप में हिस्सा ले रहीं बिछू ने भाषा को दिए इंटरव्यू में कहा कि वह दबाव में धोनी की तरह शांत रहने की कोशिश करती हैं। उन्होंने कहा, 'धोनी जिस तरह से दबाव में भी शांत रहते हैं, मैं भी वैसा ही करने की कोशिश करती हूं। यही सोचती हूं कि डर के आगे जीत है। कितना भी दबाव सामने आए, मैं शांत रहूंगी।' बिछू ने कहा कि धोनी के जीवन के संघर्ष और सफलता से उन्हें काफी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने बताया कि जब धोनी पर बनी फिल्म रिलीज हुई थी तो उन्होंने उसे कई बार देखा था।
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तैयारी पर भरोसा, अतिरिक्त दबाव नहीं लेना चाहतीं
विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में इस बार बिछू पहले की तुलना में अधिक आत्मविश्वास और परिपक्वता के साथ उतर रही हैं। उन्होंने कहा कि अब वह किसी अतिरिक्त दबाव के बजाय अपनी अब तक की तैयारी पर ध्यान देना चाहती हैं। उन्होंने कहा, 'अब कुछ ज्यादा सोचना नहीं है। जो अब तक तैयारी की है, उसी पर फोकस है। कुछ अतिरिक्त प्रयास नहीं करना है।'
पिछले विश्व कप के अनुभव ने भी उनकी सोच को बदला है। बिछू ने कहा कि तब वह नई खिलाड़ी थीं और बड़े टूर्नामेंट को लेकर काफी दबाव महसूस करती थीं, लेकिन अब वह अधिक परिपक्व हो चुकी हैं। उन्होंने कहा, 'मैं पिछले विश्व कप में बिल्कुल नई थी और बहुत दबाव ले लिया था कि इतने बड़े टूर्नामेंट में कैसे खेलूंगी, लेकिन अब परिपक्वता आई है और फोकस बस अच्छे प्रदर्शन पर है।'
विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में इस बार बिछू पहले की तुलना में अधिक आत्मविश्वास और परिपक्वता के साथ उतर रही हैं। उन्होंने कहा कि अब वह किसी अतिरिक्त दबाव के बजाय अपनी अब तक की तैयारी पर ध्यान देना चाहती हैं। उन्होंने कहा, 'अब कुछ ज्यादा सोचना नहीं है। जो अब तक तैयारी की है, उसी पर फोकस है। कुछ अतिरिक्त प्रयास नहीं करना है।'
पिछले विश्व कप के अनुभव ने भी उनकी सोच को बदला है। बिछू ने कहा कि तब वह नई खिलाड़ी थीं और बड़े टूर्नामेंट को लेकर काफी दबाव महसूस करती थीं, लेकिन अब वह अधिक परिपक्व हो चुकी हैं। उन्होंने कहा, 'मैं पिछले विश्व कप में बिल्कुल नई थी और बहुत दबाव ले लिया था कि इतने बड़े टूर्नामेंट में कैसे खेलूंगी, लेकिन अब परिपक्वता आई है और फोकस बस अच्छे प्रदर्शन पर है।'
दुनिया की शीर्ष स्ट्राइकरों से अब नहीं लगता डर
आक्रामक हॉकी के मौजूदा दौर में दुनिया की शीर्ष स्ट्राइकरों का सामना करने को लेकर भी बिछू अब सहज हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी टीमों के खिलाफ लगातार खेलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा, 'आक्रामक हॉकी के इस दौर में दुनिया की शीर्ष स्ट्राइकरों के सामने अब दिक्कत नहीं होती। हमने बड़ी टीमों के खिलाफ इतने मैच खेले हैं कि अब फर्क नहीं पड़ता। बस मैदान पर शांत रहकर फैसले लेने हैं, जो मैं ले लूंगी।'
आक्रामक हॉकी के मौजूदा दौर में दुनिया की शीर्ष स्ट्राइकरों का सामना करने को लेकर भी बिछू अब सहज हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी टीमों के खिलाफ लगातार खेलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा, 'आक्रामक हॉकी के इस दौर में दुनिया की शीर्ष स्ट्राइकरों के सामने अब दिक्कत नहीं होती। हमने बड़ी टीमों के खिलाफ इतने मैच खेले हैं कि अब फर्क नहीं पड़ता। बस मैदान पर शांत रहकर फैसले लेने हैं, जो मैं ले लूंगी।'
फुटबॉलर बनना चाहती थीं, ऐसे बनीं हॉकी खिलाड़ी
बिछू देवी का हॉकी करियर भी किसी संयोग से कम नहीं है। वह असल में फुटबॉलर बनना चाहती थीं, लेकिन इम्फाल के साई सेंटर में फुटबॉल के ट्रायल के लिए एक दिन देर से पहुंचने के कारण उनकी किस्मत बदल गई। उन्होंने बताया कि ट्रायल में देरी होने के कारण फुटबॉल की जगह खाली नहीं थी। इसके बाद साई के निदेशक ने उनके पिता से उन्हें हॉकी खेलने देने की सलाह दी और कहा कि कुछ महीने बाद उन्हें फुटबॉल टीम में शामिल किया जा सकता है।
बिछू ने हॉकी के सभी ट्रायल पास कर लिए, लेकिन दो महीने बाद जब उन्होंने फुटबॉल टीम के बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि उनका नाम हॉकी खिलाड़ी के रूप में दर्ज हो चुका है और अब वह फुटबॉल नहीं खेल सकतीं। उन्होंने कहा, 'मैं बहुत रोई और पापा को बोला कि मुझे ले जाओ, लेकिन उन्होंने समझाया। धीरे-धीरे हॉकी में मन रमने लगा।' शुरुआत में बिछू स्ट्राइकर के तौर पर खेलती थीं और गोल करने के बाद जश्न मनाना उन्हें काफी पसंद था। बाद में मणिपुर में साई सेंटर आए नीलकमल सर ने उन्हें गोलकीपर बनने की सलाह दी और यहीं से उनके करियर ने नई दिशा ली।
बिछू देवी का हॉकी करियर भी किसी संयोग से कम नहीं है। वह असल में फुटबॉलर बनना चाहती थीं, लेकिन इम्फाल के साई सेंटर में फुटबॉल के ट्रायल के लिए एक दिन देर से पहुंचने के कारण उनकी किस्मत बदल गई। उन्होंने बताया कि ट्रायल में देरी होने के कारण फुटबॉल की जगह खाली नहीं थी। इसके बाद साई के निदेशक ने उनके पिता से उन्हें हॉकी खेलने देने की सलाह दी और कहा कि कुछ महीने बाद उन्हें फुटबॉल टीम में शामिल किया जा सकता है।
बिछू ने हॉकी के सभी ट्रायल पास कर लिए, लेकिन दो महीने बाद जब उन्होंने फुटबॉल टीम के बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि उनका नाम हॉकी खिलाड़ी के रूप में दर्ज हो चुका है और अब वह फुटबॉल नहीं खेल सकतीं। उन्होंने कहा, 'मैं बहुत रोई और पापा को बोला कि मुझे ले जाओ, लेकिन उन्होंने समझाया। धीरे-धीरे हॉकी में मन रमने लगा।' शुरुआत में बिछू स्ट्राइकर के तौर पर खेलती थीं और गोल करने के बाद जश्न मनाना उन्हें काफी पसंद था। बाद में मणिपुर में साई सेंटर आए नीलकमल सर ने उन्हें गोलकीपर बनने की सलाह दी और यहीं से उनके करियर ने नई दिशा ली।
गोलकीपर की किट भी मिली तो सही आकार की नहीं
बिछू ने 2015 में मध्य प्रदेश अकादमी से अपने हॉकी करियर की शुरुआत की। हालांकि, गोलकीपर बनने के बाद भी उनका सफर आसान नहीं रहा। उन्हें गोलकीपर की किट मिलने में छह महीने लग गए और जब किट मिली तो वह उनके आकार की नहीं थी। उन्होंने कहा, 'मुझे छह महीने बाद गोलकीपर की किट मिली लेकिन लेगगार्ड इतने बड़े थे कि कटवाकर खेलना पड़ा।'
सविता पूनिया से प्रतिस्पर्धा नहीं, सीखने का रिश्ता
दिग्गज गोलकीपर सविता पूनिया की मौजूदगी के बावजूद बिछू ने भारतीय टीम में अपनी अलग पहचान बनाई है। हालांकि, वह सविता को अपनी प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि मार्गदर्शक और बड़ी बहन के रूप में देखती हैं। बिछू ने कहा कि वह लगातार सविता से सीखती हैं और मैच के दौरान लिए जाने वाले फैसलों तथा मानसिक स्थिति को लेकर उनसे बात करती हैं।
उन्होंने कहा, 'सविता दी से बहुत कुछ सीखने को मिला। उनसे लगातार पूछती हूं कि दिमाग में उस समय क्या चल रहा था या फैसले कैसे लेने हैं तो वह बताती हैं कि बाहरी आवाजों पर ध्यान नहीं देना है और अपने खेल पर फोकस रखना है।' उन्होंने कहा कि सविता ने उन्हें बड़ी बहन की तरह सिखाया है और अब वह भी बिछू से सीखती हैं। मैच में गोल खाने के बाद दोनों एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाती हैं।
बिछू ने 2015 में मध्य प्रदेश अकादमी से अपने हॉकी करियर की शुरुआत की। हालांकि, गोलकीपर बनने के बाद भी उनका सफर आसान नहीं रहा। उन्हें गोलकीपर की किट मिलने में छह महीने लग गए और जब किट मिली तो वह उनके आकार की नहीं थी। उन्होंने कहा, 'मुझे छह महीने बाद गोलकीपर की किट मिली लेकिन लेगगार्ड इतने बड़े थे कि कटवाकर खेलना पड़ा।'
सविता पूनिया से प्रतिस्पर्धा नहीं, सीखने का रिश्ता
दिग्गज गोलकीपर सविता पूनिया की मौजूदगी के बावजूद बिछू ने भारतीय टीम में अपनी अलग पहचान बनाई है। हालांकि, वह सविता को अपनी प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि मार्गदर्शक और बड़ी बहन के रूप में देखती हैं। बिछू ने कहा कि वह लगातार सविता से सीखती हैं और मैच के दौरान लिए जाने वाले फैसलों तथा मानसिक स्थिति को लेकर उनसे बात करती हैं।
उन्होंने कहा, 'सविता दी से बहुत कुछ सीखने को मिला। उनसे लगातार पूछती हूं कि दिमाग में उस समय क्या चल रहा था या फैसले कैसे लेने हैं तो वह बताती हैं कि बाहरी आवाजों पर ध्यान नहीं देना है और अपने खेल पर फोकस रखना है।' उन्होंने कहा कि सविता ने उन्हें बड़ी बहन की तरह सिखाया है और अब वह भी बिछू से सीखती हैं। मैच में गोल खाने के बाद दोनों एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाती हैं।
विश्व कप में शांत दिमाग से फैसले लेने पर नजर
बिछू के लिए इस विश्व कप में सबसे बड़ा मंत्र साफ है दबाव में शांत रहना और अपनी तैयारी पर भरोसा करना। धोनी से मिली प्रेरणा, पिछले विश्व कप का अनुभव और सविता पूनिया से मिली सीख के सहारे वह इस बार बड़े मंच पर अधिक आत्मविश्वास के साथ उतरने को तैयार हैं।
बिछू के लिए इस विश्व कप में सबसे बड़ा मंत्र साफ है दबाव में शांत रहना और अपनी तैयारी पर भरोसा करना। धोनी से मिली प्रेरणा, पिछले विश्व कप का अनुभव और सविता पूनिया से मिली सीख के सहारे वह इस बार बड़े मंच पर अधिक आत्मविश्वास के साथ उतरने को तैयार हैं।