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Hindi News ›   Sports ›   Lovepreet Singh Inspiring Journey story: From Tailor's Son to 2nd Commonwealth Games Medal

Lovepreet Singh: दर्जी का बेटा बना 'हेवी-वेट हीरो', पिता ने कैंची-धागे से नहीं, हौसले से गढ़ा लवप्रीत का सपना

Fri, 31 Jul 2026 10:43 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो Published by: स्वप्निल शशांक Updated Fri, 31 Jul 2026 10:43 AM IST
सार

पंजाब के अमृतसर के एक साधारण दर्जी परिवार से निकलकर लवप्रीत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। आर्थिक तंगी के बावजूद माता-पिता ने कभी उनके सपनों को नहीं रोका। स्नैच में गेम्स रिकॉर्ड बनाने वाले लवप्रीत महज एक किलो से स्वर्ण पदक से चूक गए।

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Lovepreet Singh Inspiring Journey story: From Tailor's Son to 2nd Commonwealth Games Medal
लवप्रीत सिंह - फोटो : IANS

विस्तार

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जब भारत के लवप्रीत सिंह ने स्नैच में 176 किलोग्राम वजन उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया, तब सिर्फ एक पदक नहीं जीता गया था, बल्कि एक ऐसे परिवार का संघर्ष भी दुनिया के सामने आया जिसने आर्थिक मुश्किलों के बावजूद अपने बेटे के सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया।

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पंजाब के अमृतसर जिले के सीमावर्ती गांव बल सिकंदर से आने वाले लवप्रीत सिंह ने पुरुषों के +110 किलोग्राम भारवर्ग में 388 किलोग्राम (176+212) का कुल भार उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। वह सिर्फ एक किलोग्राम से स्वर्ण पदक से चूक गए। न्यूजीलैंड के डेविड एंड्रयू लिटी ने 389 किलोग्राम के साथ स्वर्ण जीता।

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Lovepreet Singh Inspiring Journey story: From Tailor's Son to 2nd Commonwealth Games Medal
लवप्रीत सिंह ने रजत पदक जीता - फोटो : IANS

दर्जी की दुकान से शुरू हुआ संघर्ष का सफर
 

  • लवप्रीत का परिवार बेहद साधारण है। उनके पिता गांव में दर्जी हैं, जबकि दादा सब्जियां बेचकर परिवार का गुजारा करते थे।
  • परिवार चाहता तो लवप्रीत भी सिलाई का काम संभाल सकते थे, लेकिन पिता ने बेटे के हाथों में कैंची और सुई नहीं, बल्कि सपनों का भरोसा थमाया।
  • महज 13 साल की उम्र में लवप्रीत ने अमृतसर के डीएवी मैदान में वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की।
  • आर्थिक परेशानियां थीं, लेकिन परिवार ने कभी उन्हें ट्रेनिंग और पोषण की कमी महसूस नहीं होने दी।
  • लवप्रीत खुद कहते हैं, 'हर खिलाड़ी की तरह मुझे भी कड़ी मेहनत और संघर्ष से गुजरना पड़ा। आर्थिक दिक्कतें जरूर थीं, लेकिन मेरे माता-पिता ने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि मेरी ट्रेनिंग और खान-पान में कोई कमी न रहे।'

Lovepreet Singh Inspiring Journey story: From Tailor's Son to 2nd Commonwealth Games Medal
लवप्रीत सिंह ने रजत पदक जीता - फोटो : IANS

नेवी की नौकरी ने बदली जिंदगी
लगातार मेहनत का फल उन्हें 2015 में भारतीय नौसेना में नौकरी के रूप में मिला। इसके बाद उन्हें पटियाला स्थित राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में अभ्यास का मौका मिला। यहीं से उनका करियर नई उड़ान भरने लगा। सिर्फ दो साल बाद उन्होंने कॉमनवेल्थ जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण और एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके बाद वह भारतीय भारोत्तोलन टीम के भरोसेमंद हैवीवेट लिफ्टर बन गए।

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लवप्रीत सिंह ने रजत पदक जीता - फोटो : IANS

रिकॉर्ड बनाया, लेकिन एक किलो से रह गए पीछे
 

  • ग्लासगो में लवप्रीत ने स्नैच में 168 किलोग्राम से शुरुआत की, फिर 173 किलोग्राम और तीसरे प्रयास में 176 किलोग्राम उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड बना दिया। इस प्रदर्शन के बाद वह 10 किलोग्राम की बढ़त के साथ क्लीन एंड जर्क में उतरे।
  • क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 212 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाया और फिर स्वर्ण पदक के लिए 217 किलोग्राम का साहसी प्रयास किया। अगर वह सफल हो जाते तो नया गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीत लेते, लेकिन अंतिम प्रयास में वजन सिर के ऊपर स्थिर नहीं रख सके।
  • इसका फायदा न्यूजीलैंड के डेविड एंड्रयू लिटी ने उठाया। उन्होंने 223 किलोग्राम का नया गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए कुल 389 किलोग्राम वजन उठाया और महज एक किलोग्राम के अंतर से स्वर्ण अपने नाम कर लिया।

Lovepreet Singh Inspiring Journey story: From Tailor's Son to 2nd Commonwealth Games Medal
लवप्रीत सिंह ने रजत पदक जीता - फोटो : IANS
कांस्य से रजत तक का सफर
बर्मिंघम 2022 में कांस्य पदक जीतने वाले लवप्रीत ने इस बार अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए रजत पदक हासिल किया। उनकी बदौलत भारत का भारोत्तोलन अभियान भी शानदार अंदाज में समाप्त हुआ। भारतीय टीम ने एक स्वर्ण, छह रजत और एक कांस्य सहित कुल आठ पदक जीते। लवप्रीत की कहानी इस बात की मिसाल है कि सीमित संसाधन किसी खिलाड़ी के सपनों की सीमा तय नहीं करते। जब परिवार का भरोसा, मेहनत और हौसला साथ हो तो दर्जी का बेटा भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर सकता है।

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लवप्रीत सिंह ने रजत पदक जीता - फोटो : IANS
स्वर्ण चूकने का दुख
हालांकि, रजत से संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने कहा, 'मैं स्वर्ण पदक जीतने से चूक गया। जाहिर है, जब गोल्ड हाथ से निकल जाता है तो दुख होता है। लेकिन आने वाली प्रतियोगिताओं, खासकर एशियाई खेलों में मैं और बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगा। मैं अपना यह पदक अपने कोच विजय शर्मा, भारतीय भारोत्तोलन महासंघ के साहदेव सर, भारत सरकार और भारतीय नौसेना के कैप्टन विजय कुमार को समर्पित करना चाहता हूं। इन सभी ने मुझे हर कदम पर भरपूर सहयोग दिया। मैं दिल से उन सभी का धन्यवाद करता हूं।'
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