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Hindi News ›   Sports ›   The Inspiring Journey of Dilip Gavit: From Losing an Arm to Winning Commonwealth Games 2026 Gold in 100 meters

Who is Dilip Gavit?: बचपन में हादसे ने छीन लिया हाथ, पर हौसले ने दिलीप गावित को बनाया गोल्डन बॉय; पढ़ें कहानी

Thu, 30 Jul 2026 09:48 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो Published by: स्वप्निल शशांक Updated Thu, 30 Jul 2026 09:48 AM IST
सार

महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में गरीबी और हादसे के बीच पले-बढ़े दिलीप महादू गावित ने बचपन में अपना एक हाथ गंवा दिया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। खेतों से निकलकर ट्रैक तक पहुंचे इस पैरा धावक ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीतकर देश को गौरवान्वित कर दिया।

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The Inspiring Journey of Dilip Gavit: From Losing an Arm to Winning Commonwealth Games 2026 Gold in 100 meters
दिलीप गावित - फोटो : IANS

विस्तार

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जब भारत के दिलीप महादू गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में 10.71 सेकेंड का गेम्स रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीता, तब पूरे देश ने उनकी रफ्तार देखी। लेकिन इस रफ्तार के पीछे संघर्ष, दर्द और जिद की ऐसी कहानी छिपी है, जो किसी भी इंसान की आंखें नम कर सकती है। पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा पैरा एथलेटिक्स की फर्राटा प्रतियोगिता है जिसमें एक हाथ में शारीरिक अक्षमता या उसके अभाव वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इससे शरीर के एक हिस्से की ताकत, गति या समन्वय प्रभावित होता है। आइए दिलीप की कहानी जानते हैं...

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महाराष्ट्र के नासिक जिले के पास स्थित छोटे से गांव तोरण डोंगरी में जन्मे दिलीप एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। बचपन खेतों में माता-पिता का हाथ बंटाते हुए बीता। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यही लड़का एक दिन देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचेगा।

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The Inspiring Journey of Dilip Gavit: From Losing an Arm to Winning Commonwealth Games 2026 Gold in 100 meters
दिलीप गावित - फोटो : IANS/Twitter

एक हादसे ने बदल दी पूरी जिंदगी
दिलीप की उम्र तब महज पांच-छह साल थी। गांव में खेलते समय वह एक पेड़ से गिर पड़े। गिरने से उनके दाहिने हाथ में गंभीर चोट लगी। गांव में बेहतर चिकित्सा सुविधा नहीं थी और समय पर इलाज भी नहीं मिल पाया। धीरे-धीरे घाव में गैंग्रीन फैल गया और डॉक्टरों को कोहनी के नीचे से उनका हाथ काटना पड़ा। इतनी छोटी उम्र में हाथ खो देना किसी भी बच्चे के लिए जिंदगी भर का दर्द बन सकता था, लेकिन दिलीप ने अपनी कमजोरी को अपनी पहचान नहीं बनने दिया।

गांव की कच्ची सड़कें बनीं पहली दौड़ की ट्रैक
हाथ खोने के बाद भी दिलीप का आत्मविश्वास नहीं टूटा। उन्होंने दौड़ना शुरू किया। गांव की कच्ची सड़कों पर बिना किसी आधुनिक सुविधा के रोज अभ्यास करते रहे। उनके भीतर की प्रतिभा को सबसे पहले एथलेटिक्स कोच वैजनाथ काले ने पहचाना। काले ने सिर्फ उनकी प्रतिभा ही नहीं देखी, बल्कि उनके परिवार को भी समझाया कि बेटे को खेल में आगे बढ़ने का मौका दिया जाए। शुरुआती दिनों में उन्होंने दिलीप के प्रशिक्षण, रहने और अन्य खर्चों की जिम्मेदारी भी उठाई।

The Inspiring Journey of Dilip Gavit: From Losing an Arm to Winning Commonwealth Games 2026 Gold in 100 meters
दिलीप गावित - फोटो : IANS/Twitter

दिव्यांग नहीं, सामान्य खिलाड़ियों से मुकाबला करना चाहते थे
 

  • दिलीप की सबसे बड़ी खासियत उनकी सोच थी। शुरुआत में वह पैरा प्रतियोगिताओं में हिस्सा ही नहीं लेना चाहते थे। उनका मानना था कि अगर खुद को साबित करना है तो पहले सामान्य खिलाड़ियों के बीच मुकाबला करना चाहिए। उन्होंने अंडर-18 राष्ट्रीय प्रतियोगिता के 200 मीटर फाइनल तक जगह बनाई।
  • खेलो इंडिया यूथ गेम्स में महाराष्ट्र की 4×100 मीटर रिले टीम के साथ पदक भी जीता। एक हाथ से बैटन बदलना आसान नहीं होता, लेकिन दिलीप ने यह चुनौती भी पार कर दिखाई। बाद में कोच की सलाह पर उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में कदम रखा और यहीं से उनकी असली उड़ान शुरू हुई।


एशियाई खेलों से पैरालंपिक तक, फिर कॉमनवेल्थ का गोल्ड
2023 के विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 400 मीटर टी47 स्पर्धा में चौथा स्थान हासिल किया। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने पेरिस पैरालंपिक और एशियाई पैरा खेलों के लिए क्वालिफाई किया।
हांगझोउ एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने 400 मीटर टी47 में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का ऐतिहासिक 100वां पदक दिलाया। इसके बाद पेरिस पैरालंपिक में भी फाइनल तक पहुंचे, हालांकि वहां पदक नहीं जीत सके।2025 विश्व चैंपियनशिप में भी वह चौथे स्थान पर रहे, लेकिन एशियाई रिकॉर्ड बनाकर दुनिया को अपनी क्षमता का अहसास करा दिया।

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The Inspiring Journey of Dilip Gavit: From Losing an Arm to Winning Commonwealth Games 2026 Gold in 100 meters
दिलीप गावित - फोटो : IANS/Twitter

400 मीटर छोड़ 100 मीटर चुना और रच दिया इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के कार्यक्रम में 400 मीटर स्पर्धा शामिल नहीं थी। ऐसे में दिलीप ने खुद को 100 मीटर के लिए तैयार किया। दुबई ग्रां प्री में स्वर्ण जीता, फिर बेंगलुरु ओपन में एशियाई रिकॉर्ड बनाया और ग्लास्गो पहुंचते-पहुंचते वह इस साल 100 और 400 मीटर दोनों वर्गों में दुनिया के नंबर-1 पैरा धावक बन चुके थे। ग्लास्गो में बारिश के बीच आयोजित फाइनल में उन्होंने 10.71 सेकेंड का समय निकालकर गेम्स रिकॉर्ड बना दिया। भारत के मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनकाथ ने रजत पदक जीतकर भारत को ऐतिहासिक 1-2 फिनिश दिलाई।

'शुरुआत अच्छी नहीं थी, लेकिन मैंने रफ्तार पकड़ ली'
स्वर्ण जीतने के बाद दिलीप ने कहा, 'मेरी शुरुआत थोड़ी धीमी रही थी, लेकिन उसके बाद मैंने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ ली। जीत हासिल करके बहुत अच्छा महसूस हो रहा है।' बारिश से प्रभावित परिस्थितियों पर उन्होंने कहा, 'मौसम अच्छा नहीं था। सही टाइमिंग पकड़ने में मुश्किल हो रही थी। ठंड में शरीर सुस्त पड़ जाता है और वार्म-अप करना भी आसान नहीं होता।'

The Inspiring Journey of Dilip Gavit: From Losing an Arm to Winning Commonwealth Games 2026 Gold in 100 meters
दिलीप गावित - फोटो : ANI

नौकरी नहीं, अब सिर्फ पदकों का सपना
इतिहास रचने के बाद भी दिलीप की मंजिल अभी खत्म नहीं हुई है। उनका लक्ष्य अब लॉस एंजिलिस 2028 पैरालंपिक है। उन्होंने कहा, 'अभी मैं नौकरी के बारे में नहीं सोच रहा हूं। मेरा लक्ष्य सिर्फ पदक जीतना है। मुझे भरोसा है कि जापान में होने वाले पैरा एशियाई खेलों और फिर पैरालंपिक में मैं इससे भी बेहतर प्रदर्शन करूंगा।'

दिलीप की कहानी एक जिद की कहानी
दिलीप गावित की कहानी सिर्फ एक स्वर्ण पदक की नहीं, बल्कि उस जिद की कहानी है जिसने गरीबी, हादसे, सुविधाओं की कमी और शारीरिक चुनौती को पीछे छोड़ दिया। गांव की कच्ची सड़क से शुरू हुआ यह सफर अब दुनिया के सबसे बड़े मंच तक पहुंच चुका है और यही उन्हें करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा बनाता है।

The Inspiring Journey of Dilip Gavit: From Losing an Arm to Winning Commonwealth Games 2026 Gold in 100 meters
दिलीप गावित - फोटो : ANI

दिलीप गावित की प्रमुख उपलब्धियां
 

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: पुरुष 100 मीटर टी47 में 10.71 सेकेंड के गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक।
  • भारत को पैरा एथलेटिक्स में ऐतिहासिक 1-2 फिनिश दिलाने में अहम भूमिका, मोहम्मद बासिल ने जीता रजत।
  • एशियाई पैरा खेल 2022 (हांगझोउ): पुरुष 400 मीटर टी47 में स्वर्ण पदक, भारत का ऐतिहासिक 100वां पदक दिलाया।
  • पेरिस पैरालंपिक 2024: पुरुष 400 मीटर टी47 के फाइनल में पहुंचने वाले भारतीय धावकों में शामिल।
  • 2023 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप: 400 मीटर टी47 में चौथा स्थान, पैरालंपिक कोटा हासिल किया।
  • 2025 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप: चौथा स्थान, हीट्स में एशियाई रिकॉर्ड (48.20 सेकेंड) बनाया।
  • दुबई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री 2026: 100 मीटर टी46 में स्वर्ण पदक।
  • बेंगलुरु ओपन 2026: 100 मीटर टी46 में 10.64 सेकेंड का एशियाई रिकॉर्ड बनाया।
  • 2026 सीजन में पुरुष 100 मीटर टी46 और 400 मीटर टी46 दोनों स्पर्धाओं में दुनिया के नंबर-1 पैरा धावक रहे।
  • शुरुआत में पैरा नहीं, बल्कि सामान्य (Able-bodied) प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और अंडर-18 राष्ट्रीय 200 मीटर फाइनल तक पहुंचे।
  • खेलो इंडिया यूथ गेम्स में महाराष्ट्र की 4×100 मीटर रिले टीम के साथ कांस्य पदक जीता।
  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर देश को पदक तालिका में मजबूती दिलाई।
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