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Pay-per-use AI: बिजली-पानी जैसी यूटिलिटी बनेगा एआई, सैम ऑल्टमैन बोले- अब मीटर से बिकेगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Sat, 14 Mar 2026 04:19 PM IST
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सार

Sam Altman AI Utility Model: क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जैसे आप घर की लाइट जलाने के लिए बिजली का बिल भरते हैं, वैसे ही आप हमारी जिंदगी का हिस्सा बन सके एआई का बिल भी भरेंगे? ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन का मानना है कि एआई कोई जटिल लग्जरी नहीं, बल्कि बिजली और पानी जैसी एक बेसिक यूटिलिटी बनने वाली है। जानें क्या है ऑल्टमैन का पे-पर-यूज मॉडल और कैसे यह आपके काम करने के तरीके को बदल देगा।
 

AI  Become Utility Like Electricity  Water; Sam Altman Says—Artificial Intelligence Sold via Meter.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया तेजी से बदल रही है। अभी तक इसे एक हाई-टेक इनोवेशन या भविष्य की तकनीक के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन अब एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में एआई उतना ही सामान्य हो जाएगा जितना इंटरनेट या बिजली। हाल ही में वॉशिंगटन डीसी में आयोजित ब्लैकरॉक यूएस इंफ्रास्ट्रक्चर समिट में बोलते हुए सैम ऑल्टमैन ने एआई के भविष्य को लेकर एक अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भविष्य में लाेग एआई को किसी स्पेशल टेक्नोलॉजी के रूम में नहीं देखेंगे, बल्कि यह एक साधारण सर्विस बन जाएगी, जिसे लोग रोजाना इस्तेमाल कर सकेंगे।
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एआई बनेगा बिजली-पानी जैसी यूटिलिटी
ऑल्टमैन के अनुसार, भविष्य में एआई को फिक्स्ड सब्सक्रिप्शन के बजाय मीटर रीडिंग के आधार पर बेचा जाएगा।
  • पे-पर-यूज: जैसे आप जितनी यूनिट बिजली इस्तेमाल करते हैं उतना ही पेमेंट करते हैं, वैसे ही आप जितनी कंप्यूटिंग पावर या इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करेंगे, उतना ही बिल भरेंगे। यह मॉडल खासतौर पर उन बिजनेस और डेवलपर्स के लिए फायदेमंद होगा, जिन्हें समय-समय पर ज्यादा कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत पड़ती है।
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  • अदृश्य तकनीक: ऑल्टमैन चाहते हैं कि एआई इतना सुलभ हो जाए कि लोग इसके बारे में ज्यादा न सोचें। जब भी किसी मदद की जरूरत हो, यह वहां मौजूद रहे बिल्कुल नल खोलने पर पानी की तरह।
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काम करने का तरीका भी बदल रहा है
एआई पहले से ही कई इंडस्ट्री में काम करने का तरीका बदल रहा है। खासतौर पर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में इसका असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। आज कई एआई सिस्टम ऐसे कोड लिख सकते हैं जिनमें पहले इंजीनियरों को कई घंटे लगते थे। अब कंपनियां इन टूल्स का इस्तेमाल करके प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा कर पा रही हैं।

लेकिन इसका इस्तेमाल सिर्फ कोडिंग तक सीमित नहीं है। अब एआई वैज्ञानिक रिसर्च, डेटा एनालिसिस, बिजनेस स्ट्रैटेजी, कंटेंट और डिजाइन व मेडिकल रिसर्च जैसी चीजों में भी मदद कर रहा है। कई दफ्तरों में तो अब कर्मचारी, तकनीकी काम खुद करने के बजाय एआई सिस्टम को निर्देश देने में ज्यादा समय बिताते हैं।

आने वाले समय में एआई और ज्यादा सक्षम होगा
ऑल्टमैन का मानना है कि आज का एआई सिस्टम कुछ घंटों का काम कर सकता है, लेकिन आने वाले समय में यही सिस्टम कई दिनों या हफ्तों तक चलने वाले जटिल प्रोजेक्ट्स भी संभाल सकेंगे। इसका मतलब है कि एआई  केवल एक टूल नहीं रहेगा, बल्कि धीरे-धीरे “डिजिटल सहयोगी” की तरह काम करेगा।

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खुद भी एआई का इस्तेमाल करते हैं ऑल्टमैन
इन सबके बात सैम ऑल्टमैन ने बताया कि वह खुद अपनी रोजमर्रा के कामों के लिए एआई का इस्तेमाल करते हैं। कहा कि जब उन्हें कोई नया प्रोडक्ट आइडिया या बिजनेस स्ट्रैटेजी सूझती है, तो वे पहले एआई टूल्स से उस पर फीडबैक लेते हैं। इससे उन्हें अलग-अलग आइडियास मिलते हैं और विचार को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। भविष्य में जब एआई सिस्टम को कंपनी के डॉक्यूमेंट्स और डेटा तक अधिक एक्सेस मिलेगा, तब उनके जवाब और ज्यादा सटीक और उपयोगी हो सकते हैं।

एआई के लिए बन रहे हैं विशाल डेटा सेंटर
हालांकि एआई  को एक साधारण सर्विस बनाने के लिए बहुत बड़ी तकनीकी तैयारी की जरूरत है। एआई  मॉडल चलाने के लिए बड़े डेटा सेंटर, शक्तिशाली जीपीयू चिप, भारी मात्रा में बिजली और हाई-स्पीड नेटवर्क की आवश्यकता होती है। इसी वजह से एआई कंपनियां विशाल कंप्यूटिंग कैंपस बना रही हैं, जहां हजारों लोग इन सिस्टम्स को तैयार करने और चलाने में लगे हैं।

ये कंपनियां एआई में कर रहीं निवेश
एआई  इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए कई बड़ी कंपनियां निवेश कर रही हैं। इनमें ओपनएआई, अमेजन, एनवीडिया, सॉफ्टबैंक शामिल हैं। इन कंपनियों का लक्ष्य दुनिया भर में एआई की कंप्यूटिंग क्षमता को बढ़ाना है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग और बिजनेस इसका उपयोग कर सकें।

ऐसे में कहा जा रहा है कि अगर एआई का विकास इसी गति से जारी रहा, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह कोई नई टेक्नोलॉजी नहीं होगा। लोग इसका इस्तेमाल  लिखने और सीखने के लिए, समस्याएं हल करने के लिए, बिजनेस और प्रोडक्ट बनाने के लिए व रिसर्च और इनोवेशन के लिए करेंगे। जिसके लिए उन्हें  इसके बदले वे बिजली के बिल की तरह AI सर्विस का भुगतान करेंगे। यानी भविष्य में इंटेलिजेंस भी एक ऑन-डिमांड सर्विस बन सकती है।

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