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दिल्ली: स्मार्ट चश्मे से वीडियो बना इंस्टाग्राम पर उड़ाया मजाक, पीड़ित ने मेटा और क्रिएटर को भेजा कानूनी नोटिस
Thu, 27 Aug 2026 03:07 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 27 Aug 2026 03:07 PM IST
सार
दिल्ली के एक कैफे में बैठे शख्स का स्मार्ट ग्लासेज से बिना सहमति वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर रील पोस्ट कर दी गई। वीडियो वायरल होने और ऑनलाइन ट्रोलिंग के बाद पीड़ित ने प्राइवेसी उल्लंघन और मानहानि को लेकर मेटा और क्रिएटर को कानूनी नोटिस भेजा है।
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स्मार्ट चश्मे से रिकॉर्डिंग पर बढ़ा विवाद
- फोटो : मेटा
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विस्तार
स्मार्ट चश्मे के इस्तेमाल से निजता के हनन को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। दिल्ली के एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि खान मार्केट के एक कैफे में स्मार्ट चश्मे से उसकी जानकारी के बिना वीडियो रिकॉर्ड किया गया। बाद में यही वीडियो इंस्टाग्राम रील के तौर पर पोस्ट कर दिया गया। इस मामले में डिजिटल अधिकारों से जुड़े वकील अपर गुप्ता ने 24 अगस्त को मेटा और संबंधित इंस्टाग्राम क्रिएटर को कानूनी नोटिस भेजा है।
कैफे में बातचीत के दौरान रिकॉर्डिंग का आरोप
दो दिन बाद इंस्टाग्राम पर दिखी रील
नोटिस के अनुसार, कथित रिकॉर्डिंग के दो दिन बाद यह वीडियो 2 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स वाले वेरिफाइड इंस्टाग्राम अकाउंट पर रील के रूप में पोस्ट किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वीडियो में उसका मजाक उड़ाया गया और पोस्ट पर बड़ी संख्या में आपत्तिजनक कमेंट्स आए। वकील अपर गुप्ता के मुताबिक, 6 अगस्त तक रील को 4.19 लाख से अधिक बार देखा जा चुका था और इसे करीब 15,700 लाइक्स और 500 से ज्यादा कमेंट्स मिले थे।
शिकायत के बाद भी नहीं हटा वीडियो
मेटा ने स्मार्ट ग्लास की प्राइवेसी पर क्या कहा?
सार्वजनिक जगहों पर रिकॉर्डिंग के लिए क्या कहता कानून?
संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति और सूचना इकट्ठा करने की आजादी देता है। हालांकि, यह आजादी असीमित नहीं है। अगर आपकी रिकॉर्डिंग से किसी के अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो आप पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। सार्वजनिक जगह पर रिकॉर्डिंग करते समय निम्नलिखित कानूनी पहलुओं का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:
महिलाओं के मामले में: किसी महिला की सहमति के बिना उसकी ऐसी तस्वीरें या वीडियो लेना जो उसकी निजता का उल्लंघन करें, भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व IPC की धारा 354C (व्हॉयरिज्म/ताक-झांक) और आईटी एक्ट की धारा 66E के तहत एक गंभीर आपराधिक अपराध है।
सीमित सार्वजनिक स्थान: वॉशरुम, चेंजिंग रूम, या लॉकर रूम जैसी जगहें भले ही किसी सार्वजनिक इमारत (जैसे मॉल या सिनेमाहॉल) में हों, वहां रिकॉर्डिंग करना पूरी तरह गैरकानूनी और दंडनीय है।
कमर्शियल या निजी संपत्तियां: रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल, होटल, या सिनेमाहॉल जैसी जगहें जनता के लिए खुली होने के बावजूद तकनीकी रूप से निजी संपत्ति होती हैं। इन जगहों के मालिकों को अपने परिसर में रिकॉर्डिंग प्रतिबंधित करने का पूरा अधिकार है। अगर मैनेजमेंट आपको मना करता है और फिर भी आप रिकॉर्डिंग जारी रखते हैं, तो आप पर आपराधिक अतिक्रमण का मामला बन सकता है।
प्रैंक वीडियो और सोशल मीडिया पोस्टिंग
आजकल सोशल मीडिया रील्स या प्रैंक वीडियो बनाने का चलन है। इस मामले में कानून बेहद सख्त है:
मानहानि और उत्पीड़न: यदि रिकॉर्डिंग का उद्देश्य किसी को डराना, परेशान करना, नीचा दिखाना या उसकी छवि खराब करना है, तो पीड़ित व्यक्ति मानहानि या उत्पीड़न का केस दर्ज करा सकता है।
सार्वजनिक उपद्रव: अगर आपकी रिकॉर्डिंग की वजह से आम जनता को परेशानी होती है या रास्ते में बाधा आती है, तो इसे सार्वजनिक उपद्रव माना जाएगा।
पुलिस या सरकारी अधिकारियों की रिकॉर्डिंग
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कैफे में बातचीत के दौरान रिकॉर्डिंग का आरोप
- नोटिस के मुताबिक, यह घटना 24 जुलाई को खान मार्केट के एक कैफे में हुई। शिकायतकर्ता वहां अकेला बैठा था। आरोप है कि एक अनजान व्यक्ति उसके पास आया और बिना किसी पूर्व परिचय के सवाल-जवाब करने लगा।
- शिकायत में कहा गया है कि वह व्यक्ति कथित तौर पर शिकायतकर्ता का पीछा करता रहा और लगातार आपत्तिजनक या परेशान करने वाली बातें करता रहा। इसी दौरान स्मार्ट चश्मे से उसकी जानकारी के बिना बातचीत रिकॉर्ड किए जाने का आरोप है।
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दो दिन बाद इंस्टाग्राम पर दिखी रील
नोटिस के अनुसार, कथित रिकॉर्डिंग के दो दिन बाद यह वीडियो 2 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स वाले वेरिफाइड इंस्टाग्राम अकाउंट पर रील के रूप में पोस्ट किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वीडियो में उसका मजाक उड़ाया गया और पोस्ट पर बड़ी संख्या में आपत्तिजनक कमेंट्स आए। वकील अपर गुप्ता के मुताबिक, 6 अगस्त तक रील को 4.19 लाख से अधिक बार देखा जा चुका था और इसे करीब 15,700 लाइक्स और 500 से ज्यादा कमेंट्स मिले थे।
शिकायत के बाद भी नहीं हटा वीडियो
- शिकायतकर्ता ने अगले दिन इंस्टाग्राम पर वीडियो की रिपोर्ट की। नोटिस में दावा किया गया है कि प्लेटफॉर्म पर बिना सहमति रिकॉर्ड किए गए वीडियो के लिए अलग रिपोर्टिंग कैटेगरी नहीं थी, इसलिए शिकायत को बुलिंग के तहत दर्ज किया गया।
- नोटिस के मुताबिक, मेटा ने दो बार जवाब दिया कि पोस्ट उसके कम्यूनिटी स्टैंडर्ड्स का उल्लंघन नहीं करती। इसमें यह भी दावा किया गया कि 9 अगस्त को अकाउंट कुछ समय के लिए गायब हुआ, लेकिन बाद में लौट आया और वीडियो उपलब्ध रहा।
- कानूनी नोटिस में वीडियो हटाने, सार्वजनिक माफी मांगने, रिकॉर्डिंग में शामिल लोगों की जानकारी देने और वीडियो से जुड़े मेटाडेटा को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। अभी इस मामले में कोई कोर्ट याचिका दाखिल नहीं हुई है और नोटिस में इंस्टाग्राम क्रिएटर का नाम भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
मेटा ने स्मार्ट ग्लास की प्राइवेसी पर क्या कहा?
- मेटा ने सीधे आरोपों पर प्रतिक्रिया नहीं दी। हालांकि, कंपनी ने अपने स्मार्ट ग्लास में मौजूद प्राइवेसी सुरक्षा उपायों की जानकारी साझा की है। कंपनी के अनुसार, चश्मे में एक कैप्चर एलईडी लगी होती है, जिसे बंद नहीं किया जा सकता। अगर इसमें छेड़छाड़ की कोशिश की जाती है तो रिकॉर्डिंग की सुविधा बंद हो जाती है।
- इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी ने भी हाल में कहा था कि मेटा लोगों को दूसरों की रिकॉर्डिंग करने से पूरी तरह नहीं रोक सकता। हालांकि, कंपनी यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती है कि रिकॉर्डिंग के दौरान संकेत देने वाली लाइट सक्रिय रहे।
सार्वजनिक जगहों पर रिकॉर्डिंग के लिए क्या कहता कानून?
संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति और सूचना इकट्ठा करने की आजादी देता है। हालांकि, यह आजादी असीमित नहीं है। अगर आपकी रिकॉर्डिंग से किसी के अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो आप पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। सार्वजनिक जगह पर रिकॉर्डिंग करते समय निम्नलिखित कानूनी पहलुओं का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:
महिलाओं के मामले में: किसी महिला की सहमति के बिना उसकी ऐसी तस्वीरें या वीडियो लेना जो उसकी निजता का उल्लंघन करें, भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्व IPC की धारा 354C (व्हॉयरिज्म/ताक-झांक) और आईटी एक्ट की धारा 66E के तहत एक गंभीर आपराधिक अपराध है।
सीमित सार्वजनिक स्थान: वॉशरुम, चेंजिंग रूम, या लॉकर रूम जैसी जगहें भले ही किसी सार्वजनिक इमारत (जैसे मॉल या सिनेमाहॉल) में हों, वहां रिकॉर्डिंग करना पूरी तरह गैरकानूनी और दंडनीय है।
कमर्शियल या निजी संपत्तियां: रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल, होटल, या सिनेमाहॉल जैसी जगहें जनता के लिए खुली होने के बावजूद तकनीकी रूप से निजी संपत्ति होती हैं। इन जगहों के मालिकों को अपने परिसर में रिकॉर्डिंग प्रतिबंधित करने का पूरा अधिकार है। अगर मैनेजमेंट आपको मना करता है और फिर भी आप रिकॉर्डिंग जारी रखते हैं, तो आप पर आपराधिक अतिक्रमण का मामला बन सकता है।
प्रैंक वीडियो और सोशल मीडिया पोस्टिंग
आजकल सोशल मीडिया रील्स या प्रैंक वीडियो बनाने का चलन है। इस मामले में कानून बेहद सख्त है:
मानहानि और उत्पीड़न: यदि रिकॉर्डिंग का उद्देश्य किसी को डराना, परेशान करना, नीचा दिखाना या उसकी छवि खराब करना है, तो पीड़ित व्यक्ति मानहानि या उत्पीड़न का केस दर्ज करा सकता है।
सार्वजनिक उपद्रव: अगर आपकी रिकॉर्डिंग की वजह से आम जनता को परेशानी होती है या रास्ते में बाधा आती है, तो इसे सार्वजनिक उपद्रव माना जाएगा।
पुलिस या सरकारी अधिकारियों की रिकॉर्डिंग
- ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी या सरकारी कर्मचारी की सार्वजनिक स्थान पर रिकॉर्डिंग करना अवैध नहीं है। वे जनता के प्रति जवाबदेह हैं और पारदर्शिता के लिए उनकी रिकॉर्डिंग की जा सकती है।
- हालांकि, रिकॉर्डिंग करते समय आप उनके काम में किसी भी तरह की बाधा नहीं डाल सकते। इसके अलावा, संवेदनशील या हाई-सिक्योरिटी जोन (जैसे सैन्य क्षेत्र या कुछ प्रतिबंधित सरकारी कार्यालय) में ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत रिकॉर्डिंग पूरी तरह प्रतिबंधित होती है।