{"_id":"6a8ff29fea91fddca20858ae","slug":"meta-facebook-instagram-night-ban-us-settlement-kids-safety-rules-2026-08-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमेरिका: बच्चों के रात में फेसबुक-इंस्टाग्राम चलाने पर रोक, मेटा अपने प्लेटफॉर्म में करेगी चार बड़े बदलाव","category":{"title":"Tech Diary","title_hn":"टेक डायरी","slug":"tech-diary"}}
अमेरिका: बच्चों के रात में फेसबुक-इंस्टाग्राम चलाने पर रोक, मेटा अपने प्लेटफॉर्म में करेगी चार बड़े बदलाव
Thu, 27 Aug 2026 01:47 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 27 Aug 2026 01:47 PM IST
सार
Meta Lawsuit: अमेरिका में बच्चों को सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मेटा और 48 अमेरिकी राज्यों के बीच 1.72 लाख करोड़ रुपये के समझौते के बाद, मेटा को कुछ नए नियम मानने पड़ेंगे। इसके तहत अब बच्चे रात में फेसबुक-इंस्टाग्राम का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
विज्ञापन
मेटा ने 16.7 बिलियन डॉलर देकर की सेटलमेंट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की लत आज के समय में बच्चों के लिए एक गंभीर मानसिक चुनौती बनती जा रही है। देर रात तक स्मार्टफोन चलाना और इंस्टाग्राम रील्स खिसकाना अब आम बात है। लेकिन अमेरिका ने इस दिशा में एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। वहां रहने वाले बच्चे और किशोर (टीनेजर्स) अब रात के वक्त फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। दिग्गज टेक कंपनी मेटा (Meta) को 48 अमेरिकी राज्यों के साथ लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 18 बिलियन डॉलर (करीब 1.72 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम समझौता करना पड़ा है।
डेली यूज लिमिट: बच्चों के लिए रोजाना एप इस्तेमाल करने की एक निश्चित समय सीमा तय की जाएगी, जिससे वे घंटों तक फोन में न उलझे रहें।
रात में पाबंदी: रात के समय ये दोनों एप्स बच्चों के लिए खुद-ब-खुद ब्लॉक हो जाएंगे, ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपनी पूरी नींद ले सकें।
विज्ञापन
एज वेरिफिकेशन: छोटे बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स से दूर रखने के लिए उम्र जांचने का एक कड़ा और सटीक वेरिफिकेशन सिस्टम लागू किया जाएगा।
पैरेंटल कंट्रोल: माता-पिता को ऐसे खास फीचर्स और टूल्स दिए जाएंगे, जिससे वे अपने बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर पैनी नजर रख सकेंगे।
लत लगाने वाला एल्गोरिदम: मेटा पर लगे आरोपों में बताया गया कि इन एप्स का डिजाइन ऐसा है कि लगातार आने वाले नोटिफिकेशन और 'लाइक' का चक्र बच्चों के दिमाग में डोपामाइन (खुशी का हार्मोन) रिलीज करता है। इससे उनका स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण खत्म हो जाता है और उन्हें इसकी बुरी लत लग जाती है।
हीन भावना और असंतोष: इंस्टाग्राम पर दिखने वाली फिल्टर युक्त परफेक्ट तस्वीरें देखकर बच्चों में अपने शरीर, रंग-रूप और जीवन को लेकर दूसरों से तुलना करने की आदत पड़ रही थी, जिससे उनमें हीन भावना पैदा हो रही थी।
नींद की कमी और डिप्रेशन: देर रात तक फोन स्क्रीन देखने (नाइट स्क्रॉलिंग) से बच्चों की नींद का चक्र पूरी तरह बिगड़ रहा था। नींद की यह पुरानी कमी आगे चलकर डिप्रेशन, चिंता और पढ़ाई में एकाग्रता की कमी का बड़ा कारण बनती है।
साइबर बुलिंग और पीछे छूटने का डर: ऑनलाइन ट्रोलिंग और दोस्तों से पीछे छूट जाने के डर (FOMO) के कारण बच्चों के आत्म-सम्मान को गहरी ठेस पहुंच रही थी, जो उनके मानसिक विकास के लिए बेहद खतरनाक है।
विज्ञापन
मेटा को अपने प्लेटफॉर्म पर करने होंगे ये 4 बड़े बदलाव
इस समझौते के तहत मेटा को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने सिस्टम में तत्काल प्रभाव से कई बदलाव करने होंगे। इसे हम इन प्रमुख बिंदुओं से समझ सकते हैं:
विज्ञापन
डेली यूज लिमिट: बच्चों के लिए रोजाना एप इस्तेमाल करने की एक निश्चित समय सीमा तय की जाएगी, जिससे वे घंटों तक फोन में न उलझे रहें।
रात में पाबंदी: रात के समय ये दोनों एप्स बच्चों के लिए खुद-ब-खुद ब्लॉक हो जाएंगे, ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपनी पूरी नींद ले सकें।
विज्ञापन
एज वेरिफिकेशन: छोटे बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स से दूर रखने के लिए उम्र जांचने का एक कड़ा और सटीक वेरिफिकेशन सिस्टम लागू किया जाएगा।
पैरेंटल कंट्रोल: माता-पिता को ऐसे खास फीचर्स और टूल्स दिए जाएंगे, जिससे वे अपने बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर पैनी नजर रख सकेंगे।
सोशल मीडिया बच्चों को कैसे पहुंचा रहा था नुकसान?
अदालती दस्तावेजों और कई रिसर्च के मुताबिक, फेसबुक और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल बच्चों की मानसिक सेहत पर कई तरह से बुरा असर डाल रहा था।लत लगाने वाला एल्गोरिदम: मेटा पर लगे आरोपों में बताया गया कि इन एप्स का डिजाइन ऐसा है कि लगातार आने वाले नोटिफिकेशन और 'लाइक' का चक्र बच्चों के दिमाग में डोपामाइन (खुशी का हार्मोन) रिलीज करता है। इससे उनका स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण खत्म हो जाता है और उन्हें इसकी बुरी लत लग जाती है।
हीन भावना और असंतोष: इंस्टाग्राम पर दिखने वाली फिल्टर युक्त परफेक्ट तस्वीरें देखकर बच्चों में अपने शरीर, रंग-रूप और जीवन को लेकर दूसरों से तुलना करने की आदत पड़ रही थी, जिससे उनमें हीन भावना पैदा हो रही थी।
नींद की कमी और डिप्रेशन: देर रात तक फोन स्क्रीन देखने (नाइट स्क्रॉलिंग) से बच्चों की नींद का चक्र पूरी तरह बिगड़ रहा था। नींद की यह पुरानी कमी आगे चलकर डिप्रेशन, चिंता और पढ़ाई में एकाग्रता की कमी का बड़ा कारण बनती है।
साइबर बुलिंग और पीछे छूटने का डर: ऑनलाइन ट्रोलिंग और दोस्तों से पीछे छूट जाने के डर (FOMO) के कारण बच्चों के आत्म-सम्मान को गहरी ठेस पहुंच रही थी, जो उनके मानसिक विकास के लिए बेहद खतरनाक है।