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एआई पर बोले बिल गेट्स: दुनिया इसके लिए तैयार नहीं, बढ़ेगा साइबर अटैक का खतरा, एंट्री-लेवल नौकरियां होंगी कम
Thu, 27 Aug 2026 09:18 AM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 27 Aug 2026 09:18 AM IST
सार
Bill Gates On AI: माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने एआई के बढ़ते प्रभाव को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि तकनीक जहां मेडिकल और शिक्षा में बदलाव ला सकती है, वहीं नौकरियों, साइबर सुरक्षा और युवाओं के करियर पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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बिल गेट्स, पूर्व सीईओ, माइक्रोसॉफ्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (AI) तेजी से हमारी जिंदगी और काम करने के तरीके को बदल रहा है। लेकिन इस बदलाव के साथ कई गंभीर चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने चेताया है कि दुनिया अभी एआई के बड़े प्रभावों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में इसका असर रोजगार से लेकर साइबर सुरक्षा और समाज तक पर दिखाई देगा।
अगले 10 साल में तेजी से बदलेगा कामकाज
बिल गेट्स ने अपने ब्लॉग पोस्ट 'द टर्बुलेंट एआई एरा इज हियर' में एआई के दौर को बेहद महत्वपूर्ण बदलाव का समय बताया है। उनके मुताबिक, पहले तकनीकी बदलावों को समाज में व्यापक असर डालने में काफी लंबा समय लगता था, लेकिन एआई कई उद्योगों को अगले कुछ वर्षों में ही बदल सकता है।
उनका कहना है कि सरकारों को अभी से ऐसी नीतियां बनानी होंगी, जो तकनीकी बदलाव के बीच रोजगार के अवसर बनाए रखने में मदद करें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कई क्षेत्रों में नौकरियों की संख्या घट सकती है और बेरोजगारी का दबाव बढ़ सकता है।
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युवाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती
एआई से होने वाले बदलाव का एक बड़ा असर करियर की शुरुआत करने वाले युवाओं पर पड़ सकता है। गेट्स के मुताबिक, कंपनियां आने वाले समय में ऐसे कई शुरुआती स्तर के काम एआई से कराने लगेंगी, जिन्हें फिलहाल नए कर्मचारी करते हैं।
इससे एंट्री-लेवल नौकरियों के अवसर कम हो सकते हैं। समस्या सिर्फ नौकरी मिलने तक सीमित नहीं होगी। शुरुआती कर्मचारी आमतौर पर वरिष्ठ लोगों के साथ काम करते हुए अनुभव हासिल करते हैं। अगर ऐसे पद ही कम हो गए तो युवाओं के लिए अनुभव जुटाना और करियर की शुरुआत करना भी मुश्किल हो सकता है।
साइबर अटैक और डीपफेक का खतरा
गेट्स ने एआई के गलत इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई है। जैसे-जैसे एआई अधिक सक्षम होगा, साइबर अपराधियों के लिए धोखाधड़ी, फर्जी सामग्री और साइबर हमले करना आसान हो सकता है।
डीपफेक वीडियो और दूसरी नकली सामग्री के कारण इंटरनेट पर सही और गलत जानकारी में अंतर करना भी कठिन हो सकता है। गेट्स ने यह आशंका भी जताई कि शक्तिशाली एआई सिस्टम का इस्तेमाल कुछ सरकारें भी गलत उद्देश्यों के लिए कर सकती हैं।
कई बड़े सेक्टर में बदलेगा इंसानों का काम
बिल गेट्स का मानना है कि एआई का प्रभाव सिर्फ टेक्नोलॉजी कंपनियों तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। उनके मुताबिक, कानून, मेडिकल सेवाओं, ग्राहक सहायता, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी एआई के जरिए ऑटोमेशन बढ़ सकता है।
गेट्स के मुताबिक, भविष्य में उपलब्ध होने वाली नई नौकरियों के लिए पहले से ज्यादा विशेषज्ञता की जरूरत हो सकती है। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को बदलते रोजगार बाजार के हिसाब से लगातार नई स्किल सीखनी होंगी।
निर्माण और होटल इंडस्ट्री में रोबोट की एंट्री
एआई और रोबोटिक्स का असर शारीरिक श्रम वाले कामों पर भी पड़ सकता है। गेट्स का अनुमान है कि दशक के अंत तक स्मार्ट रोबोट निर्माण जैसे क्षेत्रों में इंसानों के साथ-साथ कई काम करने लगेंगे। कंस्ट्रक्शन और होटल-टूरिज्म जैसे सेक्टर में भी रोबोट आधारित ऑटोमेशन का इस्तेमाल बढ़ सकता है। इससे काम करने के पारंपरिक तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
एआई को रोकने के बजाय तैयारी की जरूरत
बिल गेट्स एआई तकनीक को रोकने के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि इसका सही इस्तेमाल मेडिकल क्षेत्र, शिक्षा और खेती समेत कई क्षेत्रों में बड़े फायदे दे सकता है। हालांकि, इसके लिए सरकारों को रोजगार और सुरक्षा से जुड़े जोखिमों पर पहले से काम करना होगा।
गेट्स ने सुझाव दिया है कि एआई और रोबोट से होने वाले ऑटोमेशन पर टैक्स लगाने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। इससे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल उन लोगों की मदद के लिए किया जा सकता है, जिनकी नौकरियां ऑटोमेशन के कारण प्रभावित होंगी।
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अगले 10 साल में तेजी से बदलेगा कामकाज
बिल गेट्स ने अपने ब्लॉग पोस्ट 'द टर्बुलेंट एआई एरा इज हियर' में एआई के दौर को बेहद महत्वपूर्ण बदलाव का समय बताया है। उनके मुताबिक, पहले तकनीकी बदलावों को समाज में व्यापक असर डालने में काफी लंबा समय लगता था, लेकिन एआई कई उद्योगों को अगले कुछ वर्षों में ही बदल सकता है।
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उनका कहना है कि सरकारों को अभी से ऐसी नीतियां बनानी होंगी, जो तकनीकी बदलाव के बीच रोजगार के अवसर बनाए रखने में मदद करें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कई क्षेत्रों में नौकरियों की संख्या घट सकती है और बेरोजगारी का दबाव बढ़ सकता है।
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युवाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती
एआई से होने वाले बदलाव का एक बड़ा असर करियर की शुरुआत करने वाले युवाओं पर पड़ सकता है। गेट्स के मुताबिक, कंपनियां आने वाले समय में ऐसे कई शुरुआती स्तर के काम एआई से कराने लगेंगी, जिन्हें फिलहाल नए कर्मचारी करते हैं।
इससे एंट्री-लेवल नौकरियों के अवसर कम हो सकते हैं। समस्या सिर्फ नौकरी मिलने तक सीमित नहीं होगी। शुरुआती कर्मचारी आमतौर पर वरिष्ठ लोगों के साथ काम करते हुए अनुभव हासिल करते हैं। अगर ऐसे पद ही कम हो गए तो युवाओं के लिए अनुभव जुटाना और करियर की शुरुआत करना भी मुश्किल हो सकता है।
साइबर अटैक और डीपफेक का खतरा
गेट्स ने एआई के गलत इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई है। जैसे-जैसे एआई अधिक सक्षम होगा, साइबर अपराधियों के लिए धोखाधड़ी, फर्जी सामग्री और साइबर हमले करना आसान हो सकता है।
डीपफेक वीडियो और दूसरी नकली सामग्री के कारण इंटरनेट पर सही और गलत जानकारी में अंतर करना भी कठिन हो सकता है। गेट्स ने यह आशंका भी जताई कि शक्तिशाली एआई सिस्टम का इस्तेमाल कुछ सरकारें भी गलत उद्देश्यों के लिए कर सकती हैं।
कई बड़े सेक्टर में बदलेगा इंसानों का काम
बिल गेट्स का मानना है कि एआई का प्रभाव सिर्फ टेक्नोलॉजी कंपनियों तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। उनके मुताबिक, कानून, मेडिकल सेवाओं, ग्राहक सहायता, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी एआई के जरिए ऑटोमेशन बढ़ सकता है।
गेट्स के मुताबिक, भविष्य में उपलब्ध होने वाली नई नौकरियों के लिए पहले से ज्यादा विशेषज्ञता की जरूरत हो सकती है। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को बदलते रोजगार बाजार के हिसाब से लगातार नई स्किल सीखनी होंगी।
निर्माण और होटल इंडस्ट्री में रोबोट की एंट्री
एआई और रोबोटिक्स का असर शारीरिक श्रम वाले कामों पर भी पड़ सकता है। गेट्स का अनुमान है कि दशक के अंत तक स्मार्ट रोबोट निर्माण जैसे क्षेत्रों में इंसानों के साथ-साथ कई काम करने लगेंगे। कंस्ट्रक्शन और होटल-टूरिज्म जैसे सेक्टर में भी रोबोट आधारित ऑटोमेशन का इस्तेमाल बढ़ सकता है। इससे काम करने के पारंपरिक तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
एआई को रोकने के बजाय तैयारी की जरूरत
बिल गेट्स एआई तकनीक को रोकने के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि इसका सही इस्तेमाल मेडिकल क्षेत्र, शिक्षा और खेती समेत कई क्षेत्रों में बड़े फायदे दे सकता है। हालांकि, इसके लिए सरकारों को रोजगार और सुरक्षा से जुड़े जोखिमों पर पहले से काम करना होगा।
गेट्स ने सुझाव दिया है कि एआई और रोबोट से होने वाले ऑटोमेशन पर टैक्स लगाने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। इससे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल उन लोगों की मदद के लिए किया जा सकता है, जिनकी नौकरियां ऑटोमेशन के कारण प्रभावित होंगी।