{"_id":"6981e61be0115d0fb80bcb6f","slug":"google-shuts-proxy-network-using-millions-of-smartphones-and-pc-cyber-security-2026-02-03","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Google का बड़ा एक्शन: लाखों स्मार्टफोन और PC को हैक कर चल रहा था साइबर नेटवर्क, खतरनाक Proxy सिस्टम किया बंद","category":{"title":"Technology","title_hn":"टेक्नोलॉजी","slug":"technology"}}
Google का बड़ा एक्शन: लाखों स्मार्टफोन और PC को हैक कर चल रहा था साइबर नेटवर्क, खतरनाक Proxy सिस्टम किया बंद
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 03 Feb 2026 05:42 PM IST
विज्ञापन
सार
गूगल ने एक बड़े साइबर ऑपरेशन का खुलासा करते हुए दुनिया के सबसे खतरनाक प्रॉक्सी नेटवर्क्स में से एक को खत्म करने का दावा किया है। यह नेटवर्क चुपचाप लाखों एंड्रॉयड फोन और विंडोज PC को हैक कर साइबर अपराधियों के लिए इस्तेमाल कर रहा था।
साइबर क्राइम (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : amar ujala
विज्ञापन
विस्तार
गूगल थ्रेट इंटेलिजेंस ग्रुप (GTIG) और उसके सहयोगी संगठनों ने हाल ही में एक बड़े साइबर नेटवर्क को खत्म करने की घोषणा की है। कंपनी के मुताबिक, IPIDEA नाम का यह नेटवर्क लंबे समय से गुप्त तरीके से काम कर रहा था और साइबर अपराधियों को इंटरनेट गतिविधियों को छिपाने में मदद कर रहा था।
गूगल ने बताया कि यह नेटवर्क एंड्रॉयड स्मार्टफोन और विंडोज कंप्यूटर को बिना जानकारी के इंटरनेट प्रॉक्सी में बदल देता था। इससे हैकर्स इन डिवाइस के घरेलू इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करके अपनी असली पहचान छिपा सकते थे।
क्या होता है रेजिडेंशियल प्रॉक्सी नेटवर्क
रेजिडेंशियल प्रॉक्सी नेटवर्क एक अवैध और अनैतिक तकनीक होती है, जिसमें इंटरनेट ट्रैफिक को किसी व्यक्ति के डिवाइस के जरिए भेजा जाता है ताकि असली स्रोत छिपाया जा सके। इसमें कमर्शियल सर्वर की बजाय आम लोगों के डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे गतिविधि सामान्य यूजर जैसी दिखाई देती है।
ऐसे नेटवर्क का उपयोग अक्सर पासवर्ड चोरी, अकाउंट हैकिंग, डेटा स्क्रैपिंग और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए किया जाता है। क्योंकि ट्रैफिक सामान्य घर या मोबाइल नेटवर्क से आता हुआ दिखता है, इसलिए सुरक्षा सिस्टम के लिए इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है।
एप्स और सॉफ्टवेयर के जरिए फैलाया गया नेटवर्क
Google के अनुसार, यह नेटवर्क कई खतरनाक एंड्रॉयड एप्स और विंडोज प्रॉक्सी सॉफ्टवेयर के जरिए फैलाया गया था। ये एप्स आधिकारिक एप स्टोर के बाहर और थर्ड पार्टी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध थे।
इन एप्स में ऐसी तकनीक थी जो बैकग्राउंड में लगातार काम करती रहती थी और यूजर को इसकी जानकारी भी नहीं होती थी। कई मामलों में बैटरी या डेटा इस्तेमाल में भी कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आता था, जिससे यूजर्स को शक नहीं होता था।
गूगल ने कैसे लिया एक्शन
GTIG और उसके सहयोगियों ने इस नेटवर्क के कमांड और कंट्रोल सर्वर की पहचान कर उसे बंद कराया। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स और डोमेन रजिस्ट्रार के साथ मिलकर उन सर्वर और डोमेन को बंद किया गया जो संक्रमित डिवाइस को निर्देश भेजते थे। Google ने यह भी बताया कि अब उसके सुरक्षा सिस्टम को अपडेट कर दिया गया है, जिससे भविष्य में इसी तरह के नेटवर्क को जल्दी पहचाना जा सकेगा।
Google ने मोबाइल प्लेटफॉर्म, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और टेक कंपनियों से अपील की है कि वे इस तरह के अवैध प्रॉक्सी नेटवर्क को रोकने के लिए एक-दूसरे के साथ जानकारी साझा करें और सुरक्षा उपाय मजबूत करें।
Trending Videos
गूगल ने बताया कि यह नेटवर्क एंड्रॉयड स्मार्टफोन और विंडोज कंप्यूटर को बिना जानकारी के इंटरनेट प्रॉक्सी में बदल देता था। इससे हैकर्स इन डिवाइस के घरेलू इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करके अपनी असली पहचान छिपा सकते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
क्या होता है रेजिडेंशियल प्रॉक्सी नेटवर्क
रेजिडेंशियल प्रॉक्सी नेटवर्क एक अवैध और अनैतिक तकनीक होती है, जिसमें इंटरनेट ट्रैफिक को किसी व्यक्ति के डिवाइस के जरिए भेजा जाता है ताकि असली स्रोत छिपाया जा सके। इसमें कमर्शियल सर्वर की बजाय आम लोगों के डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे गतिविधि सामान्य यूजर जैसी दिखाई देती है।
ऐसे नेटवर्क का उपयोग अक्सर पासवर्ड चोरी, अकाउंट हैकिंग, डेटा स्क्रैपिंग और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए किया जाता है। क्योंकि ट्रैफिक सामान्य घर या मोबाइल नेटवर्क से आता हुआ दिखता है, इसलिए सुरक्षा सिस्टम के लिए इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है।
एप्स और सॉफ्टवेयर के जरिए फैलाया गया नेटवर्क
Google के अनुसार, यह नेटवर्क कई खतरनाक एंड्रॉयड एप्स और विंडोज प्रॉक्सी सॉफ्टवेयर के जरिए फैलाया गया था। ये एप्स आधिकारिक एप स्टोर के बाहर और थर्ड पार्टी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध थे।
इन एप्स में ऐसी तकनीक थी जो बैकग्राउंड में लगातार काम करती रहती थी और यूजर को इसकी जानकारी भी नहीं होती थी। कई मामलों में बैटरी या डेटा इस्तेमाल में भी कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आता था, जिससे यूजर्स को शक नहीं होता था।
गूगल ने कैसे लिया एक्शन
GTIG और उसके सहयोगियों ने इस नेटवर्क के कमांड और कंट्रोल सर्वर की पहचान कर उसे बंद कराया। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स और डोमेन रजिस्ट्रार के साथ मिलकर उन सर्वर और डोमेन को बंद किया गया जो संक्रमित डिवाइस को निर्देश भेजते थे। Google ने यह भी बताया कि अब उसके सुरक्षा सिस्टम को अपडेट कर दिया गया है, जिससे भविष्य में इसी तरह के नेटवर्क को जल्दी पहचाना जा सकेगा।
Google ने मोबाइल प्लेटफॉर्म, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और टेक कंपनियों से अपील की है कि वे इस तरह के अवैध प्रॉक्सी नेटवर्क को रोकने के लिए एक-दूसरे के साथ जानकारी साझा करें और सुरक्षा उपाय मजबूत करें।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest gadget news and mobile reviews, apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news in hindi from Tech and more Hindi News.
विज्ञापन
विज्ञापन
