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Antivirus: क्या फोन के लिए एंटीवायरस खरीदना पैसों की बर्बादी है? 90% स्मार्टफोन यूजर्स नहीं जानते ये सीक्रेट
Wed, 19 Aug 2026 09:40 AM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Wed, 19 Aug 2026 09:40 AM IST
सार
Android Phone Security: आज स्मार्टफोन में हमारी पूरी दुनिया स्मार्टफोन के इर्द-गिर्द सिमट चुकी है, जिसके चलते साइबर खतरे भी तेजी से बढ़े हैं। लेकिन क्या एंड्रॉयड फोन को हैकर्स से बचाने के लिए अलग से एंटीवायरस एप खरीदना जरूरी है?
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क्या फोन में एंटीवायरस इंस्टॉल करना जरूरी है?
- फोटो : Adobe stock
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विस्तार
आज के लाइफस्टाइल में स्मार्टफोन महज बातचीत का साधन नहीं रह गए हैं। ये हमारी पूरी जिंदगी का 'डिजिटल लॉकर' बन चुके हैं। ऑफिस के जरूरी दस्तावेजों से लेकर हमारी निजी तस्वीरें, वीडियोज और बैंकिंग डिटेल्स तक, सब कुछ इसी छोटी सी डिवाइस में सेव रहता है। लेकिन तकनीक जितनी एडवांस हो रही है, साइबर फ्रॉड और हैकिंग का खतरा भी उसी रफ्तार से बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में अक्सर यह सलाह दी जाती है कि अपने फोन में तुरंत एक बढ़िया एंटीवायरस (Antivirus) इंस्टॉल कर लें। लेकिन क्या आपके स्मार्टफोन को वाकई में एंटीवायरस की जरूरत होती है या इसे खरीदना सिर्फ पैसों की बर्बादी है? आइए जानने की कोशिश करते हैं।
Android फोन पहले से देता है बिल्ट-इन सिक्योरिटी
अगर आप एक सामान्य स्मार्टफोन यूजर हैं, तो आपको यह जानकर राहत मिलेगी कि आजकल बिकने वाले ज्यादातर एंड्रॉयड फोन्स में सुरक्षा के कड़े इंतजाम पहले से मौजूद होते हैं। गूगल का अपना सुरक्षा कवच, जिसे Google Play Protect कहा जाता है, आपके फोन में 24 घंटे एक्टिव रहता है। यह टूल न सिर्फ Google Play Store से डाउनलोड होने वाले एप्स को गहराई से स्कैन करता है, बल्कि आपके फोन में पहले से मौजूद एप्स पर भी पैनी नजर रखता है ताकि कोई भी खतरनाक वायरस डिवाइस में सेंध न लगा सके।
इसके अलावा, एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम आपको 'एप परमिशन' को कंट्रोल करने की सुविधा और नियमित सिक्योरिटी अपडेट्स देता है। अगर आप अपने फोन को समय-समय पर अपडेट रखते हैं, तो एक आम यूजर के तौर पर आपको किसी बाहर से किसी एंटीवायरस को इंस्टॉल करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है।
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तो फिर Antivirus एप किसे चाहिए?
इन-बिल्ट फीचर्स का मतलब यह कतई नहीं है कि एंटीवायरस एप्स पूरी तरह से बेकार हैं। कुछ खास परिस्थितियों में ये एप्स सुरक्षा की एक एक्स्ट्रा लेयर का काम करते हैं। अगर आप उन यूजर्स में से हैं जिन्हें इंटरनेट पर अनजान वेबसाइट्स खंगालने का शौक है, या आप अक्सर थर्ड-पार्टी ऐप स्टोर्स और सीधे इंटरनेट से APK फाइल्स डाउनलोड करते हैं, तो आपका फोन हमेशा रिस्क पर रहता है।
ऐसी स्थिति में एक अच्छा एंटीवायरस एप आपको फिशिंग लिंक्स, खतरनाक वेबसाइट्स और संदिग्ध फाइल्स के बारे में तुरंत अलर्ट कर सकता है। हालांकि, सीधे Play Store का इस्तेमाल करने वाले 90 प्रतिशत यूजर्स को इन एक्स्ट्रा फीचर्स की कोई खास आवश्यकता नहीं होती है।
असली खतरा वायरस नहीं, बल्कि लापरवाही है
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन की सेफ्टी सिर्फ किसी सॉफ्टवेयर या एंटीवायरस पर निर्भर नहीं करती। आज के समय में सबसे बड़ा खतरा खुद यूजर की गलतियां हैं। कई बार यूजर्स बिना सोचे-समझे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक कर देते हैं, संदिग्ध वेबसाइट्स से APK फाइल इंस्टॉल कर लेते हैं या फिर किसी साधारण से एप को बेवजह कैमरा, माइक और कॉन्टैक्ट्स की एक्सेस (परमिशन) दे देते हैं।
साइबर अपराधी अब सीधे फोन हैक करने के बजाय यूजर्स को फंसाने के नए तरीके आजमा रहे हैं। व्हाट्सएप, एसएमएस या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लुभावने ऑफर्स वाले फर्जी लिंक्स भेजे जाते हैं। ऐसे में अगर आप पुराने ओएस (OS) पर फोन चला रहे हैं और आंख मूंदकर किसी भी लिंक पर क्लिक कर रहे हैं, तो दुनिया का कोई भी एंटीवायरस आपके डिवाइस को सुरक्षित नहीं रख सकता। सतर्कता ही आपके स्मार्टफोन का सबसे बेहतरीन एंटीवायरस है।
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Android फोन पहले से देता है बिल्ट-इन सिक्योरिटी
अगर आप एक सामान्य स्मार्टफोन यूजर हैं, तो आपको यह जानकर राहत मिलेगी कि आजकल बिकने वाले ज्यादातर एंड्रॉयड फोन्स में सुरक्षा के कड़े इंतजाम पहले से मौजूद होते हैं। गूगल का अपना सुरक्षा कवच, जिसे Google Play Protect कहा जाता है, आपके फोन में 24 घंटे एक्टिव रहता है। यह टूल न सिर्फ Google Play Store से डाउनलोड होने वाले एप्स को गहराई से स्कैन करता है, बल्कि आपके फोन में पहले से मौजूद एप्स पर भी पैनी नजर रखता है ताकि कोई भी खतरनाक वायरस डिवाइस में सेंध न लगा सके।
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इसके अलावा, एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम आपको 'एप परमिशन' को कंट्रोल करने की सुविधा और नियमित सिक्योरिटी अपडेट्स देता है। अगर आप अपने फोन को समय-समय पर अपडेट रखते हैं, तो एक आम यूजर के तौर पर आपको किसी बाहर से किसी एंटीवायरस को इंस्टॉल करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है।
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तो फिर Antivirus एप किसे चाहिए?
इन-बिल्ट फीचर्स का मतलब यह कतई नहीं है कि एंटीवायरस एप्स पूरी तरह से बेकार हैं। कुछ खास परिस्थितियों में ये एप्स सुरक्षा की एक एक्स्ट्रा लेयर का काम करते हैं। अगर आप उन यूजर्स में से हैं जिन्हें इंटरनेट पर अनजान वेबसाइट्स खंगालने का शौक है, या आप अक्सर थर्ड-पार्टी ऐप स्टोर्स और सीधे इंटरनेट से APK फाइल्स डाउनलोड करते हैं, तो आपका फोन हमेशा रिस्क पर रहता है।
ऐसी स्थिति में एक अच्छा एंटीवायरस एप आपको फिशिंग लिंक्स, खतरनाक वेबसाइट्स और संदिग्ध फाइल्स के बारे में तुरंत अलर्ट कर सकता है। हालांकि, सीधे Play Store का इस्तेमाल करने वाले 90 प्रतिशत यूजर्स को इन एक्स्ट्रा फीचर्स की कोई खास आवश्यकता नहीं होती है।
असली खतरा वायरस नहीं, बल्कि लापरवाही है
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन की सेफ्टी सिर्फ किसी सॉफ्टवेयर या एंटीवायरस पर निर्भर नहीं करती। आज के समय में सबसे बड़ा खतरा खुद यूजर की गलतियां हैं। कई बार यूजर्स बिना सोचे-समझे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक कर देते हैं, संदिग्ध वेबसाइट्स से APK फाइल इंस्टॉल कर लेते हैं या फिर किसी साधारण से एप को बेवजह कैमरा, माइक और कॉन्टैक्ट्स की एक्सेस (परमिशन) दे देते हैं।
साइबर अपराधी अब सीधे फोन हैक करने के बजाय यूजर्स को फंसाने के नए तरीके आजमा रहे हैं। व्हाट्सएप, एसएमएस या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लुभावने ऑफर्स वाले फर्जी लिंक्स भेजे जाते हैं। ऐसे में अगर आप पुराने ओएस (OS) पर फोन चला रहे हैं और आंख मूंदकर किसी भी लिंक पर क्लिक कर रहे हैं, तो दुनिया का कोई भी एंटीवायरस आपके डिवाइस को सुरक्षित नहीं रख सकता। सतर्कता ही आपके स्मार्टफोन का सबसे बेहतरीन एंटीवायरस है।