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एआई बना 'सुसाइड कोच': सेल्सफोर्स सीईओ मार्क बेनियोफ ने दी बड़ी चेतावनी, कहा- अब लगाम कसना जरूरी
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Wed, 21 Jan 2026 06:35 PM IST
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सार
World Economic Forum 2026: दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF 2026) के दौरान सेल्सफोर्स सीईओ मार्क बेनियोफ ने एआई के खतरों पर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने एआई को 'सुसाइड कोच' बताते हुए कहा कि बिना नियमों के यह तकनीक जानलेवा बन रही है। बेनियोफ ने कंपनियों की जवाबदेही तय करने हेतु सख्त कानून बनाने की मांग की है।
सेल्सफोर्स सीईओ ने एआई पर दिया बड़ा बयान
- फोटो : Salesforce
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विस्तार
स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF 2026) में सेल्सफोर्स (Salesforce) के सीईओ मार्क बेनियोफ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर एक सनसनीखेज बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस साल तकनीक का एक बहुत ही खौफनाक चेहरा सामने आया है, जहां एआई मॉडल्स 'सुसाइड कोच' यानी आत्महत्या के लिए उकसाने वाले शख्स की भूमिका निभा रहे हैं। बेनियोफ ने आगाह किया कि एआई से जुड़ी आत्महत्या की कई घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो यह साबित करती हैं कि इस तकनीक पर तत्काल लगाम लगाना कितना जरूरी हो गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब एआई के लिए सख्त रेगुलेशन यानी नियमों का होना अनिवार्य है।
सोशल मीडिया और सिगरेट से तुलना
बेनियोफ का यह कड़ा रुख उनकी पुरानी चेतावनियों की याद दिलाता है। साल 2018 में भी दावोस के इसी मंच से उन्होंने सोशल मीडिया की तुलना सिगरेट से की थी। तब उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया किसी नशे की तरह है जो समाज के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। अब एआई के संदर्भ में उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि जिस तरह बिना नियमों के सोशल मीडिया ने दुनिया भर में नुकसान पहुंचाया, वही कहानी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ दोहराई जा रही है। उनका मानना है कि तकनीक कंपनियों को केवल इनोवेशन के नाम पर खुली छूट नहीं दी जा सकती।
यह भी पढ़ें: आईएमएफ की रैंकिंग पर भड़के अश्विनी वैष्णव, बोले– भारत टॉप AI देशों में शामिल, गिनाईं 5 बड़ी वजहें
जवाबदेही से भागती टेक कंपनियां और कानून की ढाल
चर्चा के दौरान बेनियोफ ने अमेरिकी कानून की 'धारा 230' पर कड़ा प्रहार किया। यह कानून तकनीकी कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट के लिए कानूनी जिम्मेदारी से सुरक्षा देता है। बेनियोफ ने तंज कसते हुए कहा कि टेक कंपनियां नियमों से नफरत करती हैं, लेकिन उन्हें 'धारा 230' बहुत पसंद है क्योंकि यह उन्हें जवाबदेही से बचाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई एआई मॉडल किसी बच्चे को खुदकुशी के लिए उकसाता है, तो कंपनी को इसके लिए जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जाना चाहिए? उन्होंने इस कानून में बड़े बदलाव की मांग की ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।
यह भी पढ़ें: एलन मस्क ने कहा चैटजीपीटी से दूर रहें, तो भड़के ऑल्टमैन; Grok और Autopilot पर उठाए सवाल
अमेरिका में नियमों को लेकर सियासी खींचतान
एआई पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका में फिलहाल दो तरह की विचारधाराएं टकरा रही हैं। एक तरफ कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों ने बच्चों की सुरक्षा और एआई पारदर्शिता को लेकर कड़े कानून बनाए हैं। दूसरी तरफ, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप' करार दिया है। दिसंबर में जारी एक कार्यकारी आदेश के जरिए ट्रंप ने इन नियमों को रोकने की कोशिश की, ताकि अमेरिकी कंपनियां बिना किसी रुकावट के काम कर सकें। हालांकि, बेनियोफ का तर्क है कि बिना सुरक्षा घेरे के यह आजादी कई परिवारों की तबाही का कारण बन रही है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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सोशल मीडिया और सिगरेट से तुलना
बेनियोफ का यह कड़ा रुख उनकी पुरानी चेतावनियों की याद दिलाता है। साल 2018 में भी दावोस के इसी मंच से उन्होंने सोशल मीडिया की तुलना सिगरेट से की थी। तब उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया किसी नशे की तरह है जो समाज के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। अब एआई के संदर्भ में उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि जिस तरह बिना नियमों के सोशल मीडिया ने दुनिया भर में नुकसान पहुंचाया, वही कहानी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ दोहराई जा रही है। उनका मानना है कि तकनीक कंपनियों को केवल इनोवेशन के नाम पर खुली छूट नहीं दी जा सकती।
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जवाबदेही से भागती टेक कंपनियां और कानून की ढाल
चर्चा के दौरान बेनियोफ ने अमेरिकी कानून की 'धारा 230' पर कड़ा प्रहार किया। यह कानून तकनीकी कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट के लिए कानूनी जिम्मेदारी से सुरक्षा देता है। बेनियोफ ने तंज कसते हुए कहा कि टेक कंपनियां नियमों से नफरत करती हैं, लेकिन उन्हें 'धारा 230' बहुत पसंद है क्योंकि यह उन्हें जवाबदेही से बचाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई एआई मॉडल किसी बच्चे को खुदकुशी के लिए उकसाता है, तो कंपनी को इसके लिए जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जाना चाहिए? उन्होंने इस कानून में बड़े बदलाव की मांग की ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।
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अमेरिका में नियमों को लेकर सियासी खींचतान
एआई पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका में फिलहाल दो तरह की विचारधाराएं टकरा रही हैं। एक तरफ कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों ने बच्चों की सुरक्षा और एआई पारदर्शिता को लेकर कड़े कानून बनाए हैं। दूसरी तरफ, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप' करार दिया है। दिसंबर में जारी एक कार्यकारी आदेश के जरिए ट्रंप ने इन नियमों को रोकने की कोशिश की, ताकि अमेरिकी कंपनियां बिना किसी रुकावट के काम कर सकें। हालांकि, बेनियोफ का तर्क है कि बिना सुरक्षा घेरे के यह आजादी कई परिवारों की तबाही का कारण बन रही है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।