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YouTube: एआई के 'कचरे' से निपटेगा यूट्यूब, CEO ने बनाया मास्टर प्लान, 2026 में बदल जाएगा वीडियो देखने का अंदाज
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 22 Jan 2026 02:27 PM IST
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सार
YouTube Strategy 2026: यूट्यूब के सीईओ नील मोहन ने 2026 के लिए एआई रोडमैप पेश किया है। इसमें क्रिएटिविटी बढ़ाने, डीपफेक से निपटने और 'एआई स्लॉप' यानी घटिया कंटेंट को रोकने पर जोर दिया गया है। कंपनी का लक्ष्य एआई को इंसानी कला के विकल्प के बजाय एक शक्तिशाली मददगार औजार के रूप में पेश करना है।
यूट्यूब
- फोटो : AI
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विस्तार
यूट्यूब ने फेक कंटेंट और एआई 'स्लॉप' से प्लेटफॉर्म को बचाने के लिए कमर कस ली है। कंपनी के सीईओ नील मोहन ने साल 2026 के लिए यूट्यूब की रणनीति का खुलासा किया है, साथा ही एआई से नौकरियों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में भी खुलकर बात की है। उनके मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोई नई चीज नहीं है, बल्कि यह वर्षों से वीडियो रिकमेंडेशन, कंटेंट मॉडरेशन और प्लेटफॉर्म को स्केल करने में मदद करता रहा है। अब कंपनी इसे खुलकर क्रिएशन का हिस्सा बना रही है। सीईओ नील मोहन ने AI की तुलना सिंथेसाइज़र, फोटोशॉप और CGI जैसी पुरानी तकनीकों से करते हुए कहा कि AI का मकसद क्रिएटर्स की जगह लेना नहीं, बल्कि उनकी क्रिएटिव आजादी को बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि दिसंबर में हर दिन 10 लाख से ज्यादा चैनल यूट्यूब के एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे थे।
डीपफेक और फर्जीवाड़े पर सख्त पहरा
जैसे-जैसे एआई बेहतर हो रहा है, असली और नकली के बीच का फर्क मिटता जा रहा है। यूट्यूब ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है। अब एआई से बने हर वीडियो पर 'लेबल' लगाना अनिवार्य होगा। अगर कोई एआई का गलत इस्तेमाल कर डीपफेक बनाता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे तुरंत हटाया जाएगा। क्रिएटर्स को अपनी आवाज और चेहरे पर पूरा कंट्रोल देने के लिए कंपनी 'कंटेंट आईडी' सिस्टम को भी अपडेट कर रही है।
एआई स्लॉप और घटिया कंटेंट पर होगी लगाम
एक बड़ी समस्या 'एआई स्लॉप' की है, यानी मशीन से बड़े पैमाने पर बनाया गया वह बेकार कंटेंट जो दर्शकों का समय बर्बाद करता है। यूट्यूब का कहना है कि वे रचनात्मक आजादी तो देंगे, लेकिन क्वालिटी के साथ समझौता नहीं करेंगे। कंपनी अपने सिस्टम को इतना स्मार्ट बना रही है कि वह स्पैम और क्लिकबेट वाले बेकार एआई वीडियो की पहचान कर उन्हें स्क्रीन से दूर रख सकें।
दर्शकों के लिए आसान हुई समझ और भाषा
मोहन ने बताया कि वीडियो देखने वालों के लिए भी एआई बड़े काम का साबित हो रहा है। दिसंबर में 2 करोड़ से ज्यादा यूजर्स ने यूट्यूब के Ask टूल का इस्तेमाल कर वीडियो से जुड़ी जानकारी ली। वहीं, ऑटो-डबिंग फीचर से 60 लाख से ज्यादा लोग रोजाना कम से कम 10 मिनट का कंटेंट देख रहे हैं, जिससे अलग-अलग भाषाओं में पहुंच बढ़ रही है।
नील मोहन का मानना है कि अगले 5-10 साल में सबसे बड़ा क्रिएटर शायद कोई ऐसा होगा, जिसे आज कोई नहीं जानता। यूट्यूब के लिए AI उस भविष्यवाणी से ज्यादा जरूरी है कि वह ऐसा मंच तैयार करे, जहां आने वाले नए क्रिएटर्स अपनी पहचान बना सकें।
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डीपफेक और फर्जीवाड़े पर सख्त पहरा
जैसे-जैसे एआई बेहतर हो रहा है, असली और नकली के बीच का फर्क मिटता जा रहा है। यूट्यूब ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है। अब एआई से बने हर वीडियो पर 'लेबल' लगाना अनिवार्य होगा। अगर कोई एआई का गलत इस्तेमाल कर डीपफेक बनाता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे तुरंत हटाया जाएगा। क्रिएटर्स को अपनी आवाज और चेहरे पर पूरा कंट्रोल देने के लिए कंपनी 'कंटेंट आईडी' सिस्टम को भी अपडेट कर रही है।
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एआई स्लॉप और घटिया कंटेंट पर होगी लगाम
एक बड़ी समस्या 'एआई स्लॉप' की है, यानी मशीन से बड़े पैमाने पर बनाया गया वह बेकार कंटेंट जो दर्शकों का समय बर्बाद करता है। यूट्यूब का कहना है कि वे रचनात्मक आजादी तो देंगे, लेकिन क्वालिटी के साथ समझौता नहीं करेंगे। कंपनी अपने सिस्टम को इतना स्मार्ट बना रही है कि वह स्पैम और क्लिकबेट वाले बेकार एआई वीडियो की पहचान कर उन्हें स्क्रीन से दूर रख सकें।
दर्शकों के लिए आसान हुई समझ और भाषा
मोहन ने बताया कि वीडियो देखने वालों के लिए भी एआई बड़े काम का साबित हो रहा है। दिसंबर में 2 करोड़ से ज्यादा यूजर्स ने यूट्यूब के Ask टूल का इस्तेमाल कर वीडियो से जुड़ी जानकारी ली। वहीं, ऑटो-डबिंग फीचर से 60 लाख से ज्यादा लोग रोजाना कम से कम 10 मिनट का कंटेंट देख रहे हैं, जिससे अलग-अलग भाषाओं में पहुंच बढ़ रही है।
नील मोहन का मानना है कि अगले 5-10 साल में सबसे बड़ा क्रिएटर शायद कोई ऐसा होगा, जिसे आज कोई नहीं जानता। यूट्यूब के लिए AI उस भविष्यवाणी से ज्यादा जरूरी है कि वह ऐसा मंच तैयार करे, जहां आने वाले नए क्रिएटर्स अपनी पहचान बना सकें।