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Meta: मेटा ने ऑस्ट्रेलिया में हटाए 5.5 लाख अंडर-16 सोशल मीडिया अकाउंट्स, लेकिन सरकार को दी बड़ी चेतावनी
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Sun, 18 Jan 2026 04:42 PM IST
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सार
Australia Social Media Ban: ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लग गया है। इसके जवाब में मेटा ने महज एक हफ्ते में करीब साढ़े पांच लाख अकाउंट हटा दिए। हालांकि, कंपनी का कहना है कि सिर्फ पाबंदी लगाने से समस्या हल नहीं होगी।
सोशल मीडिया (सांकेतिक)
- फोटो : AI जनरेटेड
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विस्तार
ऑस्ट्रेलिया के नए सोशल मीडिया पर सख्त कानून का पालन करते हुए मेटा (Meta) ने एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने खुलासा किया है कि 4 दिसंबर से 11 दिसंबर के बीच उसने इंस्टाग्राम, फेसबुक और थ्रेड्स से कुल 5.5 लाख अकाउंट्स को हटा दिया है। मेटा का मानना है कि ये सभी अकाउंट्स 16 साल से कम उम्र के बच्चों के थे। हालांकि, इतने बड़े स्तर पर कार्रवाई करने के बावजूद मेटा ने सरकार को चेतावनी दी है कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 'ब्लैंकेट बैन' लगाना बच्चों को सुरक्षित रखने में नाकाम साबित होगा।
बच्चे अपनाएंगे दूसरा रास्ता
मेटा ने ऑस्ट्रेलियाई सांसदों को चेताया है कि सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने से बच्चे इंटरनेट छोड़ने के बजाय दूसरे रास्तों का इस्तेमाल करने लगेंगे। कंपनी के अनुसार, बच्चे अब उन एप्स की ओर रुख कर रहे हैं जो इस कानून के दायरे में नहीं हैं। मेटा ने बताया कि स्नैपचैट के विकल्प के तौर पर बच्चे योप, लेमन-8 और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा, कई बच्चे वीपीएन (VPN) या अपने माता-पिता के अकाउंट का इस्तेमाल कर इस पाबंदी का उल्लंघन कर रहे हैं। मेटा ने इसे चूहे-बिल्ली की खेल की स्थिति बताया है, जहां एक जगह से हटने के बाद बच्चे दूसरी जगह पहुंच जाते हैं।
मेटा ने दिया उम्र की जांच का सुझाव
मेटा का तर्क है कि हर एप पर अलग-अलग पाबंदी लगाने के बजाय, बच्चों की उम्र की जांच वहां होनी चाहिए जहां से वे एप्स डाउनलोड करते हैं, यानी एप स्टोर (App Store) पर। कंपनी ने बताया कि उसने 'ओपनएज इनिशिएटिव' के साथ मिलकर 'एज कीज' (Age Keys) टूल विकसित किए हैं। इसके जरिए सरकारी आईडी, वित्तीय जानकारी या चेहरे के अनुमान से उम्र की सटीक जांच की जा सकती है, जिससे प्राइवेसी भी सुरक्षित रहती है।
सरकार और अन्य कंपनियों का क्या है कहना?
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीस का मानना है कि यह कानून बच्चों के बचपन को सोशल मीडिया की पकड़ से छुड़ाने और माता-पिता को शक्ति देने के लिए जरूरी है। उनका कहना है कि इससे बच्चे फिर से बच्चे बन सकेंगे। ऑस्ट्रेलिया के ई-सेफ्टी कमिश्नर ने भी इस कदम का समर्थन किया है।
दूसरी ओर, सभी कंपनियां मेटा की तरह चुपचाप नियमों को नहीं मान रही हैं। चर्चित प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) ने इस बैन के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है। रेडिट का तर्क है कि यह बैन न केवल अप्रभावी है, बल्कि युवाओं के राजनीतिक संवाद के अधिकार को भी रोकता है।
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बच्चे अपनाएंगे दूसरा रास्ता
मेटा ने ऑस्ट्रेलियाई सांसदों को चेताया है कि सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने से बच्चे इंटरनेट छोड़ने के बजाय दूसरे रास्तों का इस्तेमाल करने लगेंगे। कंपनी के अनुसार, बच्चे अब उन एप्स की ओर रुख कर रहे हैं जो इस कानून के दायरे में नहीं हैं। मेटा ने बताया कि स्नैपचैट के विकल्प के तौर पर बच्चे योप, लेमन-8 और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा, कई बच्चे वीपीएन (VPN) या अपने माता-पिता के अकाउंट का इस्तेमाल कर इस पाबंदी का उल्लंघन कर रहे हैं। मेटा ने इसे चूहे-बिल्ली की खेल की स्थिति बताया है, जहां एक जगह से हटने के बाद बच्चे दूसरी जगह पहुंच जाते हैं।
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मेटा ने दिया उम्र की जांच का सुझाव
मेटा का तर्क है कि हर एप पर अलग-अलग पाबंदी लगाने के बजाय, बच्चों की उम्र की जांच वहां होनी चाहिए जहां से वे एप्स डाउनलोड करते हैं, यानी एप स्टोर (App Store) पर। कंपनी ने बताया कि उसने 'ओपनएज इनिशिएटिव' के साथ मिलकर 'एज कीज' (Age Keys) टूल विकसित किए हैं। इसके जरिए सरकारी आईडी, वित्तीय जानकारी या चेहरे के अनुमान से उम्र की सटीक जांच की जा सकती है, जिससे प्राइवेसी भी सुरक्षित रहती है।
सरकार और अन्य कंपनियों का क्या है कहना?
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीस का मानना है कि यह कानून बच्चों के बचपन को सोशल मीडिया की पकड़ से छुड़ाने और माता-पिता को शक्ति देने के लिए जरूरी है। उनका कहना है कि इससे बच्चे फिर से बच्चे बन सकेंगे। ऑस्ट्रेलिया के ई-सेफ्टी कमिश्नर ने भी इस कदम का समर्थन किया है।
दूसरी ओर, सभी कंपनियां मेटा की तरह चुपचाप नियमों को नहीं मान रही हैं। चर्चित प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) ने इस बैन के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है। रेडिट का तर्क है कि यह बैन न केवल अप्रभावी है, बल्कि युवाओं के राजनीतिक संवाद के अधिकार को भी रोकता है।