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KYC for Social Media: अब सोशल मीडिया चलाने के लिए भी देना होगा ID प्रूफ? जानिए क्या है सरकार का नया प्रस्ताव

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Tue, 24 Mar 2026 02:04 PM IST
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सार

KYC Verification Social Media: इंटरनेट पर बढ़ते साइबर फ्रॉड और फेक प्रोफाइल्स को रोकने के लिए एक संसदीय समिति ने सोशल मीडिया के लिए KYC वेरिफिकेशन और बच्चों के लिए सख्त उम्र की जांच का सुझाव दिया है। इस लेख में जानेंगे कि है कि क्या फेसबुक या इंस्टाग्राम चलाने के लिए अपना आधार कार्ड या वोटर आईडी देना होगा? साथ ही, समझने की कोशिश करेंगे कि सुरक्षा के इन कड़े नियमों से आपकी प्राइवेसी पर क्या असर पड़ सकता है। डिजिटल सुरक्षा और यूजर प्राइवेसी के बीच के इस बड़े बदलाव की विस्तार से जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।

KYC for Social Media? Panel Proposes Mandatory Verification to Curb Cybercrime
सोशल मीडिया (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI
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विस्तार

आज के समय में करोड़ों लोग हर दिन सोशल मीडिया, गेमिंग और डेटिंग एप्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इंटरनेट के इस बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड, स्कैम और साइबर क्राइम का खतरा भी तेजी से बढ़ गया है। इस समस्या से निपटने और खासकर महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, एक संसदीय समिति ने सरकार को कुछ नए और कड़े कदम उठाने का सुझाव दिया है।

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सोशल मीडिया पर अब अनिवार्य हो सकता है KYC वेरिफिकेशन

संसदीय समिति ने अपनी हालिया रिपोर्ट में एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। इसके तहत अब सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स का KYC (नो योर कस्टमर्स) वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जा सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि भविष्य में फेसबुक, इंस्टाग्राम या एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल जारी रखने के लिए आपको आधार कार्ड या वोटर आईडी जैसे अपने आधिकारिक सरकारी पहचान पत्र जमा करने पड़ सकते हैं।

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इस कदम के पीछे का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट को सुरक्षित बनाना है। वेरिफिकेशन की इस प्रक्रिया से न केवल फेक प्रोफाइल्स की पहचान करना आसान होगा, बल्कि अपनी पहचान छिपाकर किए जाने वाले ऑनलाइन फ्रॉड और अन्य आपराधिक गतिविधियों को भी काफी हद तक रोका जा सकेगा।

साइबर क्राइम और फेक अकाउंट्स पर लगेगी लगाम

आजकल फर्जी पहचान बनाकर लोगों को परेशान करना, ब्लैकमेल करना या ठगना बहुत आम हो गया है। ट्रोलिंग, किसी और के नाम पर अकाउंट बनाना और साइबर स्टॉकिंग जैसे ज्यादातर अपराध बेनामी अकाउंट्स से ही किए जाते हैं। KYC वेरिफिकेशन लागू होने से सभी अकाउंट्स असली पहचान से जुड़ जाएंगे। इससे लोग इंटरनेट पर ज्यादा जिम्मेदारी से बर्ताव करेंगे और डिजिटल फ्रॉड को ट्रैक करना आसान हो जाएगा।

बच्चों की सुरक्षा के लिए 'एज-वेरिफिकेशन' पर जोर

इस नए प्रस्ताव में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार को एक सख्त एज-वेरिफिकेशन बनाने का सुझाव दिया गया है। समिति का मानना है कि इस तरह के कड़े नियमों से बच्चों को इंटरनेट पर मौजूद आपत्तिजनक और नुकसानदायक कंटेंट से प्रभावी ढंग से दूर रखा जा सकेगा।

यही नहीं, सुरक्षा के घेरे को और मजबूत करने के लिए समिति ने यह भी प्रस्तावित किया है कि जिन अकाउंट्स को लेकर बार-बार शिकायतें या रिपोर्ट मिलती हैं, उनकी कड़ी निगरानी की जानी चाहिए। ऐसे संदिग्ध अकाउंट्स से समय-समय पर दोबारा वेरिफिकेशन मांगा जा सकता है, ताकि किसी भी तरह की लापरवाही या गलत इस्तेमाल की गुंजाइश न रहे।

KYC नियमों के साथ जुड़ी प्राइवेसी की चिंताएं

हालांकि सुरक्षा के नजरिए से ये कदम काफी प्रभावशाली लग सकते हैं, लेकिन इनके साथ प्राइवेसी से जुड़े कई गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ी चिंता डेटा लीक और उसके गलत इस्तेमाल को लेकर है। क्योंकि सोशल मीडिया कंपनियों के पास यूजर्स की निजी जानकारी और सरकारी आईडी का एक्सेस होने से डेटा की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी संवेदनशील जानकारी साझा करने से यूजर्स डेटा ब्रीच जैसी समस्याओं के प्रति और भी अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।

इसके अलावा, एक व्यावहारिक चुनौती ये भी है कि यह व्यवस्था सोशल मीडिया को सबकी पहुंच से दूर कर सकती है। भारत में आज भी कई ऐसे लोग हैं जिनके पास आधिकारिक सरकारी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में अनिवार्य केवाईसी (KYC) नियम उन लोगों के लिए इंटरनेट और एप्स के इस्तेमाल के रास्ते बंद कर सकता है, जो डिजिटल दुनिया का हिस्सा तो हैं लेकिन जिनके पास कागजी पहचान की कमी है।

आगे क्या होगा?

आपको बता दें कि फिलहाल ये सिर्फ सुझाव हैं और अभी तक कोई अंतिम नियम नहीं बना है। लेकिन अगर सरकार इन सुझावों पर आगे बढ़ती है, तो आने वाले समय में हमारे एप्स इस्तेमाल करने के तरीके में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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