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मेटा-यूट्यूब की बढ़ी मुश्किलें: सोशल मीडिया लत पर जूरी के फैसले को कोर्ट में चुनौती, जानें आखिर क्या अपील की

Sat, 11 Jul 2026 09:34 AM IST
जागृति टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Sat, 11 Jul 2026 09:34 AM IST
सार

Meta: मेटा लगातार कानूनी घेरे में फंसता आ रहा है। अब सोशल मीडिया की लत और युवाओं की मानसिक सेहत से जुड़े एक मामले में कंपनी ने उस कोर्ट फैसले के खिलाफ अपील दायर की है, जिसमें उसके प्लेटफॉर्म के डिजाइन को युवाओं में लत बढ़ाने के लिए जिम्मेदार माना गया था। आखिर पूरा मामला क्या है और यह केस इतना महत्वपूर्ण क्यों है? आइए जानते हैं।
 

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Meta Appeals Verdict Social Media Addiction Case Landmark Lawsuit Raises
केली केस में फैसले के खिलाफ कोर्ट पहुंची कंपनी - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

Instagram-YouTube Addiction Lawsuit: मेटा ने लॉस एंजिल्स काउंटी सुपीरियर कोर्ट में जूरी के उस फैसले के खिलाफ अब अपील दायर की है, जिसमें कहा गया था कि इंस्टाग्राम और फेसबुक के डिजाइन ने युवाओं में सोशल मीडिया की लत बढ़ाने में भूमिका निभाई है और कंपनी ने उनकी कोई परवाह नहीं की। कंपनी की ओर से अपील का नोटिस दाखिल कर दिया गया है। अब मेटा अपने कानूनी तर्क आगे की सुनवाई में पेश करने की तैयारी में है।
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पूरा मामला क्या है?
दरअसल यह मामला एक 20 वर्षीय युवती से जुड़ा है। जिसकी पहचान अदालत में केजीएम और पहले केली के नाम से की गई। युवती ने मेटा पर आरोप लगाया कि बचपन में उसे सोशल मीडिया की लत लग गई थी, जिससे उसे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या हो गई। जूरी ने मेटा और यूट्यूब की लापरवाही को इसका मुख्या कारण माना।
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कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
  • मेटा और यूट्यूब की लापरवाही को इस नुकसान का कारण मानते हुए कोर्ट ने केली को तीन मिलियन डॉलर का हर्जाना और अतिरिक्त 3 मिलियन डॉलर का दंडात्मक हर्जाना देने का आदेश दिया था। इसके बाद इस पर कंपनी ने एतराज जताते हुए दलीद पेश की थी, जिसे जज कैरोलिन बी कुहल ने जून की शुरुआत में खारिज कर दिया था, जिसके बाद अब कंपनियों ने फिस से औपचारिक अपील दायर की है।
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  • हालांकि यह फैसला अंतिम नहीं है, क्योंकि Meta और YouTube दोनों ने इसके खिलाफ अपील करने का फैसला किया है।

मेटा और गूगल का क्या कहना है?
  • मेटा के प्रवक्ता ने अपने पुराने स्टैंड को दोहराते हुए कहा कि किशोरों का मानसिक स्वास्थ्य बेहद जटिल है और इसे किसी एक अकेले एप से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
  • वहीं, यूट्यूब के प्रवक्ता जोस कास्टानेडा ने भी पुष्टि की कि वे अपील करने की योजना बना रहे हैं और यह इस कानूनी प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा है।

डिजाइन फीचर्स क्यों बने विवाद की वजह?
इस विवाद का मुद्दा और कुछ नहीं बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद कुछ डिजाइंस को ही माना जा रहा है। जिसमें लगातार स्क्रॉलिंग, ऑटोप्ले वीडियो और अभी खत्म न हाेने वाला कंटेंट फीड है। दलील में भी यही कहा गया है कि ये फीचर्स यूजर्स को प्लेटफॉर्म पर अधिक समय तक इंगेज रखने के लिए डिजाइन किए गए हैं, जिससे लत जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

सेक्शन 230 के बावजूद कैसे आगे बढ़ा मामला?
अमेरिका के कम्युनिकेशन्स डिसेंसी एक्ट की सेक्शन 230 टेक कंपनियों को यूजर्स की ओर से पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कानूनी सुरक्षा देती है, लेकिन इस केस में कंटेंट की बजाय प्लेटफॉर्म के डिजाइन और यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने वाले फीचर्स को चुनौती दी गई है। इसी वजह से मामला अदालत में आगे बढ़ सका।


आगे क्या असर हो सकता है?
  • एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मामला हजारों ऐसे मुकदमों को प्रभावित कर सकता है, जिनमें सोशल मीडिया कंपनियों पर जानबूझकर नुकसान पहुंचाने वाले डिजाइन अपनाने का आरोप लगाया गया है।
  • इसी दौरान न्यू मैक्सिको में भी मेटा को बच्चों की मानसिक सेहत और सुरक्षा से जुड़े एक अन्य मामले में 375 मिलियन डॉलर के जुर्माने का सामना करना पड़ा है। मेटा ने उस फैसले के खिलाफ भी अपील करने की बात कही है।

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