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अब AI नहीं चुरा सकेगा आपका फेस: केट ब्लैंचेट ने लॉन्च किया सेफ्टी टूल, जानें डीपफेक के दौर में क्यों है जरूरी

Fri, 10 Jul 2026 03:51 PM IST
जागृति टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Fri, 10 Jul 2026 03:51 PM IST
सार

Human Consent Registry: एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक और वॉइस क्लोनिंग के मामले भी बढ़ रहे हैं। जिसे देखते हुए ऑस्कर विजेता अभिनेत्री केट ब्लैंचेट ने डिजिटल पहचान की सुरक्षा के लिए एक नया और फ्री प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। आइए जानते हैं यह प्लेटफॉर्म क्या है? कैसे काम करेगा और इससे यूजर को क्या फायदा होगा और क्या भारत में ऐसी व्यवस्था की जरूरत थी?
 

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Kate Blanchett Launches Human Consent Registry Protect Faces
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

Cate Blanchett AI tool: ऑस्कर विजेता एक्ट्रेस केट ब्लैंचेट ने ब्रुसेल्स में ह्यूमन कंसेंट रजिस्ट्री नाम का एक फ्री प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जो सिर्फ 10 मिनट में लोगों को यह तय करने का अधिकार देता है कि एआई उनके चेहरे, आवाज या नाम का इस्तेमाल करे या नहीं। एआई के बढ़ते गलत इस्तेमाल के बीच लोगों को अपनी डिजिटल पहचान पर अधिक नियंत्रण पाने के उद्देश्य से इस प्लेटफॉर्म को बनाया गया है?
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Human Consent Registry कैसे काम करता है ?
  • इस प्लेटफॉर्म पर यूजर अपना नाम, फोटो और आवाज रजिस्टर कर सकते हैं। इसके बाद वे अपनी पसंद के अनुसार अनुमति तय कर सकते हैं कि एआई उनकी पहचान का स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल कर सकता है या नहीं।
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  • यहां पर केवल कुछ तय शर्तों के साथ इस्तेमाल संभव है अगर वह शर्तें नहीं मानता, तो बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। खास बात यह है कि इसके लिए उन्हें घंटो इंतजार नहीं करना पड़ता, यह प्रक्रिया करीब दस मिनट में पूरी हो जाती है।
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कहां हुई है लॉन्चिंग?
ह्यूमन कंसेंट रजिस्ट्री को ब्रुसेल्स में यूरोपियन पार्लियामेंट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लॉन्च किया गया। खास बात यह है कि इस पहल को टॉम हैंक्स, मेरिल स्ट्रीप, वियोला डेविस, जेवियर बार्डेम और हेलेन मिरेन जैसे कई हॉलीवुड कलाकारों का समर्थन भी मिला है।

इसकी प्लेटफॉर्म की जरूरत क्यों पड़ी?
  • आजकल एआई हर क्षेत्र में काफी प्रगति कर रहा है। इसकी के साथ अब किसी की वॉइस क्लोनिंग और डीपफेक वीडियो को तैयार करना काफी आसान हो गया है। यही कारण है कि क्रिएटर्स या फिर जिनके पब्लिक अकाउंट्स हैं, वह अपनी डिजिटल पहचान को लेकर काफी सतर्क हो रहे हैं।
  • इस दौरान अभिनेता  मैथ्यू मैककोनाघी ने अपनी आवाज और कैचफ्रेज ने Alright, Alright, Alright का ट्रेडमार्क भी कराया है। वहीं गायिका SZA ने आरोप लगाया कि उनकी अनुमति के बिना 200 से अधिक गानों का इस्तेमाल AI मॉडल को ट्रेन करने में किया गया।

क्या भारत के लिए यह पहल अहम है या यहां ऐसी व्यवस्था की जरूरत है?
  • भारत में इस खतरे से अछूता नहीं है, यहां भी डीपफेक, फर्जी वीडियो और एआई आधारित वॉइस क्लोनिंग के मामले आते रहते हैं। यहां तो बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज और नेता भी डीपफेक का शिकार हो चुके हैं।
  • ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत में भी ह्यूमन कॉन्सेंट रजिस्ट्री जैसी  व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि AI कंपनियों की बजाय लोग स्वयं तय कर सकें कि उनकी डिजिटल पहचान का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।
  • हालांकि फिलहाल भारत में ऐसी कोई आधिकारिक सहमति-आधारित रजिस्ट्री लागू नहीं है, लेकिन AI के बढ़ते प्रभाव के बीच यह पहल डिजिटल अधिकारों और गोपनीयता को लेकर नई बहस जरूर छेड़ रही है।
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