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India Fintech Technology: क्या देश बन रहा है नया ग्लोबल फिनटेक हब? Payoneer ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर कही बड़ी बात
Sat, 11 Jul 2026 02:22 PM IST
जागृति
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति
Updated Sat, 11 Jul 2026 02:22 PM IST
सार
Payoneer India: अब भारत की पहचान सिर्फ डिजिटल पेमेंट्स के बड़े बाजार तक ही सीमित नहीं रह गई है। ग्लोबल फिनटेक दिग्गज पेयोनियर के अनुसार, भारतीय प्रोडक्ट इंजीनियरिंग और एआई तकनीक अब दुनिया भर के वित्तीय ढांचे को बदलने का प्रयास कर रही हैं। आइए जानते हैं कि पेयोनियर ने बड़ा दावा क्यों किया है?
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
Global fintech infrastructure: पेयोनियर के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और भारत साइट लीडर गौरव गुप्ता के अनुसार भारत अब केवल फिनटेक सेवाओं का उपयोग करने वाला बजारा नहीं रहा। यहां ऐसे प्लेटफॉर्म डिजाइन तैयार और बेहतर किए जा रहे हैं, जो दुनिया के अलग-अलग देशों, करेंसी और रेगुलेटरी सिस्टम के लिए काम करते हैं।
उनके अनुसार भारत के इंजीनियरों के पास जटिल डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर काम करने का अनुभव है। यही वजह है कि देश अगली पीढ़ी के फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।
किस तकनीक पर काम कर रही हैं भारतीय टीम?
भारतीय इंजीनियर आज तेज क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स, एआई आधारित फ्रॉड डिटेक्शन, ऑटोमेटेड रीकॉन्सिलिएशन, एंबेडेड पेमेंट्स, रीयल-टाइम कंप्लायंस, क्लाउड आर्किटेक्चर और रिस्क मैनेजमेंट जैसी आधुनिक तकनीकों पर काम कर रहे हैं। ये सभी तकनीकें वैश्विक वित्तीय लेनदेन को तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
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भारत क्यों बन रहा है ग्लोबल फिनटेक हब?
गुरुग्राम में बनेगा नया टेक हब
इसी दाैरान पेयोनियर ने भारत में अपनी इंजीनियरिंग क्षमता बढ़ाने के लिए गुरुग्राम में नया टेक्नोलॉजी हब स्थापित करने की घोषणा की है। इससे स्थानीय इंजीनियरों को वैश्विक स्तर के फिनटेक प्लेटफॉर्म विकसित करने का अवसर मिलेगा और भारत की भूमिका और मजबूत होगी।
ग्लोबल फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर पर क्या बोले पेयोनियर ?
गौरव गुप्ता ने कहा कि वैश्विक फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर भरोसेमंद, सुरक्षित, ऑडिटेबल और उपयोग में आसान होना चाहिए। उनका मानना है कि देश की टीमें एआई, प्लेटफॉर्म इनोवेशन और मल्टी-मार्केट प्रोडक्ट इंजीनियरिंग में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं, जिससे भविष्य का वैश्विक वित्तीय ढांचा तैयार हो रहा है।
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उनके अनुसार भारत के इंजीनियरों के पास जटिल डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर काम करने का अनुभव है। यही वजह है कि देश अगली पीढ़ी के फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।
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किस तकनीक पर काम कर रही हैं भारतीय टीम?
भारतीय इंजीनियर आज तेज क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स, एआई आधारित फ्रॉड डिटेक्शन, ऑटोमेटेड रीकॉन्सिलिएशन, एंबेडेड पेमेंट्स, रीयल-टाइम कंप्लायंस, क्लाउड आर्किटेक्चर और रिस्क मैनेजमेंट जैसी आधुनिक तकनीकों पर काम कर रहे हैं। ये सभी तकनीकें वैश्विक वित्तीय लेनदेन को तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
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भारत क्यों बन रहा है ग्लोबल फिनटेक हब?
- भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा फिनटेक इकोसिस्टम है। वर्तमान में इसका आकार करीब 111 बिलियन डॉलर है, जो 2029 तक 421 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
- वहीं, दूसरी ओर वैश्विक क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट फ्लो 2024 के 194 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 2032 तक 320 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में वैश्विक कंपनियां भारत की तकनीकी क्षमता पर अधिक भरोसा जता रही हैं।
गुरुग्राम में बनेगा नया टेक हब
इसी दाैरान पेयोनियर ने भारत में अपनी इंजीनियरिंग क्षमता बढ़ाने के लिए गुरुग्राम में नया टेक्नोलॉजी हब स्थापित करने की घोषणा की है। इससे स्थानीय इंजीनियरों को वैश्विक स्तर के फिनटेक प्लेटफॉर्म विकसित करने का अवसर मिलेगा और भारत की भूमिका और मजबूत होगी।
ग्लोबल फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर पर क्या बोले पेयोनियर ?
गौरव गुप्ता ने कहा कि वैश्विक फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर भरोसेमंद, सुरक्षित, ऑडिटेबल और उपयोग में आसान होना चाहिए। उनका मानना है कि देश की टीमें एआई, प्लेटफॉर्म इनोवेशन और मल्टी-मार्केट प्रोडक्ट इंजीनियरिंग में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं, जिससे भविष्य का वैश्विक वित्तीय ढांचा तैयार हो रहा है।