AI Impact Summit 2026: एआई को लेकर आईटी राज्य मंत्री की चेतावनी, कहा- गलत इस्तेमाल से लोकतंत्र को खतरा
AI Impact Summit 2026: एआई इंपैक्ट समिट 2026 में आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गलत इस्तेमाल लोकतंत्र और साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने डिजिटल साक्षरता और जिम्मेदारी से एआई के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि एआई शिक्षा और विकास के लिए उपयोगी है लेकिन इसे शॉर्टकट नहीं बनाना चाहिए।
विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव के बीच केंद्र सरकार ने इसके दुरुपयोग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने एआई इंपैक्ट समिट 2026 में एआई का इस्तेमाल सावधानी से करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि एआई के जरिए फैलने वाली गलत जानकारी लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है।
एआई से लोकतंत्र को खतरा
जितिन प्रसाद ने कहा कि एआई से बने डीपफेक और फर्जी खबरें साइबर सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं। उन्होंने बताया कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जहां केंद्र, राज्य और नगर स्तर पर बार-बार चुनाव होते हैं। ऐसी जगहों पर एआई से फैलने वाली गलत जानकारी चुनाव को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लोग गलत जानकारी के आधार पर वोट देते हैं तो इससे लोकतंत्र को नुकसान हो सकता है। उन्होंने ये भी कहा कि सरकार लोगों की सुरक्षा के लिए नीतियां बना रही है लेकिन इसके लिए समाज के हर व्यक्ति को जागरूक और जिम्मेदार बनना होगा।
डिजिटल साक्षरता से ही साइबर खतरों से बचाव संभव
जितिन प्रसाद ने कहा कि आज के समय में डिजिटल जानकारी होना बहुत जरूरी है। अगर लोग डिजिटल तकनीक के बारे में जागरूक नहीं होंगे तो वे साइबर हमलों और एआई से फैलने वाली गलत जानकारी का शिकार हो सकते हैं। इसलिए लोगों को नई तकनीक और उसके सही इस्तेमाल के बारे में सीखना और समझना जरूरी है।
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शिक्षा में एआई उपयोगी है लेकिन इसे शॉर्टकट नहीं बनाना चाहिए
आईटी राज्य मंत्री ने कहा कि एआई शिक्षा के क्षेत्र में बहुत मददगार साबित हो सकता है। यह छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए फायदेमंद है। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि इसका इस्तेमाल पढ़ाई से बचने या शॉर्टकट के रूप में नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई को सिर्फ एक विषय तक सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि इसे पूरी शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाना जरूरी है। इसका मकसद युवाओं की क्षमता बढ़ाना और उन्हें नई तकनीक के लिए तैयार करना है। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को कंप्यूटर आधारित सोच और एआई के सही उपयोग के बारे में सिखाना जरूरी है ताकि वे इसका सही और सकारात्मक तरीके से इस्तेमाल कर सकें।
शिक्षक की जगह नहीं ले सकता एआई
जितिन प्रसाद का कहना है कि एआई कभी भी शिक्षक की जगह नहीं ले सकता। कुछ लोग मानते हैं कि एआई बेहतर ट्यूटर है लेकिन इससे शिक्षक की जरूरत खत्म नहीं होती। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे एआई का उपयोग पढ़ाई में मदद के लिए करें लेकिन इसे होमवर्क से बचने या शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल न करें। उन्होंने कहा कि अगर छात्र एआई का गलत तरीके से उपयोग करेंगे तो इससे भविष्य में उन्हें नुकसान हो सकता है।
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भारत के पास डाटा की बड़ी ताकत
जितिन प्रसाद ने कहा कि सरकार शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और भारतीय कंपनियों को सुरक्षित और गैर-व्यक्तिगत डाटा उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। इससे नए एआई मॉडल और तकनीकी समाधान बनाने में मदद मिलेगी। इससे लोगों की जिंदगी को बेहतर बन सकती है। उन्होंने कहा कि एआई के विकास के लिए डाटा सबसे जरूरी होता है। इस मामले में भारत के पास बड़ी ताकत है क्योंकि यहां बहुत ज्यादा और अलग-अलग तरह का डाटा उपलब्ध है।
सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से एआई का इस्तेमाल करना सभी की जिम्मेदारी
अपने भाषण के अंत में मंत्री ने कहा कि एआई एक शक्तिशाली और उपयोगी तकनीक है लेकिन इसका सही और जिम्मेदारी से उपयोग करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार नियम और नीतियां बनाएगी लेकिन नागरिकों, शिक्षकों और छात्रों सहित सभी लोगों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई का इस्तेमाल समाज और देश के भले के लिए हो।
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