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सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के लिए जरूरी नहीं रहेगा कोडिंग: इंफोसिस के चेयरमैन ने बताया टेक जॉब्स का भविष्य

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Tue, 17 Feb 2026 03:16 PM IST
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सार

Nandan Nilenkani On AI: इंफोसिस के चेयरमैन नंदन निलेकणी ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर उद्योग की बुनियाद बदल देगा। आने वाले समय में टेक प्रोफेशनल्स का मुख्य काम कोड लिखना नहीं, बल्कि AI सिस्टम को प्रभावी ढंग से संचालित करना होगा। यह बदलाव कंपनियों के कामकाज पर गहरा असर डालेगा।

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इंफोसिस - फोटो : PTI
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विस्तार

इंफोसिस के 'इन्वेस्टर डे' पर बोलते हुए नंदन निलेकणी ने बताया कि भविष्य में सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स का मुख्य काम कोड लिखना नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एआई सॉफ्टवेयर बनाने और इस्तेमाल करने के तरीके को पूरी तरह बदल देगा। अब कोडिंग के बजाय असली चुनौती और हुनर एआई को काम पर लगाना होगा। यानी अब पेशेवरों को एआई इंजीनियरिंग और एआई एजेंट्स को संचालित करने जैसी नई स्किल्स सीखनी होंगी।
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पुरानी तकनीकी चुनौतियां बनेंगी बाधा
निलेकणी का मानना है कि कंपनियां सिर्फ पुरानी तकनीक के ऊपर एआई की एक नई परत चढ़ाकर नहीं बच सकतीं। उन्होंने इसे 'जड़ से शाखा तक' वाला बदलाव बताया।
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निलेकणी ने चेतावनी दी कि कंपनियों को अपने पुराने आईटी सिस्टम और तकनीकी कर्ज (टेक्निकल डेट) जैसी समस्याओं से भी निपटना होगा। ये वे चुनौतियां हैं जिन्हें लंबे समय से टाला जाता रहा है, लेकिन AI को प्रभावी ढंग से अपनाने में यही सबसे बड़ी रुकावट बन सकती हैं।

उन्होंने कहा, “तकनीक अपनी तैनाती से काफी आगे निकल चुकी है। मॉडल्स का प्रदर्शन बेहतर हो रहा है, लेकिन उन्हें लागू करना आसान नहीं है। इसके लिए संगठनात्मक बदलाव, कर्मचारियों को दोबारा प्रशिक्षित करना और डेटा को अलग-अलग साइलो से निकालकर एकीकृत करना जरूरी है।”

नई स्किल्स की होगी मांग
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कंपनियों को एआई इंजीनियरिंग, एजेंट ऑर्केस्ट्रेशन और नॉन-डिटरमिनिस्टिक सिस्टम्स को संभालने जैसी नई क्षमताओं की जरूरत होगी। ऐसे सिस्टम्स में एक ही प्रॉम्प्ट से हर बार अलग परिणाम मिल सकते हैं, इसलिए उन्हें मैनेज करना पारंपरिक सॉफ्टवेयर से कहीं ज्यादा जटिल है।

शेयर बाजार में घबराहट
निलेकणी की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पिछले हफ्ते टेक सेक्टर में भारी बिकवाली देखी गई। Nifty IT इंडेक्स एक ही दिन में 5.51 प्रतिशत गिर गया। निवेशकों को डर है कि AI आधारित समाधान पारंपरिक आईटी सेवाओं की जगह ले सकते हैं, जिनसे भारतीय आईटी कंपनियों को बड़ा राजस्व मिलता है।

इसी महीने अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने Claude Cowork नाम का नया एआई असिस्टेंट लॉन्च किया, जिसमें ऑटोमेशन की उन्नत क्षमता जोड़ी गई है। इसके बाद अमेरिकी टेक शेयर बाजार NASDAQ में भी तेज गिरावट देखी गई।

अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म जेफरिजी ने इस स्थिति को “सासपोक्लिप्स” करार दिया। कुछ रणनीतिकारों ने चेतावनी दी है कि अगर एजेंटिक एआई पारंपरिक सेवाओं की जगह लेता है, तो आईटी कंपनियों के राजस्व में 40 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, खासकर तब जब मुनाफा पहले से दबाव में है।

भारत कर रहा है एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन
बता दें कि राजधानी नई दिल्ली में पांच दिवसीय 'एआई इम्पैक्ट समिट 2026' का आयोजन किया जा रहा है। यह समिट 16 फरवरी से शुरू हो गया है और 20 फरवरी तक चलेगा। समिट के मुख्य कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में किया जा रहा है। इस आयोजन में कई बड़ी हस्तियां शामिल हो रही हैं। फ्रांस के प्रेजिडेंट इमैनुएल मैक्रों इवेंट में शामिल होने भारत पहुंच चुके हैं। वहीं, माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स भी बहुत जल्द भारत पहुंचेंगे।

एआई समिट की अतिथि सूची में कई वैश्विक टेक दिग्गजों के नाम शामिल हैं। इनमें सैम ऑल्टमैन, सुंदर पिचाई, एलेक्जेंडर वांग, डारियो आमोदेई और क्रिस्टियानो आमोन जैसे कई प्रमुख चेहरे शामिल हैं। वहीं, भारत से रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन, इंफोसिस के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक सलील पारेख जैसे टेक लीडर्स भी इवेंट में हिस्सा ले रहे हैं।

एआई इंपैक्ट समिट 2026 का क्या है उद्देश्य?
एआई इम्पैक्ट समिट का मुख्य लक्ष्य कृषि, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एआई के प्रभाव को बढ़ाना और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना है। इसमें दुनिया भर के नीति निर्माता, उद्योग जगत के नेता, शोधकर्ता और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। भारत एआई इंपैक्ट समिट का आयोजन कर ग्लोबल साउथ का नेतृत्व कर रहा है।

बता दें कि भारत से पहले यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण कोरिया और फ्रांस जैसे देश एआई समिट का आयोजन कर चुके हैं। एआई इम्पैक्ट समिट के जरिए भारत ग्लोबल साउथ का नेतृत्व कर रहा है।

एआई समिट तीन मुख्य सिद्धांतों पर आधारित है जो इसके विजन को परिभाषित करते हैं: 
पीपल (लोग): एआई को मानवता की सेवा और समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए विकसित करना।
प्लैनेट (ग्रह): एआई नवाचारों को पर्यावरणीय स्थिरता और सुरक्षा के साथ जोड़ना।
प्रोग्रेस (तरक्की): एआई के लाभों का समान वितरण सुनिश्चित करना ताकि वैश्विक समृद्धि बढ़े।

100 से ज्यादा देशों की भागीदारी
एआई समिट में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधी शामिल हो रहे हैं। इसमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा सहित 15-20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 50 से ज्यादा मंत्री इसमें हिस्सा लेंगे। भारत मंडपम के 70,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में 'एआई इम्पैक्ट एक्सपो' लगाया गया है जिसमें 300 से ज्यादा कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। यहां लोग लाइव डेमो के जरिए देख सकेंगे कि एआई असल जिंदगी में कैसे काम करता है।

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