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AI: अब नींद के डाटा से पता चलेगा 100 से ज्यादा बीमारियों का खतरा: शोधकर्ताओं ने विकसित किया नया एआई मॉडल

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Wed, 07 Jan 2026 05:40 PM IST
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सार

आपकी नींद अब भविष्य की बीमारियों का संकेत भी बन सकती है। शोधकर्ताओं ने SleepFM नाम का एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल विकसित किया है, जो केवल नींद से जुड़े डाटा के आधार पर 100 से ज्यादा बीमारियों के खतरे का अनुमान लगा सकता है। 

AI Model ‘SleepFM’ Can Predict Risk of Over 100 Diseases Using Just Sleep Data
एक नया एआई मॉडल आपकी नींद के डाटा के आधार पर यह बता सकता है कि भविष्य में आपको 100 से ज्यादा बीमारियों का खतरा है या नहीं। (सांकेतिक तस्वीर)) - फोटो : Adobe Stock
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शोधकर्ताओं ने एक नया और स्मार्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल बनाया है। जो सिर्फ आपकी नींद के डाटा के आधार पर यह बता सकता है कि भविष्य में आपको 100 से ज्यादा बीमारियों का खतरा है या नहीं। इस एआई मॉडल का नाम SleepFM (स्लीपएफएम) रखा गया है। इसे स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी समेत कई शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार किया है। इस मॉडल को करीब 65,000 लोगों के लगभग 6 लाख घंटे की नींद से जुड़े डाटा पर ट्रेन किया गया है।

SleepFM काम कैसे करता है?

नेचर मेडिसिन में प्रकाशित शोध के मुताबिक, पहले इस एआई को नींद से जुड़े सामान्य कामों के लिए परखा गया। जैसे- नींद के अलग-अलग चरणों की पहचान और स्लीप एपनिया की गंभीरता समझना। इसके बाद, नींद के डाटा को अस्पतालों के हेल्थ रिकॉर्ड से मिलाकर देखा गया। शोधकर्ताओं ने 1,000 से ज्यादा बीमारियों का विश्लेषण किया। इनमें से 130 बीमारियों की भविष्यवाणी यह मॉडल सिर्फ नींद के डाटा से काफी सटीक तरीके से कर पाया।

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नींद का डाटा इतना खास क्यों है?

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में स्लीप मेडिसिन के प्रोफेसर और इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक इमैनुएल मिग्नॉट ने कहा, "नींद के दौरान शरीर से बहुत सारे अहम संकेत मिलते हैं। लगभग 8 घंटे तक शरीर एक स्थिर अवस्था में रहता है, जिससे बेहद समृद्ध और उपयोगी डाटा मिलता है"। SleepFM पॉलीसोम्नोग्राफी डाटा का इस्तेमाल करता है, जिसे नींद की जांच का गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है। इसमें ये कारक शामिल होता है-

  • दिमाग की गतिविधि (EEG)
  • दिल की धड़कन (ECG)
  • मांसपेशियों की हलचल
  • सांस लेने का पैटर्न
  • पल्स और ऑक्सीजन स्तर

किन बीमारियों का खतरा बता सकता है यह एआई?

शोध के अनुसार, यह मॉडल खासतौर पर इन बीमारियों के लिए काफी सटीक साबित हुआ:

  • कैंसर
  • गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएं
  • दिल और रक्त संचार से जुड़ी बीमारियां
  • मानसिक रोग
  • पार्किंसंस जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं
  • स्ट्रोक और हार्ट फेलियर

शोधकर्ताओं का कहना है कि सिर्फ एक रात की नींद का डाटा भी गंभीर बीमारियों, जैसे दिल का दौरा, डिमेंशिया, किडनी रोग और जान जाने के जोखिम तक का अंदाजा लगाने में मदद कर सकता है।

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