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BTS Scam: फेक टावर से खाली हो रहे अकाउंट, नकली माेबाइल नेटवर्क के जाल ने उड़ाई सुरक्षा एजेंसियों की नींद

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Tue, 10 Feb 2026 11:57 AM IST
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सार

Fake Mobile Tower Fraud: अब साइबर ठग सिर्फ कॉल या वाट्सएप तक सीमित नहीं रहे। ये नए खतरनाक Fake BTS (नकली मोबाइल टावर) और एसएमएस ब्लास्टर स्कैम में आपका फोन बिना बताए फर्जी नेटवर्क से जुड़ जाता है और ओटीपी, बैंक डिटेल्स व पर्सनल डेटा खतरे में पड़ जाता है। क्या आपका मोबाइल जिस नेटवर्क से जुड़ा है, वो वाकई असली टावर है? या कोई स्कैमर चुपचाप आपके फोन को कंट्रोल कर रहा है? जानिए इस लेख में...
 

Fake BTS Scam How accounts drained via signal hijacking New network hole shocks investigators
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार

आजकल स्कैमर्स पोर्टेबल फर्जी मोबाइल टावर इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन्हें कार की डिक्की, बैग या सड़क किनारे छिपाया जा सकता है। वहीं, मोबाइल फोन हमेशा सबसे मजबूत सिग्नल चुनता है, ऐसे में कई बार वह असली टावर छोड़कर फर्जी टावर से कनेक्ट हो जाता है। जैसे ही ऐसा होता है, फोन की सिक्योरिटी डाउनग्रेड (4G/5G से 2G) हो जाती है और स्कैमर्स को रास्ता मिल जाता है।
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कैसे होता है फ्रॉड?
फर्जी नेटवर्क से जुड़ते ही स्कैमर्स आपके नंबर से मास एसएमसएस ब्लास्ट कर सकते हैं, फेक बैंक अलर्ट, ओटीपी रिक्वेस्ट और फिशिंग लिंक भेजते हैं। फिर डराकर आपसे लिंक क्लिक या डिटेल्स भरवाते हैं। इस दौरान यूजर को भनक भी नहीं चलती, क्योंकि ये सब नेटवर्क लेवल पर होता है।
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कितना खतरनाक है ये स्कैम?
आपके नंबर से फ्रॉड मैसेज बैंकिंग ओटीपी चोरी और अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन, पर्सनल डेटा लीक, पहचान चोरी (Identity Theft) जैसे ये स्कैम सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। ग्रीस जैसे देशों में भी पुलिस ऐसे फर्जी टावर गिरोह पकड़ चुकी है।

टेलीकॉम कंपनियां क्यों परेशान?
मोबाइल फोन असली और नकली टावर में फर्क नहीं कर पाता। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब नए नेटवर्क प्रोटोकॉल की जरूरत है ताकि फोन सिर्फ वेरिफाइड टावर से ही कनेक्ट हो।

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यूजर्स कैसे रहें सुरक्षित?
टेलीकॉम कंपनियों के लिए इसे रोकना एक बड़ी चुनौती है क्योंकि फोन बेस्ट सिग्नल चुनने के लिए प्रोग्राम्ड होते हैं। जब तक नए प्रोटोकॉल नहीं आते, आप ये करें:
  • नेटवर्क पर नजर: अगर आपका फोन अचानक बिना वजह 5G से हटकर सिर्फ 2G या नो सर्विस दिखाने लगे, तो संदेहास्पद गतिविधि मानकर सतर्क हो जाएं।
  • लिंक से दूरी: किसी भी एसएमएस में आए लिंक पर क्लिक न करें, चाहे वह कितना भी असली क्यों न लगे।
  • वेरिफिकेशन: बैंक से जुड़े किसी भी मैसेज की पुष्टि आधिकारिक एप या कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके ही करें।
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