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एलन मस्क का बड़ा फैसला: ग्रोक बिल्ड विवाद के बाद डिलीट होगा यूजर्स का पुराना डेटा, जानें क्या है पूरा मामला

Tue, 14 Jul 2026 04:31 PM IST
जागृति टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Tue, 14 Jul 2026 04:31 PM IST
सार

Grok Build Privacy: एक बार फिर xAI के कोडिंग टूल ग्राेक बिल्ड को लेकर एक बड़ा प्राइवेसी विवाद खड़ा हो गया है, जिसके बाद खुद एलन मस्क को सामने आकर पूरा पुराना डोटा डिलीट करने का एलान करना पड़ा। आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है..
 

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Grok Build Privacy: Elon Musk Promises Delete Previously Uploaded User Data
ग्रोक प्राइवेसी विवाद - फोटो : X

विस्तार

Elon Musk AI: जितना एआई टूल्स ने डेवलपर्स के लिए कोडिंग आसान कर दी है, उतना ही इसके प्राइवेसी को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। हाल ही में एलन मस्क की कंपनी एक्सएआई का कोडिंग टूल ग्रोक बिल्ड एक बड़े प्राइवेसी विवाद में आ गया है। जिसके बाद एलन मस्क ने बड़ा कदम उठाते हुए घोषणा की, कि सावधानी के तौर पर पहले से अपलोड किए गए सभी यूजर डेटा को पूरी तरह से डिलीट कर दिया जाएगा। यह बात मस्क ने साइबर सिक्योरिटी रिसर्च की ओर से डाटा कलेक्शन को लेकर चिंता जताए जाने के बाद कही है।
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Grok Build विवाद क्या है?
दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ, जब एआई कोडिंग टूल ग्राेक बिल्ड का डेटा हैंडलिंग प्रक्रिया को लेकर ऑनलाइन सवाल उठने लगे। कई डेवलपर्स और साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि एआई टूल्स यूजर्स के प्रोजेक्ट, प्रॉम्प्ट्स और कोड को किस तरह प्रोसेस और स्टोर करते हैं। इसी मुद्दे ने AI कोडिंग टूल्स में डेटा प्राइवेसी और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी।
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एलन मस्क ने क्या कहा?
मामला सामने आते ही एलन मस्क ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर कहा कि सावधानी के तौर पर अब तक SpaceXAI पर अपलोड किया गया सभी यूजर डेटा पूरी तरह और स्थायी रूप से डिलीट कर दिया जाएगा। उनके अनुसार, पहले अपलोड किए गए डेटा का कोई भी हिस्सा सिस्टम में नहीं रखा जाएगा।
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रिसर्चर्स ने क्या दावा किया?
साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर cereblab ने ग्रोक बिल्ड के सीएलआई का वायर-लेवल एनालिसिस साझा किया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह टूल पूरा गिट रिपॉजिटरी गूगल क्लाउड बकेटपर अपलोड कर सकता है।
रिसर्चर्स के मुताबिक, इसमें केवल जरूरी फाइलें ही नहीं, बल्कि ऐसी फाइलें भी शामिल हो सकती हैं जिनका यूजर के प्रॉम्प्ट से कोई सीधा संबंध नहीं होता। इसमें एपीआई की और Environment फाइल्स जैसी संवेदनशील जानकारी शामिल होने की आशंका भी जताई गई।

xAI ने क्या सफाई दी?
विवाद के बाद xAI ने अपने प्राइवेसी फीचर्स की जानकारी साझा की। कंपनी के अनुसार, जीरो डेटा रिटेनशन (ZDR) मोड में कोड और प्रॉम्प्ट्स को बिना स्टोर किए प्रोसेस किया जाता है। अगर ZDR मोड बंद है, तो यूजर CLI में /प्राइवेसी कमांड का उपयोग करके डेटा रिटेंशन बंद कर सकते हैं और पहले सिंक किया गया डेटा भी डिलीट कर सकते हैं। कंपनी का कहना है कि यूजर्स कभी भी अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स की जांच या बदलाव कर सकते हैं।

क्या यूजर डेटा का गलत इस्तेमाल हुआ?
फिलहाल ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि यूजर का कोड AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया गया या सार्वजनिक रूप से लीक हुआ। हालांकि, इस पूरे विवाद ने एआई कोडिंग टूल्स में डेटा संग्रह, यूजर कंट्रोल और प्राइवेसी ट्रांसपेरेंसी को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।


यूजर्स को क्या ध्यान रखना चाहिए?
अगर आप AI कोडिंग असिस्टेंट का इस्तेमाल करते हैं, तो प्राइवेसी सेटिंग्स जरूर जांचें। किसी भी टूल में संवेदनशील प्रोजेक्ट, एपीआई की या गोपनीय फाइलें अपलोड करने से पहले उसकी डेटा रिटेंशन पॉलिसी और प्राइवेसी विकल्पों को समझना जरूरी है। AI टूल्स जितने उपयोगी हैं, उतना ही जरूरी है कि यूजर अपने डेटा पर नियंत्रण बनाए रखें।
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