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स्मार्टफोन आयातक से निर्यातक बना भारत: तकनीक में बजा देश का डंका, जानिए बीते 12 वर्षों में कैसे बदली तस्वीर

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Wed, 10 Jun 2026 02:09 PM IST
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सार

India Electronics Export: कभी इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन के लिए आयात पर निर्भर रहने वाला भारत अब वैश्विक टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन चुका है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, मोदी सरकार के 12 वर्षों में देश ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ी प्रगति की है। अब भारत से अमेरिका, चीन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों को हाई-टेक उत्पाद निर्यात किए जा रहे हैं।

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12 वर्षों में बदली तकनीक के क्षेत्र की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भारत आज दुनिया की तकनीकी महाशक्तियों की कतार में एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार बनकर खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में देश ने इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीक के क्षेत्र में एक ऐसी लंबी छलांग लगाई है जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की गई थी। आज स्थिति यह है कि भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद और स्मार्टफोन किसी छोटे देश को नहीं बल्कि सीधे अमेरिका और चीन जैसे दिग्गज बाजारों को निर्यात कर रहा है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस ऐतिहासिक बदलाव की पूरी कहानी साझा की है।


केंद्रीय मंत्री ने एक साक्षात्कार में देश के पुराने इतिहास का जिक्र करते हुए एक बड़ी बात कही। उन्होंने बताया कि भारत में सेमीकंडक्टर यानी चिप निर्माण के प्रयास देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय से ही शुरू हो गए थे। इसके बाद इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी और मनमोहन सिंह जैसे प्रधानमंत्रियों ने भी अपने-अपने स्तर पर इसके लिए कोशिशें कीं। लेकिन इस सपने को हकीकत में बदलने और इस क्षेत्र में असली सफलता हासिल करने का काम मोदी सरकार के मजबूत इरादों और सटीक नीतियों की वजह से ही संभव हो पाया है।
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चीन को कलपुर्जे और अमेरिका को जटिल इंजन भेज रहा है भारत
  • केंद्रीय मंत्री ने देश की इस नई ताकत का ब्योरा देते हुए कहा कि भारत अब मैन्युफैक्चरिंग के अगले और बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुका है। हम अब इलेक्ट्रॉनिक्स के बेहद जटिल और बुनियादी कंपोनेंट्स यानी कलपुर्जों का निर्माण खुद अपने देश में बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। 
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  • बीते साल के आंकड़े देश की इस तरक्की की गवाही देते हैं। भारत ने पिछले साल चीन को करीब 35,000 करोड़ रुपये मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जे निर्यात किए हैं। इतना ही नहीं भारतीय इंजीनियरों द्वारा तैयार किए गए बेहद जटिल रेलवे प्रोपल्शन यानी इंजन सिस्टम को फ्रांस, जर्मनी, इटली और खुद अमेरिका जैसे विकसित देशों को निर्यात किया जा रहा है।

भारत ने निर्यात किए 30 अरब डॉलर के स्मार्टफोन
  • अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साल 2014 के उन दिनों को याद करना जरूरी है जब भारत अपनी जरूरतों के लिए विदेशों से स्मार्टफोन आयात करने पर पूरी तरह निर्भर था। लेकिन आज स्थितियां पूरी तरह उलट चुकी हैं। स्मार्टफोन अब भारत के निर्यात सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। 
  • साल 2025 में भारत ने विदेशों में लगभग 30 बिलियन डॉलर मूल्य के स्मार्टफोन भेजे हैं। साल 2025 के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स का क्षेत्र देश के माल निर्यात की तीसरी सबसे बड़ी कैटेगरी बन गया है। इसमें मोबाइल फोन ने सबसे बड़े एकल निर्यात उत्पाद के रूप में अपनी जगह बनाई है।

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भारत कई देशों को इलेक्टॉनिक्स कल-पुर्जे निर्यात करता है। - फोटो : एआई जनरेटेड
भारत ने बदला निर्यात का पुराना ढर्रा
  • पारंपरिक तौर पर भारत के निर्यात बाजार पर हमेशा से डीजल, रत्न-आभूषण, गारमेंट्स और इंजीनियरिंग के कपड़ों का ही दबदबा रहा करता था। लेकिन अब इलेक्ट्रॉनिक्स ने इस पुराने ढर्रे को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। अश्विनी वैष्णव का मानना है कि इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि आज पूरी दुनिया ने भारत को एक सुरक्षित और भरोसेमंद वैल्यू चेन पार्टनर के रूप में स्वीकार कर लिया है।
  • वैश्विक बाजार को अब पूरा भरोसा है कि भारत बेहतरीन क्वालिटी के सामान बना सकता है और सुरक्षित तथा बेहद भरोसेमंद उत्पादों को डिजाइन भी कर सकता है। सुरक्षा के नजरिए से भी आज दुनिया भारतीय प्रोडक्ट्स को सबसे अव्वल मानती है।
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उन्होंने बताया कि सरकार इस पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग को किसी छोटे या तात्कालिक फायदे के रूप में नहीं देख रही है। सरकार इसे पूरे बीस साल के एक लंबे और दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा रही है। सरकार की शुरुआती रणनीति बेहद साफ थी। सबसे पहले सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए जरूरी और बुनियादी आधारभूत ढांचा तैयार किया गया ताकि आने वाले समय में एक मजबूत इमारत खड़ी की जा सके। साल 1962 से जिस सपने को देश संजोए बैठा था वह अब प्रधानमंत्री मोदी के ध्यान केंद्रित करने और सटीक क्रियान्वयन की वजह से पूरा हो पाया है।

इंडिया सेमीकंडक्ट मिशन 2.0: अब देश में ही बनेंगी विशाल मशीनें और रसायन
  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन यानी आईएसएम (ISM) के पहले चरण में सरकार ने करीब 48 नए स्टार्टअप्स को तकनीकी उत्पाद बनाने के काम से सफलतापूर्वक जोड़ा है। अब सरकार इसके अगले चरण यानी आईएसएम 2.0 की तैयारियों में जुट गई है। इस नए चरण में सबसे ज्यादा प्राथमिकता चिप की डिजाइनिंग को दी जाएगी।
  • इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा फोकस उन बड़ी मशीनों पर होगा जिनका इस्तेमाल सेमीकंडक्टर बनाने में किया जाता है। सरकार की कोशिश है कि दुनिया के बड़े मशीन निर्माताओं को भारत लाया जाए ताकि वे यहीं पर मशीनों को डिजाइन और मैन्युफैक्चर कर सकें।
  • सेमीकंडक्टर मिशन का अगला चरण सिर्फ मशीनों तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। चिप बनाने के लिए बेहद जटिल रसायनों और विशेष गैसों की जरूरत होती है। नए चरण में इन रसायनों का स्वदेशी उत्पादन भी भारत में ही शुरू किया जाएगा।
  • इसके साथ ही देश में कई नए चिप विनिर्माण प्लांट यानी फैब्स और चिप पैकेजिंग यूनिट्स स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा पहले चरण में देश के भीतर हुनरमंद युवाओं को तैयार करने का जो सिलसिला शुरू हुआ था उसे अब और भी ज्यादा तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

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कॉलेज की लैब में खुद की चिप बना रहे हैं भारतीय छात्र
  • केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश के भीतर प्रतिभाओं को निखारने के लिए किए गए काम अब जमीन पर दिखाई देने लगे हैं। भारत के तमाम इंजीनियरिंग कॉलेजों के पास अब दुनिया के सबसे आधुनिक उपकरण और सेमीकंडक्टर डिजाइन टूल्स मौजूद हैं। देश के युवा छात्र खुद जिस चिप को डिजाइन करते हैं उसका निर्माण मोहाली की एक अत्याधुनिक प्रयोगशाला में किया जाता है। 
  • छात्र अपनी बनाई हुई डिजाइन को एक असली फिजिकल चिप के रूप में अपनी आंखों के सामने देख सकते हैं। इस तरह की अनूठी और आधुनिक क्षमता दुनिया के मुट्ठी भर कॉलेजों के पास ही मौजूद है जो अब भारतीय छात्रों को मिल रही है।

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने मानव संसाधन के क्षेत्र में भी तय समय से बहुत पहले ही बड़ी सफलता हासिल कर ली है। शुरुआती योजना के तहत दस साल के भीतर 80,000 छात्रों को सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन सरकार ने महज चार साल के बेहद छोटे समय में ही लगभग 75,000 छात्रों को तैयार कर दिया है। सरकार इस रफ्तार से अपने दस साल के इस बड़े लक्ष्य को महज पांच वर्षों के भीतर ही हासिल करने जा रही है।
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