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'एपल को बंद कर पैसे लौटा दो': माइकल डेल को आज भी है स्टीव जॉब्स को कही इस बात का पछतावा
Sun, 23 Aug 2026 04:46 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Sun, 23 Aug 2026 04:46 PM IST
सार
माइकल डेल और स्टीव जॉब्स की कहानी सिर्फ मुकाबले की नहीं, बल्कि प्रेरणा और दोस्ती की भी है। 1980 में 15 साल के माइकल डेल पहली बार जॉब्स से मिले थे। जानिए कैसे एपल का सबसे बड़ा फैन आगे चलकर जॉब्स का सबसे बड़ा प्रतियोगी बन गया।
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1984 में हुई थी डेल कंप्यूटर्स की शुरुआत
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
डेल (Dell) कंप्यूटर को आज दुनिया भर में ऑफिस डेस्क की पहचान माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि डेल कंपनी की शुरुआत से काफी पहले, 1980 में ह्यूस्टन के एक मीटिंग रूम में कुछ ऐसा हुआ था जिसने इतिहास रच दिया? उस समय 15 साल के एक लड़के ने पहली बार 25 वर्षीय स्टीव जॉब्स (Steve Jobs) को देखा था। यह लड़का और कोई नहीं, बल्कि माइकल डेल (Michael Dell) थे। अपनी किताब 'प्ले नाइस बट विन' (Play Nice But Win) में डेल लिखते हैं कि जॉब्स का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि जब वे कमरे में आए, तो सब उन्हें देखते रह गए। 15 साल के डेल ने उस दिन सपने में भी नहीं सोचा होगा कि आने वाले पांच वर्षों में वे और जॉब्स सिर्फ सहकर्मी ही नहीं, बल्कि दोस्त भी बन जाएंगे।
Apple II से शुरू हुआ था टेक का जुनून
इस ऐतिहासिक मुलाकात से एक साल पहले की बात है। 1979 में डेल ने अपने माता-पिता से जिद करके लगभग 1,298 डॉलर में एक Apple II कंप्यूटर खरीदा था। उन्होंने इसे सिर्फ चलाया नहीं, बल्कि तुरंत इसके पुर्जे अलग कर दिए ताकि समझ सकें कि यह मशीन अंदर से काम कैसे करती है। डेल मानते थे कि किसी भी चीज को पूरी तरह समझने के लिए उसे खोलकर देखना जरूरी है। उस कम उम्र में भी डेल के अंदर एक पक्का बिजनेसमैन छिपा था, जो हाई स्कूल में न्यूजपेपर बेचकर एक साल में हजारों डॉलर कमा रहा था।
ह्यूस्टन में स्टीव जॉब्स का वो यादगार भाषण
1980 की उस मीटिंग में जॉब्स ने पर्सनल कंप्यूटर की अहमियत पर बात की थी। उस वक्त Apple III की तैयारी चल रही थी। जॉब्स ने एक बेहतरीन उदाहरण देते हुए कहा था कि एक पैसेंजर ट्रेन में भारी निवेश करने के बजाय, उतने ही पैसों में एक हजार वोक्सवैगन (Volkswagen) कारें खरीदी जा सकती हैं। इसका फायदा यह होगा कि वो हजार लोग अपनी मर्जी से, अपने समय पर और अपने मनचाहे लोगों के साथ कहीं भी जा सकेंगे। जॉब्स का विजन था कि पीसी (PC) आने के बाद लोगों को कंप्यूटर इस्तेमाल करने के लिए लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। 15 साल के डेल ने उनके इस विजन पर पूरा यकीन किया।
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दोस्ती से लेकर सिलिकॉन वैली की बड़ी दुश्मनी तक
समय बीतता गया और डेल ने टेक्सस यूनिवर्सिटी के अपने हॉस्टल से महज हजार डॉलर में पीसी का बिजनेस शुरू कर दिया। दोनों के बीच दोस्ती भी हुई, लेकिन दुनिया उन्हें बड़े टेक प्रतिद्वंद्वियों के रूप में ज्यादा जानती है। 1993 में जॉब्स ने डेल को अपने NeXT ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रस्ताव दिया, जिसे डेल ने यह कहकर ठुकरा दिया कि इसमें ग्राहकों की कोई दिलचस्पी नहीं है। 1997 में जॉब्स ने Intel प्रोसेसर पर Mac OS चलाने का भी ऑफर दिया, लेकिन रॉयल्टी के पैसों को लेकर दोनों के बीच बात बिगड़ गई।
वो एक बयान, जिसका डेल को आज भी है मलाल
रिश्तों में असली खटास 6 अक्टूबर 1997 को आई। एक इंटरव्यू में माइकल डेल से पूछा गया कि अगर वह एपल के बॉस होते तो क्या करते? डेल ने तंज कसते हुए कहा कि वह कंपनी बंद कर देंगे और शेयरधारकों को उनके पैसे लौटा देंगे। यह बात जॉब्स को बहुत चुभी। उन्होंने डेल को ईमेल भेजकर तीखी प्रतिक्रिया दी और बाद में अपने एक इवेंट में डेल की तस्वीर स्क्रीन पर लगाकर खुलेआम उन्हें चुनौती दी।
माइकल डेल आज उस बयान को खुद ही मूर्खतापूर्ण और गैर-पेशेवर मानते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस स्टीव जॉब्स को वह 15 साल की उम्र में बेहद प्रभावशाली मानते थे, उनके साथ उनकी कहानी आगे चलकर दोस्ती, कारोबार, प्रतिस्पर्धा और सार्वजनिक तकरार, सब कुछ देखाने वाली बनी।
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Apple II से शुरू हुआ था टेक का जुनून
इस ऐतिहासिक मुलाकात से एक साल पहले की बात है। 1979 में डेल ने अपने माता-पिता से जिद करके लगभग 1,298 डॉलर में एक Apple II कंप्यूटर खरीदा था। उन्होंने इसे सिर्फ चलाया नहीं, बल्कि तुरंत इसके पुर्जे अलग कर दिए ताकि समझ सकें कि यह मशीन अंदर से काम कैसे करती है। डेल मानते थे कि किसी भी चीज को पूरी तरह समझने के लिए उसे खोलकर देखना जरूरी है। उस कम उम्र में भी डेल के अंदर एक पक्का बिजनेसमैन छिपा था, जो हाई स्कूल में न्यूजपेपर बेचकर एक साल में हजारों डॉलर कमा रहा था।
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ह्यूस्टन में स्टीव जॉब्स का वो यादगार भाषण
1980 की उस मीटिंग में जॉब्स ने पर्सनल कंप्यूटर की अहमियत पर बात की थी। उस वक्त Apple III की तैयारी चल रही थी। जॉब्स ने एक बेहतरीन उदाहरण देते हुए कहा था कि एक पैसेंजर ट्रेन में भारी निवेश करने के बजाय, उतने ही पैसों में एक हजार वोक्सवैगन (Volkswagen) कारें खरीदी जा सकती हैं। इसका फायदा यह होगा कि वो हजार लोग अपनी मर्जी से, अपने समय पर और अपने मनचाहे लोगों के साथ कहीं भी जा सकेंगे। जॉब्स का विजन था कि पीसी (PC) आने के बाद लोगों को कंप्यूटर इस्तेमाल करने के लिए लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। 15 साल के डेल ने उनके इस विजन पर पूरा यकीन किया।
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दोस्ती से लेकर सिलिकॉन वैली की बड़ी दुश्मनी तक
समय बीतता गया और डेल ने टेक्सस यूनिवर्सिटी के अपने हॉस्टल से महज हजार डॉलर में पीसी का बिजनेस शुरू कर दिया। दोनों के बीच दोस्ती भी हुई, लेकिन दुनिया उन्हें बड़े टेक प्रतिद्वंद्वियों के रूप में ज्यादा जानती है। 1993 में जॉब्स ने डेल को अपने NeXT ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रस्ताव दिया, जिसे डेल ने यह कहकर ठुकरा दिया कि इसमें ग्राहकों की कोई दिलचस्पी नहीं है। 1997 में जॉब्स ने Intel प्रोसेसर पर Mac OS चलाने का भी ऑफर दिया, लेकिन रॉयल्टी के पैसों को लेकर दोनों के बीच बात बिगड़ गई।
वो एक बयान, जिसका डेल को आज भी है मलाल
रिश्तों में असली खटास 6 अक्टूबर 1997 को आई। एक इंटरव्यू में माइकल डेल से पूछा गया कि अगर वह एपल के बॉस होते तो क्या करते? डेल ने तंज कसते हुए कहा कि वह कंपनी बंद कर देंगे और शेयरधारकों को उनके पैसे लौटा देंगे। यह बात जॉब्स को बहुत चुभी। उन्होंने डेल को ईमेल भेजकर तीखी प्रतिक्रिया दी और बाद में अपने एक इवेंट में डेल की तस्वीर स्क्रीन पर लगाकर खुलेआम उन्हें चुनौती दी।
माइकल डेल आज उस बयान को खुद ही मूर्खतापूर्ण और गैर-पेशेवर मानते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस स्टीव जॉब्स को वह 15 साल की उम्र में बेहद प्रभावशाली मानते थे, उनके साथ उनकी कहानी आगे चलकर दोस्ती, कारोबार, प्रतिस्पर्धा और सार्वजनिक तकरार, सब कुछ देखाने वाली बनी।