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जेन्सेन हुआंग: टेक्नोलॉजी में अमेरिका से आगे निकले ये तीन देश, क्यों पीछे छूटा सुपरपावर? बताई असलियत
Thu, 29 Oct 2026 04:02 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 29 Oct 2026 04:02 PM IST
सार
Jensen Huang: दुनिया की सबसे बड़ी चिप कंपनी एनवीडिया (Nvidia) के सीईओ जेन्सेन हुआंग ने ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी को लेकर एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उनके मुताबिक, आज दुनिया के टॉप-3 टेक लीडर्स में अमेरिका का नाम ही नहीं है, बल्कि चीन, जापान और जर्मनी का दबदबा है। आखिर अमेरिका इस रेस में कैसे पिछड़ गया और अमेरिकी प्रतिबंधों ने कैसे चीन को और ज्यादा ताकतवर बना दिया? आइए तफ्सील से समझते हैं।
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एनवीडिया सीईओ ने बताया टेक में कैसे आगे निकला एशियाई देश।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Leaders In Technology: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक चिप मेकिंग की दुनिया में बादशाहत कायम करने वाली कंपनी एनवीडिया (Nvidia) के सीईओ जेन्सेन हुआंग (Jensen Huang) अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्च के साथ हुई एक चर्चा के दौरान हुआंग ने ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी को लेकर कुछ ऐसी बातें कही हैं, जिसने टेक जगत में नई बहस छेड़ दी है। हुआंग ने दुनिया के उन टॉप-3 देशों के नाम बताए हैं, जो इस वक्त मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी विकास में सबसे आगे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस लिस्ट में अमेरिका का नाम नहीं है।
अमेरिका आउट, ये 3 देश हैं असली टेक लीडर
जेन्सेन हुआंग के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी के मामले में आज पूरी दुनिया सिर्फ तीन देशों के इर्द-गिर्द घूम रही है- जर्मनी, जापान और चीन। जब उनसे पूछा गया कि इस लिस्ट में अमेरिका क्यों नहीं है, तो हुआंग ने एक कड़वा सच बयां किया। उन्होंने कहा, "पिछले 50 वर्षों में, जब दुनिया में कंप्यूटिंग और डिजिटल तकनीक की क्रांति हो रही थी, तब अमेरिका ने अपनी भारी मैन्युफैक्चरिंग और निर्माण कार्यों को बड़े पैमाने पर चीन को आउटसोर्स कर दिया। यही वजह है कि आज दुनिया में सिर्फ तीन ही असली टेक लीडर बचे हैं।"
चीन को कैसे मिला सबसे बड़ा फायदा?
अमेरिकी प्रतिबंधों ने चीन को बनाया आत्मनिर्भर
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अमेरिका आउट, ये 3 देश हैं असली टेक लीडर
जेन्सेन हुआंग के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी के मामले में आज पूरी दुनिया सिर्फ तीन देशों के इर्द-गिर्द घूम रही है- जर्मनी, जापान और चीन। जब उनसे पूछा गया कि इस लिस्ट में अमेरिका क्यों नहीं है, तो हुआंग ने एक कड़वा सच बयां किया। उन्होंने कहा, "पिछले 50 वर्षों में, जब दुनिया में कंप्यूटिंग और डिजिटल तकनीक की क्रांति हो रही थी, तब अमेरिका ने अपनी भारी मैन्युफैक्चरिंग और निर्माण कार्यों को बड़े पैमाने पर चीन को आउटसोर्स कर दिया। यही वजह है कि आज दुनिया में सिर्फ तीन ही असली टेक लीडर बचे हैं।"
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चीन को कैसे मिला सबसे बड़ा फायदा?
- हुआंग ने चीन की औद्योगिक ताकत का विश्लेषण करते हुए बताया कि चीन को सही समय का सबसे बड़ा फायदा मिला। चीन में जब औद्योगिक क्रांति और आर्थिक बदलाव हो रहे थे, तब दुनिया में कंप्यूटर इंडस्ट्री भी तेजी से पैर पसार रही थी।
- उन्होंने बताया कि चीन की मैन्युफैक्चरिंग की बुनियाद ही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ रखी गई थी। हुआंग ने कहा, "आज के दौर में चीन शायद इकलौता ऐसा देश है, जिसे मैन्युफैक्चरिंग और कंप्यूटर साइंस, दोनों में ही गहरी महारत हासिल है। वहां की इंडस्ट्री पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड हो चुकी है।
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अमेरिकी प्रतिबंधों ने चीन को बनाया आत्मनिर्भर
- बर्लिन में आयोजित एनवीडिया जीटीसी सम्मेलन के दौरान हुआंग ने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े व्यापारिक प्रतिबंधों ने चीन को कमजोर करने के बजाय उसे और मजबूत बना दिया। गौरतलब है कि अमेरिका ने एनवीडिया के हाई-एंड एआई जीपीयू और आधुनिक प्रोसेसर के चीन निर्यात पर रोक लगा रखी है। लेकिन हुआंग का मानना है कि इन पाबंदियों ने चीन को अपने घरेलू चिप उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने के लिए मजबूर किया।
- उन्होंने कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि हमारे प्रतिबंधों ने चीन के सेमीकंडक्टर मिशन और उनके घरेलू प्रोजेक्ट्स की रफ्तार को कई गुना बढ़ा दिया है।" हालांकि, इस कड़े मुकाबले के बावजूद हुआंग ने भरोसा जताया कि अमेरिकी टेक कंपनियां दुनिया में किसी भी देश से मिलने वाली चुनौती का डटकर सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।