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EMI नहीं भरी तो तुरंत लॉक नहीं होगा फोन: RBI ने तय किया पूरा तरीका; जानें कब लग सकती है पाबंदी
Sun, 09 Aug 2026 03:20 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Sun, 09 Aug 2026 03:20 PM IST
सार
ईएमआई (EMI) पर खरीदे फोन या दूसरे उपकरण का भुगतान चूकने पर बैंक अब मनमाने तरीके से उसे बंद नहीं कर सकेंगे। आरबीआई (RBI) ने डिवाइस पर पाबंदी लगाने के लिए नोटिस, समयसीमा और जरूरी सुविधाओं से जुड़े नियम तय किए हैं। भुगतान के बाद डिवाइस दोबारा चालू करने की भी समयसीमा होगी।
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- फोटो : FREEPIK
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विस्तार
EMI पर फोन खरीदना आज बेहद आम है। लेकिन अगर किसी महीने किस्त नहीं भर पाई तो क्या बैंक आपका फोन तुरंत बंद कर सकता है? भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिवाइस के जरिए लोन की वसूली को लेकर नियमों का ऐसा ढांचा तैयार किया है, जिसमें ग्राहक को भुगतान करने के लिए समय और जरूरी सुरक्षा दोनों मिलेंगे।
RBI के संशोधित ढांचे के मुताबिक, बैंक या ऋणदाता किसी भी फोन, टैबलेट या लैपटॉप को सिर्फ लोन की किस्त न चुकाने के कारण मनमाने तरीके से बंद नहीं कर सकते। डिवाइस पर तकनीकी पाबंदी तभी लगाई जा सकती है, जब वही डिवाइस संबंधित ऋण से खरीदा गया हो और ऋण समझौते में ऐसी कार्रवाई की साफ और स्पष्ट अनुमति दी गई हो।
60 दिन बाद क्या होगा?
अगर ईएमआई पर डिवाइस खरीदने वाले की किस्त बकाया हो जाती है और 60 दिन से अधिक समय तक बकाया रहती है, तो बैंक ग्राहक को नोटिस जारी कर सकता है। इस नोटिस में ग्राहक को बकाया चुकाने के लिए कम से कम 21 दिन का समय देना होगा।
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अगर इस अवधि में भी भुगतान नहीं किया जाता, तो बैंक को एक और नोटिस देना होगा। दूसरे नोटिस के बाद ग्राहक को कम से कम 7 दिन का अतिरिक्त समय मिलेगा। इसका मतलब यह हुआ कि 60 दिन पूरे होते ही फोन लॉक नहीं होगा। नोटिस और भुगतान के लिए तय समय पूरा होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
90 दिन बाद लॉक हो सकता है डिवाइस
RBI के संशोधित नियमों के मुताबिक, डिवाइस को लॉक या बंद करने की कार्रवाई तभी की जा सकती है जब संबंधित किस्त 90 दिन तक बकाया हो चुका हो और ग्राहक को दिए गए नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं किया गया हो।
इसके अलावा, बैंक को शुरुआत से ही फोन को पूरी तरह बंद करने के बजाय धीरे-धीरे उसकी सुविधाओं पर पाबंदी लगाने का तरीका अपनाना होगा। यानी डिफॉल्ट होते ही फोन को पूरी तरह बेकार कर देना नियम का उद्देश्य नहीं है।
इंटरनेट और जरूरी सुविधाएं बंद नहीं कर सकेंगे
डिवाइस पर पाबंदी लगाने की स्थिति में भी कुछ जरूरी सुविधाओं को बंद नहीं किया जा सकता। इनमें इंटरनेट की सुविधा, आने वाली कॉल और आपातकालीन सरकारी सूचनाएं शामिल हैं। यानी पाबंदी लगाए जाने के बाद भी फोन की जरूरी सेवाओं का इस्तेमाल जारी रह सकेगा।
साथ ही, बैंक ग्राहक के फोन में मौजूद निजी डेटा को अपनी वसूली प्रक्रिया के लिए हासिल, इस्तेमाल या अपने पास नहीं रख सकते। यानी लोन की किस्त न चुकाने का मतलब यह नहीं है कि बैंक को आपके फोन में मौजूद निजी जानकारी तक पहुंच मिल जाएगी।
भुगतान करने के बाद कब खुलेगा फोन?
अगर ग्राहक बकाया राशि चुका देता है, तो बैंक को डिवाइस पर लगाई गई पाबंदी एक घंटे के भीतर हटानी होगी। अगर बैंक गलत तरीके से पाबंदी लगाता है या भुगतान के बाद इसे हटाने में देरी करता है, तो ग्राहक को ₹250 प्रति घंटे के हिसाब से मुआवजा देना होगा।
रिकवरी एजेंट भी नहीं कर सकेंगे मनमानी
RBI ने सिर्फ फोन लॉक करने की प्रक्रिया पर ही नहीं, बल्कि लोन वसूली करने वाले एजेंटों के व्यवहार पर भी सख्ती की है। ग्राहकों को परेशान करने, धमकाने या सार्वजनिक रूप से अपमानित करने जैसी हरकतों पर रोक रहेगी। रिकवरी प्रक्रिया में ग्राहक की गरिमा और निजता का ध्यान रखना जरूरी होगा।
रिकवरी एजेंटों को ग्राहक से संपर्क करते समय तय नियमों का पालन करना होगा। ग्राहक के रिश्तेदारों, दोस्तों या सहकर्मियों को डराने-धमकाने या सोशल मीडिया पर उसकी जानकारी साझा करने जैसी गतिविधियां भी स्वीकार्य नहीं होंगी।
किन बैंकों पर लागू होंगे नियम?
ये नए निर्देश वाणिज्यिक बैंकों के लिए तैयार किए गए हैं। हालांकि, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और लोकल एरिया बैंक फिलहाल इस विशेष ढांचे के दायरे से बाहर हैं।
RBI का यह ढांचा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डिवाइस को तकनीकी तरीके से बंद करके लोन वसूलने की प्रक्रिया में ग्राहक के अधिकारों और ऋणदाता के हितों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। नए नियमों में बैंक को वसूली का अधिकार दिया गया है, लेकिन फोन को तुरंत बंद करने या ग्राहक के निजी डेटा तक पहुंच बनाने जैसी मनमानी पर रोक लगाई गई है। ये संशोधित निर्देश 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे।
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RBI के संशोधित ढांचे के मुताबिक, बैंक या ऋणदाता किसी भी फोन, टैबलेट या लैपटॉप को सिर्फ लोन की किस्त न चुकाने के कारण मनमाने तरीके से बंद नहीं कर सकते। डिवाइस पर तकनीकी पाबंदी तभी लगाई जा सकती है, जब वही डिवाइस संबंधित ऋण से खरीदा गया हो और ऋण समझौते में ऐसी कार्रवाई की साफ और स्पष्ट अनुमति दी गई हो।
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60 दिन बाद क्या होगा?
अगर ईएमआई पर डिवाइस खरीदने वाले की किस्त बकाया हो जाती है और 60 दिन से अधिक समय तक बकाया रहती है, तो बैंक ग्राहक को नोटिस जारी कर सकता है। इस नोटिस में ग्राहक को बकाया चुकाने के लिए कम से कम 21 दिन का समय देना होगा।
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अगर इस अवधि में भी भुगतान नहीं किया जाता, तो बैंक को एक और नोटिस देना होगा। दूसरे नोटिस के बाद ग्राहक को कम से कम 7 दिन का अतिरिक्त समय मिलेगा। इसका मतलब यह हुआ कि 60 दिन पूरे होते ही फोन लॉक नहीं होगा। नोटिस और भुगतान के लिए तय समय पूरा होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
90 दिन बाद लॉक हो सकता है डिवाइस
RBI के संशोधित नियमों के मुताबिक, डिवाइस को लॉक या बंद करने की कार्रवाई तभी की जा सकती है जब संबंधित किस्त 90 दिन तक बकाया हो चुका हो और ग्राहक को दिए गए नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं किया गया हो।
इसके अलावा, बैंक को शुरुआत से ही फोन को पूरी तरह बंद करने के बजाय धीरे-धीरे उसकी सुविधाओं पर पाबंदी लगाने का तरीका अपनाना होगा। यानी डिफॉल्ट होते ही फोन को पूरी तरह बेकार कर देना नियम का उद्देश्य नहीं है।
इंटरनेट और जरूरी सुविधाएं बंद नहीं कर सकेंगे
डिवाइस पर पाबंदी लगाने की स्थिति में भी कुछ जरूरी सुविधाओं को बंद नहीं किया जा सकता। इनमें इंटरनेट की सुविधा, आने वाली कॉल और आपातकालीन सरकारी सूचनाएं शामिल हैं। यानी पाबंदी लगाए जाने के बाद भी फोन की जरूरी सेवाओं का इस्तेमाल जारी रह सकेगा।
साथ ही, बैंक ग्राहक के फोन में मौजूद निजी डेटा को अपनी वसूली प्रक्रिया के लिए हासिल, इस्तेमाल या अपने पास नहीं रख सकते। यानी लोन की किस्त न चुकाने का मतलब यह नहीं है कि बैंक को आपके फोन में मौजूद निजी जानकारी तक पहुंच मिल जाएगी।
भुगतान करने के बाद कब खुलेगा फोन?
अगर ग्राहक बकाया राशि चुका देता है, तो बैंक को डिवाइस पर लगाई गई पाबंदी एक घंटे के भीतर हटानी होगी। अगर बैंक गलत तरीके से पाबंदी लगाता है या भुगतान के बाद इसे हटाने में देरी करता है, तो ग्राहक को ₹250 प्रति घंटे के हिसाब से मुआवजा देना होगा।
रिकवरी एजेंट भी नहीं कर सकेंगे मनमानी
RBI ने सिर्फ फोन लॉक करने की प्रक्रिया पर ही नहीं, बल्कि लोन वसूली करने वाले एजेंटों के व्यवहार पर भी सख्ती की है। ग्राहकों को परेशान करने, धमकाने या सार्वजनिक रूप से अपमानित करने जैसी हरकतों पर रोक रहेगी। रिकवरी प्रक्रिया में ग्राहक की गरिमा और निजता का ध्यान रखना जरूरी होगा।
रिकवरी एजेंटों को ग्राहक से संपर्क करते समय तय नियमों का पालन करना होगा। ग्राहक के रिश्तेदारों, दोस्तों या सहकर्मियों को डराने-धमकाने या सोशल मीडिया पर उसकी जानकारी साझा करने जैसी गतिविधियां भी स्वीकार्य नहीं होंगी।
किन बैंकों पर लागू होंगे नियम?
ये नए निर्देश वाणिज्यिक बैंकों के लिए तैयार किए गए हैं। हालांकि, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और लोकल एरिया बैंक फिलहाल इस विशेष ढांचे के दायरे से बाहर हैं।
RBI का यह ढांचा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डिवाइस को तकनीकी तरीके से बंद करके लोन वसूलने की प्रक्रिया में ग्राहक के अधिकारों और ऋणदाता के हितों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। नए नियमों में बैंक को वसूली का अधिकार दिया गया है, लेकिन फोन को तुरंत बंद करने या ग्राहक के निजी डेटा तक पहुंच बनाने जैसी मनमानी पर रोक लगाई गई है। ये संशोधित निर्देश 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे।