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Internet: झमाझम बारिश में कछुए की चाल क्यों चलने लगता है फोन का इंटरनेट? जानिए अचानक क्यों गिर जाती है स्पीड
Sun, 09 Aug 2026 02:38 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Sun, 09 Aug 2026 02:38 PM IST
सार
Slow Internet In Monsoon: क्या आपने कभी गौर किया है कि बारिश के समय मोबाइल इंटरनेट धीमा पड़ जाता है? कई एप्स काम नहीं करने लगते और यूट्यूब जैसे एप्स पर वीडियो बफर होने लगता है। आइए जानते हैं बारिश की बूंदें कैसे आपके फोन के नेटवर्क को धीमा कर देती हैं।
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बारिश में इंटरनेट क्यों स्लो हो जाता है? जानिए वजह।
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
खिड़की के बाहर झमाझम बारिश हो रही है। मौसम एकदम सुहाना है। आपने हाथ में चाय का कप और प्लेट में गरमागरम पकौड़े लिए हैं। सोचा कि सोफे पर लेटकर अपनी पसंदीदा वेब सीरीज का नया एपिसोड देखा जाए। लेकिन टीवी स्क्रीन पर प्ले का बटन दबाते ही... बफरिंग का वो मनहूस गोल-गोल चक्का घूमने लगता है। 4K रिजॉल्यूशन वाली स्क्रीन अचानक 144p के धुंधले पिक्सल्स में बदल जाती है।
हर मानसून या बेमौसम बारिश में देश के करोड़ों स्मार्टफोन और ब्रॉडबैंड यूजर्स की यही कहानी होती है। सड़क पर भले ही ट्रैफिक जाम न लगा हो, लेकिन आपके फोन के नेटवर्क में पक्का जाम लग जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आसमान से गिरते पानी का इंटरनेट के स्पीड से क्या लेना-देना है? आइए, जानते हैं आखिर क्यों बारिश तेज-तर्रार इंटरनेट की सांसें अटका देता है।
1. पानी की बूंदें बनती हैं रेडियो तरंगों की दुश्मन
हमें लगता है कि इंटरनेट हवा में तैरता हुआ हमारे फोन तक आता है, लेकिन असल में यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक या रेडियो तरंगों (Radio Waves) का खेल है। जब आसमान साफ होता है, तो सेल टावर से ये तरंगें बिना किसी रुकावट के आपके फोन तक पहुंचती हैं। लेकिन बारिश के समय इन तरंगों के रास्ते में पानी की लाखों बूंदें आ जाती हैं। विज्ञान के अनुसार, पानी इन रेडियो तरंगों को सोख लेता है या उन्हें टकराकर इधर-उधर बिखेर देता है। तकनीकी दुनिया में इसे 'रेन एटेन्यूएशन' या 'रेन फेड' कहा जाता है। बारिश जितनी तेज होगी, पानी की बूंदें उतनी ही ज्यादा तरंगों को सोखेंगी और आपके फोन तक पहुंचने वाला सिग्नल उतना ही कमजोर हो जाएगा।
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2. कमरों में कैद लोग और 'डिजिटल ट्रैफिक जाम'
बारिश में केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि इंसानी बर्ताव भी इंटरनेट के स्लो होने का एक बड़ा कारण है। जब बाहर मूसलाधार बारिश हो रही होती है, तो लोग अपने घरों में ही रहना पसंद करते हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग जाते टाइम पास करने के लिए सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हैं, फिल्में स्ट्रीम करते हैं या ऑनलाइन गेम खेलते हैं। इसका नतीजा ये होता है कि आपके इलाके के लोकल टावर पर अचानक से ट्रैफिक का भारी लोड आ जाता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी 4 लेन के हाईवे पर अचानक हजारों गाड़ियां एक साथ आ जाएं। सर्वर पर लोड बढ़ता है और बैंडविड्थ बंटने के कारण हर यूजर की स्पीड आधी या उससे भी कम रह जाती है।
3. तारों में पानी से भी स्लो हो जाती है स्पीड
अगर आपको लगता है कि आपका घर फाइबर ऑप्टिक या ब्रॉडबैंड से जुड़ा है, इसलिए आप बारिश से बचे हुए हैं, तो आप गलत हैं। हालांकि, फाइबर केबल में पानी का सीधा असर नहीं होता, लेकिन इंटरनेट के खंभों पर लगे जंक्शन बॉक्स या अंडरग्राउंड केबलिंग में जब पानी भर जाता है, तो सिग्नल लीक होने लगता है या शॉर्ट सर्किट हो जाता है। इसके अलावा, आंधी-तूफान के कारण जब मोबाइल टावरों के एंटीना अपनी जगह से थोड़ा भी हिल जाते हैं, तो पूरे इलाके का कवरेज बिगड़ जाता है।
4. हाई-फ्रीक्वेंसी यानी ज्यादा नखरे
दूरसंचार विशेषज्ञों का कहना है कि हम जैसे-जैसे नई तकनीक (जैसे 4G से 5G) की तरफ बढ़ रहे हैं, हमारी फ्रीक्वेंसी हाई होती जा रही है। हाई-फ्रीक्वेंसी वाले सिग्नल्स (जैसे 5G) डेटा तो बहुत तेजी से ले जाते हैं, लेकिन इनकी वेवलेंथ छोटी होने के कारण ये बारिश, पेड़-पौधों और दीवारों जैसी रुकावटों को आसानी से पार नहीं कर पाते। इसीलिए, बारिश में 5G नेटवर्क सबसे जल्दी लड़खड़ाता है।
तो फिर उपाय क्या है?
बैंड बदलें: अगर घर का वाई-फाई बारिश में स्लो हो जाए, तो राउटर की सेटिंग में 5GHz की जगह 2.4GHz बैंड से कनेक्ट करें। मोबाइल के इंटरनेट सेटिंग में जाकर बैंड को 5G से 4G में स्विच कर लें। इससे इंटरनेट स्पीड को बनाए रखने में मदद मिलेगी और अचानक से नेटवर्क गायब नहीं होगा।
पहले डाउनलोड कर लें: मौसम विभाग अगर भारी बारिश का अलर्ट दे, तो अपनी पसंदीदा मूवीज या सीरीज के एपिसोड पहले ही डाउनलोड करके रख लें।
राउटर की जगह: अपने ब्रॉडबैंड राउटर को खिड़की, सीलन वाली दीवारों या जमीन के एकदम पास न रखें।
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हर मानसून या बेमौसम बारिश में देश के करोड़ों स्मार्टफोन और ब्रॉडबैंड यूजर्स की यही कहानी होती है। सड़क पर भले ही ट्रैफिक जाम न लगा हो, लेकिन आपके फोन के नेटवर्क में पक्का जाम लग जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आसमान से गिरते पानी का इंटरनेट के स्पीड से क्या लेना-देना है? आइए, जानते हैं आखिर क्यों बारिश तेज-तर्रार इंटरनेट की सांसें अटका देता है।
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1. पानी की बूंदें बनती हैं रेडियो तरंगों की दुश्मन
हमें लगता है कि इंटरनेट हवा में तैरता हुआ हमारे फोन तक आता है, लेकिन असल में यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक या रेडियो तरंगों (Radio Waves) का खेल है। जब आसमान साफ होता है, तो सेल टावर से ये तरंगें बिना किसी रुकावट के आपके फोन तक पहुंचती हैं। लेकिन बारिश के समय इन तरंगों के रास्ते में पानी की लाखों बूंदें आ जाती हैं। विज्ञान के अनुसार, पानी इन रेडियो तरंगों को सोख लेता है या उन्हें टकराकर इधर-उधर बिखेर देता है। तकनीकी दुनिया में इसे 'रेन एटेन्यूएशन' या 'रेन फेड' कहा जाता है। बारिश जितनी तेज होगी, पानी की बूंदें उतनी ही ज्यादा तरंगों को सोखेंगी और आपके फोन तक पहुंचने वाला सिग्नल उतना ही कमजोर हो जाएगा।
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2. कमरों में कैद लोग और 'डिजिटल ट्रैफिक जाम'
बारिश में केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि इंसानी बर्ताव भी इंटरनेट के स्लो होने का एक बड़ा कारण है। जब बाहर मूसलाधार बारिश हो रही होती है, तो लोग अपने घरों में ही रहना पसंद करते हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग जाते टाइम पास करने के लिए सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हैं, फिल्में स्ट्रीम करते हैं या ऑनलाइन गेम खेलते हैं। इसका नतीजा ये होता है कि आपके इलाके के लोकल टावर पर अचानक से ट्रैफिक का भारी लोड आ जाता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी 4 लेन के हाईवे पर अचानक हजारों गाड़ियां एक साथ आ जाएं। सर्वर पर लोड बढ़ता है और बैंडविड्थ बंटने के कारण हर यूजर की स्पीड आधी या उससे भी कम रह जाती है।
3. तारों में पानी से भी स्लो हो जाती है स्पीड
अगर आपको लगता है कि आपका घर फाइबर ऑप्टिक या ब्रॉडबैंड से जुड़ा है, इसलिए आप बारिश से बचे हुए हैं, तो आप गलत हैं। हालांकि, फाइबर केबल में पानी का सीधा असर नहीं होता, लेकिन इंटरनेट के खंभों पर लगे जंक्शन बॉक्स या अंडरग्राउंड केबलिंग में जब पानी भर जाता है, तो सिग्नल लीक होने लगता है या शॉर्ट सर्किट हो जाता है। इसके अलावा, आंधी-तूफान के कारण जब मोबाइल टावरों के एंटीना अपनी जगह से थोड़ा भी हिल जाते हैं, तो पूरे इलाके का कवरेज बिगड़ जाता है।
4. हाई-फ्रीक्वेंसी यानी ज्यादा नखरे
दूरसंचार विशेषज्ञों का कहना है कि हम जैसे-जैसे नई तकनीक (जैसे 4G से 5G) की तरफ बढ़ रहे हैं, हमारी फ्रीक्वेंसी हाई होती जा रही है। हाई-फ्रीक्वेंसी वाले सिग्नल्स (जैसे 5G) डेटा तो बहुत तेजी से ले जाते हैं, लेकिन इनकी वेवलेंथ छोटी होने के कारण ये बारिश, पेड़-पौधों और दीवारों जैसी रुकावटों को आसानी से पार नहीं कर पाते। इसीलिए, बारिश में 5G नेटवर्क सबसे जल्दी लड़खड़ाता है।
तो फिर उपाय क्या है?
बैंड बदलें: अगर घर का वाई-फाई बारिश में स्लो हो जाए, तो राउटर की सेटिंग में 5GHz की जगह 2.4GHz बैंड से कनेक्ट करें। मोबाइल के इंटरनेट सेटिंग में जाकर बैंड को 5G से 4G में स्विच कर लें। इससे इंटरनेट स्पीड को बनाए रखने में मदद मिलेगी और अचानक से नेटवर्क गायब नहीं होगा।
पहले डाउनलोड कर लें: मौसम विभाग अगर भारी बारिश का अलर्ट दे, तो अपनी पसंदीदा मूवीज या सीरीज के एपिसोड पहले ही डाउनलोड करके रख लें।
राउटर की जगह: अपने ब्रॉडबैंड राउटर को खिड़की, सीलन वाली दीवारों या जमीन के एकदम पास न रखें।