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रिलायंस और मेटा की बड़ी तैयारी: गुजरात में बनेगा AI डेटा सेंटर, अगले दो वर्षों में बनकर तैयार होने की उम्मीद

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Wed, 10 Jun 2026 02:54 PM IST
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सार

Reliance Meta Data Centre: रिलायंस इंडस्ट्रीज और मेटा ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

Reliance and Meta Join Hands to Build Massive AI Data Centre in Gujarat
रिलायंस और मेटा की बड़ी तैयारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) ने एक बड़ी साझेदारी का एलान किया है। दोनों कंपनियां मिलकर गुजरात के जामनगर में एक अत्याधुनिक एआई (AI) तकनीक से लैस डेटा सेंटर बनाने जा रही हैं। यह प्रोजेक्ट तकनीक के क्षेत्र में भारत के लिए एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।

Reliance and Meta Join Hands to Build Massive AI Data Centre in Gujarat
रिलायंस और मेटा की बड़ी तैयारी - फोटो : अमर उजाला

प्रोजेक्ट की मुख्य बातें

  • क्षमता और समय: यह डेटा सेंटर 168 मेगावाट की क्षमता वाला होगा और इसके अगले दो वर्षों में बनकर तैयार होने की उम्मीद है।
  • मेटा का पहला खास डेटा सेंटर: यह भारत में मेटा का पहला बिल्ट-टू-सूट डेटा सेंटर होगा। इसका मतलब है कि इसे बिल्कुल उसी तरह डिजाइन किया जा रहा है, जैसी मेटा की जरूरतें हैं।
  • पर्यावरण के अनुकूल: इस डेटा सेंटर की सबसे खास बात यह है कि इसे पूरी तरह से ग्रीन एनर्जी से चलाया जाएगा। इसके अलावा, मशीनों की गर्मी कम करने के लिए समुद्र के खारे पानी को साफ करके इस्तेमाल किया जाएगा।
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रिलायंस और मेटा की बड़ी तैयारी - फोटो : अमर उजाला

भारत के लिए यह प्रोजेक्ट क्यों है अहम?

यह नया प्रोजेक्ट कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। दरअसल, साल 2020 में मेटा ने रिलायंस जियो में बड़ा निवेश किया था और यह डेटा सेंटर उसी साझेदारी को और मजबूत कर रहा है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य भारत को दुनिया भर में बड़े पैमाने पर एआई और तकनीक के बुनियादी ढांचे का एक प्रमुख केंद्र बनाना है।

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जामनगर में ही क्यों बन रहा है यह डेटा सेंटर?

गुजरात का जामनगर रिलायंस के लिए एक रणनीतिक जगह है, यही वजह है कि वह दुनिया के सबसे बड़े डेटा सेंटर कैंपस में से एक विकसित कर रहा है। AI जैसी एडवांस तकनीक को चलाने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत होती है और जामनगर में इसके पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं।

सबसे खास बात यह है कि यह डेटा सेंटर पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्युएबल ऊर्जा ) पर चलेगा और इसे ठंडा रखने के लिए समंदर के खारे पानी को साफ करके इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें लगने वाली बिजली और पानी का पूरा खर्च मेटा उठाएगा। इसके अलावा, मेटा की दुनिया की सबसे लंबी अंडरवाटर केबल की मदद से भारतीय यूजर्स को बेहतरीन स्पीड और क्वालिटी वाली इंटरनेट सर्विस मिलेगी।

दिग्गजों ने क्या कहा?

मेटा के फाउंडर और सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि "हमें रिलायंस के साथ मिलकर भारत में अपना पहला AI डेटा सेंटर बनाने पर गर्व है। जामनगर में बन रही यह वर्ल्ड-क्लास फैसिलिटी हमें विश्व स्तर पर अपने AI इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने में मदद करेगी, साथ ही यह भारत की अर्थव्यवस्था में हमारे लंबे निवेश को और मजबूत करेगी।"

रिलायंस इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि "मेटा के साथ यह साझेदारी भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बदलाव का पल है। मेटा जैसी ग्लोबल कंपनी के लिए भारत का पहला खास AI डेटा सेंटर बनाना यह साबित करता है कि भारत ग्लोबल AI क्रांति में सबसे आगे रहने के लिए तैयार है।"

वर्षों पुरानी है मेटा और रिलायंस की दोस्ती

मेटा और रिलायंस के रिश्ते काफी पुराने और मजबूत हैं। साल 2020 में मेटा ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 5.7 बिलियन डॉलर (करीब 43 हजार करोड़ रुपये) का एतिहासिक निवेश किया था। इसके जरिए भारत के छोटे व्यवसायों को डिजिटल बनाने में मदद मिली। अब यह नया डेटा सेंटर उनकी दोस्ती का अगला बड़ा कदम है।

पर्यावरण का भी रखा जाएगा पूरा ख्याल

AI डेटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली खपत करते हैं, इसलिए मेटा ने पर्यावरण का ध्यान रखते हुए भारत में लगभग 1 गीगावाट क्लीन एनर्जी के लिए दो कंपनियों के साथ करार भी किया है:

  • CleanMax: राजस्थान और कर्नाटक में 837 MW के नए सोलर और विंड (पवन ऊर्जा) प्रोजेक्ट्स।
  • Fourth Partner Energy: तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में 88 MW के नए सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स।

मेटा का ग्लोबल लक्ष्य है कि उसका सारा कामकाज 100% स्वच्छ और रिन्यूएबल ऊर्जा से चले और भारत में की गई ये साझेदारियां उसी लक्ष्य का हिस्सा हैं।

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