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AI: मिलिए एक ऐसे AI Tool से जो जानबूझकर करता है गलती, ताकि ज्यादा 'परफेक्ट' न लगे आप

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Tue, 28 Apr 2026 08:17 AM IST
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सार

Sinceerly AI Tool: आजकल AI इतने परफेक्ट ईमेल लिख रहा है कि सब मशीनी लगने लगा है। इस समस्या को दूर करने के लिए एक ऐसा नया एआई टूल आया है, जो मैसेज में जानबूझकर छोटी गलतियां करता है ताकि वह बिल्कुल किसी इंसान का लिखा हुआ लगे।

sinceerly anti grammarly ai tool adds intentional typos to emails hindi
गलतियो से बनाता है इंसानी छवी - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार

क्या आपने कभी गौर किया है कि आजकल मिलने वाले ईमेल कुछ ज्यादा ही साफ-सुथरे और परफेक्ट होते हैं? दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में सेकंडों के भीतर एकदम सटीक और बिना किसी गलती वाले मैसेज लिखे जा रहे हैं। लेकिन यहीं एक समस्या खड़ी हो गई है। जब कोई लेख या ईमेल जरूरत से ज्यादा 'क्लीन' लगता है, तो उस पर शक होने लगता है कि इसे किसी मशीन ने लिखा है। 
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इसी शक को दूर करने और AI के टेक्स्ट में इंसानी अहसास जगाने के लिए 'सिंसियरली' (Sinceerly) नाम का एक अनोखा ब्राउजर प्लगइन बाजार में आया है। जी हां, इसकी स्पेलिंग में जानबूझकर गलती की गई है। यह टूल आपके AI से लिखे टेक्स्ट में छोटे-मोटे टाइपिंग एरर और अजीबोगरीब चीजें जोड़ देता है, ताकि वह इंसानी लगे। यह सुनने में किसी मजाक जैसा लग सकता है, लेकिन यह लोगों की उस मनोवैज्ञानिक सच्चाई से जुड़ा है जहां इंसान को बिना किसी खामी वाली चीज से ज्यादा, स्वाभाविक और थोड़ी खामियों वाली चीजों पर ही भरोसा होता है।
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क्यों खटकती है बिना गलती वाली राइटिंग?
एक समय था जब हर कोई बिना किसी ग्रामर की गलती वाले परफेक्ट ईमेल लिखना चाहता था। लेकिन आज के समय में बिल्कुल सटीक ग्रामर ही इस बात का सुबूत बन जाती है कि इसे इंसान ने नहीं लिखा है। एआई से जनरेट किए गए टेक्स्ट में एक खास तरह की लय होती है, जो बहुत ही संतुलित और पॉलिश की हुई लगती है। यह पढ़ने में तो अच्छी लगती है, लेकिन कभी-कभी हद से ज्यादा अच्छी लगना ही खटकने लगता है। यही कारण है कि अब इस तरह के नए टूल्स सामने आ रहे हैं, जो एआई के उस परफेक्ट पैटर्न को थोड़ा सा तोड़ देते हैं ताकि पढ़ने वाले को लगे कि दूसरी तरफ वाकई कोई असली इंसान बैठा है।

एक छात्र के दिमाग की है यह 'एंटी-ग्रामरली' उपज
इस अनोखे आइडिया ने तब सुर्खियां बटोरीं जब हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के एक छात्र बेन होर्विट्ज़ ने इसे तैयार किया। कई लोग इसे 'एंटी-ग्रामरली' (Anti-Grammarly) टूल कहकर भी बुला रहे हैं। इस टूल को बनाने का लक्ष्य बहुत ही सीधा और लोगों की आम जिंदगी से जुड़ा हुआ था। दरअसल, एआई की राइटिंग इतनी ज्यादा बेदाग हो चुकी थी कि अब हर किसी का मैसेज एक जैसा ही लगने लगा था। इस टूल का काम एआई के टेक्स्ट को फिर से लिखकर उसमें कुछ छोटी मानवीय गलतियां डालना है। खासकर आज के दौर में जब किसी भी परफेक्ट लिखे ईमेल को देखते ही लोग यह मान लेते हैं कि इसे एआई ने लिखा है, तब यह टूल उस टेक्स्ट में इंसानी जान फूंकने का काम करता है।

टूल के मजेदार मोड्स जो इसे बनाते हैं खास
यह टूल सिर्फ कहीं भी बिना सोचे-समझे गलतियां नहीं डालता, बल्कि यह मैसेज के लहजे (टोन) के साथ भी खेलता है। इसके अंदर कई अलग-अलग मोड दिए गए हैं। इसका एक मोड आपके मैसेज को काफी हद तक साफ-सुथरा रखता है, बस उसमें एकाध छोटी गलती डाल देता है। वहीं इसका दूसरा मोड राइटिंग को थोड़ा और अनौपचारिक (कैजुअल) बना देता है, जैसे कि दो मीटिंग्स के बीच जल्दबाजी में भेजा गया कोई मैसेज हो। इसके अलावा इसमें एक ऐसा मोड भी है जो मैसेज को बहुत ही छोटा और सीधा रखता है, जिससे बिल्कुल वैसी ही फीलिंग आती है जैसे कि इसे फोन से टाइप करके भेजा गया हो। इसका यह खास अंदाज ही इसे इस्तेमाल करने में बहुत मजेदार बनाता है।
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