'दोषी कोई और, सजा 15 करोड़ यूजर्स को': NEET परीक्षा से पहले Telegram बैन होने पर भड़के सीईओ पावेल डुरोव
NEET-UG परीक्षा से पहले भारत में टेलीग्राम (Telegram) पर लगाई गई अस्थायी रोक को लेकर कंपनी के सीईओ पावेल डुरोव ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों की गलती की वजह से करोड़ों आम यूजर्स प्रभावित होंगे, जबकि परीक्षा पेपर लीक की असली समस्या जस की तस बनी हुई है।
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विस्तार
डुरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर परीक्षा के प्रश्नपत्र साझा करने की वजह से पूरे प्लेटफॉर्म को निशाना बनाना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, इस कदम से भारत के 15 करोड़ से अधिक सामान्य टेलीग्राम उपयोगकर्ता प्रभावित होंगे, जबकि पेपर लीक की गतिविधियां दूसरे एप्स पर चली जाएंगी।
क्या है पूरा मामला?
- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) 21 जून को NEET-UG परीक्षा का पुनर्निर्धारित आयोजन करने जा रही है। NTA की सिफारिश पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत टेलीग्राम की सेवाओं पर 22 जून 2026 तक अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है।
- इसके अलावा, टेलीग्राम को भारत में सभी उपयोगकर्ताओं के लिए मैसेज एडिट करने की सुविधा 30 जून तक बंद करने का भी आदेश दिया गया है।
- NEET एग्जाम कंडक्ट कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अनुसार, टेलीग्राम पर कई संगठित गिरोह सक्रिय थे जो छात्रों और उनके अभिभावकों से फर्जी पेपर के बदले हजारों से लाखों रुपये की मांग कर रहे थे।
- एनटीए ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि सोशल मीडिया और टेलीग्राम पर "PAPER LEAKED DETT", "Re-NEET 2026" और "Private Mafia" जैसे नामों से फर्जी चैनल बनाकर परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक होने की अफवाहें फैलाई जा रही थीं।
India’s IT ministry banned Telegram for one week because some users shared leaked exam questions.
— Pavel Durov (@durov) June 16, 2026
This punishes 150M+ ordinary Telegram users in India — not the insiders who leaked the exam materials.
And the ban hasn't stopped anything. The leaks just moved to other apps. https://t.co/CzQWN4mXfb
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने भी उठाए सवाल
डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने भी इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। संस्था का कहना है कि धारा 69A और उससे जुड़े नियम सरकार को किसी विशेष जानकारी या कंटेंट को ब्लॉक करने की अनुमति देते हैं, लेकिन पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करने या किसी कंपनी को अपने उत्पाद की विशेषताएं बदलने का आदेश देने का अधिकार स्पष्ट रूप से नहीं देते। आईएफएफ ने यह भी सवाल उठाया कि मैसेज एडिटिंग फीचर बंद करने का कानूनी आधार क्या है और क्या इसके लिए कोई स्पष्ट अधिकार मौजूद है।छात्रों पर पड़ सकता है असर
- संस्था के मुताबिक, NEET की तैयारी के अंतिम दिनों में हजारों छात्र टेलीग्राम का उपयोग स्टडी ग्रुप, नोट्स, डाउट क्लियरिंग और शैक्षणिक सामग्री साझा करने के लिए करते हैं। ऐसे समय में पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करने से बड़ी संख्या में छात्रों को परेशानी हो सकती है।
- आईएफएफ का तर्क है कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की समस्या का स्रोत सिस्टम के भीतर हो सकता है, इसलिए केवल टेलीग्राम पर कार्रवाई करने से मूल समस्या का समाधान नहीं होगा।
सरकार से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग
- आईएफएफ ने सरकार से मांग की है कि टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आदेश और NTA की सिफारिश को सार्वजनिक किया जाए। संस्था ने यह भी पूछा है कि क्या टेलीग्राम को नियमों के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था।
- फिलहाल टेलीग्राम ने सरकार के आदेश पर कोई आधिकारिक कानूनी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सीईओ पावेल डुरोव का बयान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना चुका है। अब नजर इस बात पर है कि 22 जून के बाद इस प्रतिबंध को हटाया जाता है या नहीं।