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Trai: स्पीड कम मिली तो कंपनियों पर होगी कार्रवाई, 4G-5G के लिए नए नियम लाने की तैयारी में TRAI, जानें प्रस्ताव
Wed, 05 Aug 2026 09:58 PM IST
जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति शुक्ला
Updated Wed, 05 Aug 2026 09:58 PM IST
सार
Trai Draft Rules: ट्राई ने एक नया ड्राफ्ट नियम जारी किया है, जिनमें टेलीकॉम कंपनियों को नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी अपनाने और अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग शुल्क लेने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। आइए जानते हैं इसका ग्राहकों पर क्या असर पड़ सकता है।
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टेलीकॉम रेगुलेटर ऑफ इंडिया
- फोटो : trai.gov.in
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विस्तार
Network Slicing Technology: टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI ने बुधवार को सर्विस क्वालिटी से जुड़े नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इन नियमों में मोबाइल कंपनियों को नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी अपनाने और 4G, 5G जैसी अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग-अलग शुल्क लेने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया है। अगर यह नियम लागू होते हैं, तो मोबाइल इंटरनेट और टेलीकॉम सेवाओं की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी क्या है ?
कंपनियां ले सकेंगी अलग-अलग चार्ज
Trai ने रखी यह बड़ी शर्त
ग्राहकों को देनी होगी जानकारी
नेटवर्क क्षमता बढ़ाने का भी प्रस्ताव
एयरटेल ने शुरू की है नेटवर्क स्लाइसिंग
कब तक भेज सकते हैं सुझाव?
Trai ने ड्राफ्ट नियमों पर सुझाव और राय भेजने की आखिरी तारीख 26 अगस्त तय की है। वहीं, काउंटर-कमेंट्स यानी जवाबी राय 7 सितंबर तक भेजी जा सकती है।
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
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नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी क्या है ?
- नेटवर्क स्लाइसिंग ऐसी तकनीक है, जिसमें एक ही नेटवर्क को कई अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा सकता है। हर हिस्से को किसी खास सेवा या ग्राहक समूह के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
- इस तकनीक की मदद से कंपनियां 4G, 5G और दूसरी सेवाओं के लिए अलग-अलग नेटवर्क क्षमता और स्पीड उपलब्ध करा सकेंगी।
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कंपनियां ले सकेंगी अलग-अलग चार्ज
- हालांकि ट्राई ने मौजूदा नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसमे सभी ग्राहकों को मिलने वाली औसत डाउनलोड और अपलोड स्पीड की जगह हर टैरिफ प्लान के लिए टेक्नोलॉजी के हिसाब से डाउनलोड और अपलोड स्पीड को शामिल किया जाएगा।
- इस बदलाव के बाद टेलीकॉम कंपनियां 4G और 5G सेवाओं के लिए अलग-अलग कीमत तय कर सकेंगी। फिलहाल ग्राहक दोनों सेवाओं के लिए लगभग एक जैसी कीमत चुकाते हैं।
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Trai ने रखी यह बड़ी शर्त
- रेगुलेटर ने साफ कहा है कि किसी भी नए नेटवर्क स्लाइस को लॉन्च करने से पहले ऑपरेटर के पास पर्याप्त नेटवर्क क्षमता होनी चाहिए।
- इसके अलावा, अगर किसी प्लान में वादा की गई डाउनलोड स्पीड का 80 प्रतिशत हिस्सा भी ग्राहकों को नहीं मिलता है, तो उस प्लान को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
ग्राहकों को देनी होगी जानकारी
- प्रस्तावित नियमों के अनुसार, अगर किसी ग्राहक को तय स्पीड नहीं मिलती है, तो टेलीकॉम कंपनियों को इसकी जानकारी ग्राहकों को देनी होगी।
- इसके साथ ही, अगली कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करने से पहले कंपनियों को जरूरी सुधारात्मक कदम भी उठाने होंगे।
नेटवर्क क्षमता बढ़ाने का भी प्रस्ताव
- ट्राई ने कहा है कि नेटवर्क स्लाइसिंग के दौरान फिजिकल रिसोर्स ब्लॉक (PRB) का इस्तेमाल 80 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
- अगर किसी महीने लगातार पांच दिनों तक PRB का इस्तेमाल 80 प्रतिशत से अधिक रहता है, तो कंपनियों को समय रहते नेटवर्क क्षमता बढ़ानी होगी।
एयरटेल ने शुरू की है नेटवर्क स्लाइसिंग
- Trai का यह कदम भारती एयरटेल की हालिया नेटवर्क स्लाइसिंग पहल के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।
- हालांकि, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों ने इस तकनीक का समर्थन नहीं किया है। उनका मानना है कि इससे ग्राहकों के बीच भेदभाव की स्थिति पैदा हो सकती है।
कब तक भेज सकते हैं सुझाव?
Trai ने ड्राफ्ट नियमों पर सुझाव और राय भेजने की आखिरी तारीख 26 अगस्त तय की है। वहीं, काउंटर-कमेंट्स यानी जवाबी राय 7 सितंबर तक भेजी जा सकती है।
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
- अगर ये नियम लागू होते हैं, तो आने वाले समय में ग्राहकों को 4G और 5G सेवाओं के लिए अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ सकती है।
- हालांकि, इसके बदले उन्हें बेहतर स्पीड और ज्यादा स्थिर नेटवर्क अनुभव मिलने की संभावना भी है। फिलहाल, अंतिम फैसला सुझावों और उद्योग जगत की प्रतिक्रिया के बाद लिया जाएगा।