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स्पैम लेबलिंग विवाद पर Truecaller का नया बयान: सीईओ बोले- सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर निकालेंगे समाधान
Tue, 14 Jul 2026 05:44 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 14 Jul 2026 05:44 PM IST
सार
स्पैम कॉल और मैसेज की पहचान को लेकर चल रहे विवाद के बीच ट्रूकॉलर (Truecaller) के सीईओ ने कहा है कि कंपनी का फोकस टकराव नहीं, बल्कि समाधान पर है। उन्होंने ट्राई (TRAI), MeitY और दूरसंचार विभाग (DoT) के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई, साथ ही ट्राई के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने पर भी अपनी राय रखी।
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स्पैम लेबलिंग मामले में ट्रूकॉलर सीईओ ने दिया नया बयान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश में स्पैम कॉल और मैसेज की पहचान को लेकर चल रही बहस के बीच ट्रूकॉलर ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। कंपनी के सीईओ रिशित झुनझुनवाला ने कहा है कि उनका उद्देश्य किसी तरह का टकराव नहीं, बल्कि संबंधित सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर ऐसा समाधान तैयार करना है, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर सुरक्षा मिल सके।
उन्होंने कहा कि ट्रूकॉलर भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और दूरसंचार विभाग (DoT) के साथ रचनात्मक बातचीत के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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उन्होंने कहा कि कंपनी का तत्काल फोकस सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ रचनात्मक संवाद बनाए रखना है। ट्रूकॉलर पहले ही परामर्श प्रक्रिया के दौरान अपने सुझाव साझा कर चुका है और आगे भी ट्राई, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग तथा अन्य हितधारकों के साथ मिलकर ऐसा समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे उपभोक्ता सुरक्षा भी मजबूत हो और पारदर्शिता भी बनी रहे।
उनके मुताबिक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और उनसे जुड़ी सेवाओं का नियमन पहले से ही मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में है। ऐसे में ट्राई की शक्तियों का विस्तार नियामकीय सीमाओं के ओवरलैप का कारण बन सकता है।
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उन्होंने कहा कि ट्रूकॉलर भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और दूरसंचार विभाग (DoT) के साथ रचनात्मक बातचीत के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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'स्पैम खत्म करना हमारा भी लक्ष्य'
पीटीआई से बातचीत में ट्रूकॉलर के सीईओ ने कहा कि स्पैम कॉल खत्म करने के उद्देश्य पर कंपनी और ट्राई के बीच कोई मतभेद नहीं है। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं को कम जानकारी दिखाना और स्पैम कॉल कम करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।
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उन्होंने कहा कि कंपनी का तत्काल फोकस सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ रचनात्मक संवाद बनाए रखना है। ट्रूकॉलर पहले ही परामर्श प्रक्रिया के दौरान अपने सुझाव साझा कर चुका है और आगे भी ट्राई, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग तथा अन्य हितधारकों के साथ मिलकर ऐसा समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे उपभोक्ता सुरक्षा भी मजबूत हो और पारदर्शिता भी बनी रहे।
ट्राई के अधिकार क्षेत्र पर भी जताई चिंता
ट्रूकॉलर के सीईओ रिशित झुनझुनवाला ने यह भी कहा कि यदि ट्राई के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया जाता है, तो यह उस नियामकीय व्यवस्था में दखल होगा, जो फिलहाल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के दायरे में आती है।उनके मुताबिक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और उनसे जुड़ी सेवाओं का नियमन पहले से ही मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में है। ऐसे में ट्राई की शक्तियों का विस्तार नियामकीय सीमाओं के ओवरलैप का कारण बन सकता है।
क्या है स्पैम लेबलिंग विवाद?
- यह विवाद 1600 और 140 सीरीज के नंबरों से आने वाले कॉल से संबंधित है। ट्राई के मुताबिक, 1600 सीरीज के नंबर बैंकों, बीमा कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी विभागों जैसी विनियमित संस्थाओं की सेवा और लेनदेन संबंधी कॉल के लिए तय किए गए हैं। वहीं, 140 नंबर सीरीज का इस्तेमाल पंजीकृत टेलीमार्केटर्स द्वारा प्रमोशनल कॉल्स के लिए किया जाता है। ट्राई का कहना है कि ट्रूकॉलर इन नंबर सीरीज से आने वाले कॉल्स को स्पैम बताकर ब्लॉक कर देता है जिसके चलते कई तरह की सेवाओं में बाधा आती है।
- पिछले शुक्रवार ट्राई ने साफ कहा था कि 1600 नंबर सीरीज से आने वाली कॉल्स को कोई भी एप ब्लॉक नहीं कर सकता। यह नंबर सीरीज सरकार और विनियमित संस्थाओं द्वारा नागरिकों से आधिकारिक संवाद के लिए इस्तेमाल की जाती है।
- हालांकि, ट्रूकॉलर का दावा है कि साइबर ठग और स्पैमर्स 1600 और 140 सीरीज के नंबरों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। कंपनी के अनुसार, उसके प्लेटफॉर्म पर हर दिन करीब 5.25 लाख यूजर्स ऐसे नंबरों को स्पैम के रूप में रिपोर्ट करते हैं। रिशित झुनझुनवाला के मुताबिक, इन नंबरों से हर दिन आने वाले करीब 5.1 करोड़ कॉल का लोग जवाब नहीं देते हैं।
- ट्रूकॉलर के सीईओ ने आंकड़ों को साझा करते हुए बताया था कि पिछले 8 महीनों में ट्रूकॉलर के यूजर्स ने 140 सीरीज के ऐसे 81% कॉल्स और 1600 सीरीज के ऐसे 79% का जवाब ही नहीं दिया। उन्होंने बताया था कि इन दोनों नंबरों से आने वाले कॉल्स को अक्तूबर 2025 से बाद से ब्लॉक करने की डिमांड 208% बढ़ गई है।