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जेन जी का दर्द..: चैटबॉट ले रहा इंटरव्यू, अंधेरी खाई में रिज्यूमे भेजने जैसा हाल; क्यों नहीं मिल रहा जवाब?
Sat, 31 Oct 2026 10:10 AM IST
निर्मल कांत
कैली होल्टरमैन, द न्यूयॉर्क टाइम्स, सिएटल/ऑस्टिन।
कैली होल्टरमैन, द न्यूयॉर्क टाइम्स, सिएटल/ऑस्टिन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 31 Oct 2026 10:10 AM IST
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एआई से इंटरव्यू, नहीं मिल रही नौकरियां
- फोटो :
एआई-अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
जीव विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल करने वाली 22 वर्षीय एक छात्रा ने अब तक 511 नौकरियों के लिए आवेदन किया है। हाल ही में होल फूड्स नाम की कंपनी में जब उसका इंटरव्यू हुआ, तो स्क्रीन के दूसरी तरफ कोई इन्सानी मैनेजर नहीं, बल्कि 'सेज' नाम का एक एआई चैटबॉट बैठा था।चैटबॉट ने कुछ सवाल पूछे और कुछ ही देर में उसे रिजेक्ट कर दिया। टेक्सास के 23 वर्षीय एक युवक को दफ्तर में एडमिन की नौकरी चाहिए। लेकिन हर बार कंपनी उससे कहती है कि वह अपने कमरे में अकेले बैठकर कैमरे के सामने सवालों के जवाब रिकॉर्ड करके भेज दे। कैंसस के एक अन्य 23 वर्षीय स्नातक को जब पैरालैगल (कानूनी सहायक) की नौकरी नहीं मिली, तो उसने फास्ट-फूड रेस्तरां में फोन किया। कॉल रिसीव करने वाली आवाज किसी इन्सान की नहीं, बल्कि एक एआई वॉयस एजेंट की थी।
द न्यू यॉर्क टाइम्स ने जब अमेरिका में हाल ही में कॉलेज पूरा करने वाले जेनरेशन जी के युवाओं से नौकरी ढूंढने के उनके मौजूदा अनुभवों के बारे में पूछा, तो सामने आई कहानी केवल बेरोजगारी की नहीं, बल्कि एक ऐसे अलगाव, अकेलेपन और तकनीक की निर्दयी दीवार की है जिसने युवाओं के भरोसे को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है।
हम चीख रहे हैं कि कोई भी काम दे दो, पर दूसरी तरफ सन्नाटा
युवाओं ने नौकरी खोजने की इस पूरी प्रक्रिया को द वॉइड ( यानी एक अंधेरी शून्य खाई) नाम दिया है। सिएटल की 24 वर्षीया ग्रेस डनिंग, जिन्होंने न्यूरोसाइंस में डिग्री हासिल की है, बताती हैं...हम चिल्लाकर कह रहे हैं कि मुझे नौकरी दे दो, तुम जो काम दोगे मैं करने को तैयार हूं लेकिन 90% मामलों में जवाब में सिर्फ सन्नाटा मिलता है। ऐसा लगता है कि हम किसी ऐसी दीवार से बात कर रहे हैं जो सुन ही नहीं रही। कोई इंसानी चेहरा तो दूर, किसी की आवाज तक सुनाई नहीं देती।"
90% कंपनियां कर रहीं एआई का इस्तेमाल
आजकल की कॉर्पोरेट दुनिया में नौकरी पाने का तरीका पूरी तरह बदल चुका है, लेकिन यह बदलाव युवाओं के लिए दुःस्वप्न बन गया है। जॉब पोर्टल्स पर हजारों ऐसी वेकेंसी लिस्टेड हैं जो वास्तव में हैं ही नहीं या भरी जा चुकी हैं। कंपनियां केवल अपना बाजार प्रभाव दिखाने के लिए विज्ञापन पोस्ट रखती हैं।
अनुमानों के मुताबिक 90% कंपनियां 'एप्लीकेंट ट्रैकिंग सिस्टम' यानी एआई सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही हैं। यह सॉफ्टवेयर रिज्यूमे को स्कैन करता है और किसी इंसान के देखने से पहले ही 98% आवेदनों को रिजेक्ट कर देता है।
दो मिनट में रिजेक्शन
29 वर्षीया लिडिया क्रिम ने एक एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट की नौकरी के लिए घंटों लगाकर विस्तृत सवालों के जवाब लिखे। सबमिट बटन दबाने के ठीक 2 मिनट बाद उनके पास रिजेक्शन का ऑटोमेटेड ईमेल आ गया। लिडिया कहती हैं-मुझे किसी इंसान ने खारिज नहीं किया, बल्कि एक मशीन ने मेरी मेहनत पर पानी फेर दिया।
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अब हैंडशेक से नौकरियां नहीं मिलतीं
पुराने दौर में सीधे मैनेजर से मुलाकात के बाद साक्षात्कार हो जाते थे लेकिन अब सीधे कहा जाता है-वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई करो। बाद में कैमरे के सामने अकेले बैठकर 'वन-वे वीडियो इंटरव्यू' देना या एआई अवतार से बात कर