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Telenor से Airtel तक: सिर्फ 5G नहीं, 'सॉवरेन क्लाउड' और AI डेटा सेंटर है टेलीकॉम कंपनियों का नया हथियार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Fri, 08 May 2026 04:16 PM IST
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सार
Sovereign Cloud: दुनियाभर की टेलीकॉम कंपनियां अब सिर्फ 5G और ब्रॉडबैंड तक सीमित नहीं रहना चाहती हैं। टेलीनॉर से लेकर भारती एयरटेल और जियो तक, सभी का नया फोकस सॉवरेन क्लाउड और एआई (AI) डेटा सेंटर्स पर है। डेटा सुरक्षा और कमाई बढ़ाने के लिए यह उनका अगला सबसे बड़ा दांव है।
डेटा सेंटर (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
टेलीकॉम सेक्टर अब एक नए दौर में कदम रख रहा है। सॉवरेन क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई डेटा सेंटर और डिजिटल संप्रभुता अब 5G नेटवर्क जितने ही अहम हो गए हैं। नॉर्वे की दिग्गज कंपनी टेलीनॉर (Telenor) ने हाल ही में एक नई सॉवरेन क्लाउड कंपनी की शुरुआत की है। कंपनी ने इसके पीछे बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता, विदेशी कंपनियों पर निर्भरता और डेटा को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रखने की जरूरत को मुख्य कारण बताया है। इसी तर्ज पर, बीटी इंटरनेशनल (BT International) ने भी यूरोप में सॉवरेन क्लाउड की पहुंच बढ़ाने के लिए STACKIT के साथ हाथ मिलाया है।
विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करने की तैयारी
पहले क्लाउड का मतलब सिर्फ डेटा स्टोर करना माना जाता था। अब यह डेटा के नियंत्रण, संचालन और अधिकार क्षेत्र से जुड़ गया है। अमेजॉन (AWS), माइक्रोसॉफ्ट (Azure) और गूगल जैसी विदेशी कंपनियों के क्लाउड सिस्टम पर बैंकिंग, हेल्थकेयर और सरकारी सेवाओं की भारी निर्भरता है। अब देश अपने संवेदनशील डेटा को विदेशी बुनियादी ढांचे पर रखने से बच रहे हैं। यूरोप अब क्लाउड को टेलीकॉम नेटवर्क और पावर ग्रिड जैसी अहम राष्ट्रीय संपत्ति मान रहा है।
एआई (AI) की बढ़ती ताकत और टेलीकॉम का फायदा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने सॉवरेन क्लाउड की जरूरत को और तेज कर दिया है। एआई सिस्टम को विशाल डेटा सेंटर और तेज प्रोसेसिंग की दरकार होती है। टेलीनॉर ने नॉर्वे में स्थानीय एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम शुरू कर दिया है। टेलीकॉम कंपनियों के पास पहले से ही फाइबर नेटवर्क और बड़े ग्राहकों का आधार मौजूद है। 5G और स्पेक्ट्रम में अरबों के निवेश के बाद सिर्फ मोबाइल टैरिफ से कमाई करना काफी नहीं है। इसलिए वे खुद को एआई और क्लाउड होस्टिंग जैसी बड़ी और मुनाफे वाली सेवाओं में ढाल रही हैं।
भारत भी बढ़ा डिजिटल संप्रभुता की ओर
यूरोप जहां कड़े नियमों के जरिए इस ओर बढ़ रहा है, वहीं भारत डेटा लोकलाइजेशन और स्वदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर आगे जा रहा है। भारती एयरटेल (Bharti Airtel) लगातार सॉवरेन क्लाउड और सुरक्षित डेटा अधिकार की अहमियत पर जोर दे रही है। एयरटेल की सब्सिडियरी कंपनी Nxtra देशभर में डेटा सेंटर स्थापित कर रही है, जो भविष्य की एआई और क्लाउड जरूरतों को पूरा करेगी।
रिलायंस जियो और अडानी की बड़ी तैयारी
दूसरी तरफ, रिलायंस जियो (Reliance Jio) भी मोबाइल नेटवर्क से आगे बढ़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्लाउड सेवाओं का लगातार विस्तार कर रहा है। हाल ही में कंपनी ने जानकारी दी है कि जियो एआई क्लाउड (JioAICloud) के अब 4.2 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हो चुके हैं। भारत में सिर्फ टेलीकॉम कंपनियां ही नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र भी इस रेस में शामिल है। अडानी समूह ने सॉवरेन एआई और ऊर्जा क्षेत्र में 100 अरब डॉलर के भारी निवेश का एलान किया है। उनकी कंपनी अडानीकनेक्स (AdaniConneX) पूरे भारत में विशाल डेटा सेंटर्स का जाल बिछा रही है। आने वाले समय में टेलीकॉम सेक्टर की बादशाहत इस बात से तय होगी कि एआई सिस्टम और राष्ट्रीय डिजिटल डेटा का नियंत्रण किसके हाथों में है।
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विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करने की तैयारी
पहले क्लाउड का मतलब सिर्फ डेटा स्टोर करना माना जाता था। अब यह डेटा के नियंत्रण, संचालन और अधिकार क्षेत्र से जुड़ गया है। अमेजॉन (AWS), माइक्रोसॉफ्ट (Azure) और गूगल जैसी विदेशी कंपनियों के क्लाउड सिस्टम पर बैंकिंग, हेल्थकेयर और सरकारी सेवाओं की भारी निर्भरता है। अब देश अपने संवेदनशील डेटा को विदेशी बुनियादी ढांचे पर रखने से बच रहे हैं। यूरोप अब क्लाउड को टेलीकॉम नेटवर्क और पावर ग्रिड जैसी अहम राष्ट्रीय संपत्ति मान रहा है।
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एआई (AI) की बढ़ती ताकत और टेलीकॉम का फायदा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने सॉवरेन क्लाउड की जरूरत को और तेज कर दिया है। एआई सिस्टम को विशाल डेटा सेंटर और तेज प्रोसेसिंग की दरकार होती है। टेलीनॉर ने नॉर्वे में स्थानीय एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम शुरू कर दिया है। टेलीकॉम कंपनियों के पास पहले से ही फाइबर नेटवर्क और बड़े ग्राहकों का आधार मौजूद है। 5G और स्पेक्ट्रम में अरबों के निवेश के बाद सिर्फ मोबाइल टैरिफ से कमाई करना काफी नहीं है। इसलिए वे खुद को एआई और क्लाउड होस्टिंग जैसी बड़ी और मुनाफे वाली सेवाओं में ढाल रही हैं।
भारत भी बढ़ा डिजिटल संप्रभुता की ओर
यूरोप जहां कड़े नियमों के जरिए इस ओर बढ़ रहा है, वहीं भारत डेटा लोकलाइजेशन और स्वदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर आगे जा रहा है। भारती एयरटेल (Bharti Airtel) लगातार सॉवरेन क्लाउड और सुरक्षित डेटा अधिकार की अहमियत पर जोर दे रही है। एयरटेल की सब्सिडियरी कंपनी Nxtra देशभर में डेटा सेंटर स्थापित कर रही है, जो भविष्य की एआई और क्लाउड जरूरतों को पूरा करेगी।
रिलायंस जियो और अडानी की बड़ी तैयारी
दूसरी तरफ, रिलायंस जियो (Reliance Jio) भी मोबाइल नेटवर्क से आगे बढ़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्लाउड सेवाओं का लगातार विस्तार कर रहा है। हाल ही में कंपनी ने जानकारी दी है कि जियो एआई क्लाउड (JioAICloud) के अब 4.2 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हो चुके हैं। भारत में सिर्फ टेलीकॉम कंपनियां ही नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र भी इस रेस में शामिल है। अडानी समूह ने सॉवरेन एआई और ऊर्जा क्षेत्र में 100 अरब डॉलर के भारी निवेश का एलान किया है। उनकी कंपनी अडानीकनेक्स (AdaniConneX) पूरे भारत में विशाल डेटा सेंटर्स का जाल बिछा रही है। आने वाले समय में टेलीकॉम सेक्टर की बादशाहत इस बात से तय होगी कि एआई सिस्टम और राष्ट्रीय डिजिटल डेटा का नियंत्रण किसके हाथों में है।