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IPL 2026: AI और CorelDRAW से बन रहे आईपीएल के हूबहू नकली टिकट! आपके साथ न हो ठगी, बचने के लिए अपनाएं ये तरीके

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Mon, 11 May 2026 07:18 PM IST
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सार

Fake IPL Tickets: आईपीएल 2026 के रोमांच के बीच एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया। लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) और रॉयल चैलेंजर्स बंगलूरू (RCB) के मैच में ठगों ने IPL के हुबहू नकली टिकट बना डाले। स्कैमर्स ने ये टिकट एआई और एडवांस सॉफ्टवेयर की मदद से तैयार किए। ये मामले क्या है और आपके साथ ऐसा न हो इसलिए हमने इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है कि आप असली और नकली टिकट के बीच का फर्क कैसे कर सकते हैं।

How to Spot Fake IPL 2026 Tickets: Beware of AI & CorelDRAW counterfeits before booking
IPL 2026 Fake Tickets - फोटो : AI
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विस्तार

आज के समय में चैटजीपीटी जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल का इस्तेमाल पढ़ाई, कोडिंग और ऑफिस के कामों के लिए खूब हो रहा है। लेकिन साइबर अपराधी और ठग भी अब इन आधुनिक तकनीकों का गलत इस्तेमाल करने लगे हैं। उत्तर प्रदेश में एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक गैंग ने एआई और ग्राफिक डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके IPL 2026 के हुबहू नकली टिकट बना डाले। पुलिस ने इस मामले में छत्तीसगढ़ के रहने वाले चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

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नकली टिकट बनाने के लिए एआई का सहारा

इस गैंग ने असली जैसे दिखने वाले नकली टिकट तैयार करने के लिए आधुनिक तकनीक का बेहद शातिर तरीके से इस्तेमाल किया। इसकी शुरुआत सोशल मीडिया से हुई, जहां से उन्होंने असली IPL टिकटों की तस्वीरें और नमूने जुटाए। इसके बाद, टिकट के सटीक लेआउट और उसकी लंबाई-चौड़ाई (डायमेंशन) को हुबहू मैच करने के लिए चैटजीपीटी जैसे एआई टूल की मदद ली गई।

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जब डिजाइन की बारीकियां तय हो गईं तो उन्होंने ग्राफिक डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर CorelDRAW का उपयोग करके कागज की क्वालिटी और डिजाइन को असली जैसा रूप दिया और नकली पास व टिकट प्रिंट कर लिए। पुलिस जांच में यह भी पता चला कि गैंग के एक सदस्य ने इस पूरी जालसाजी और डिजाइनिंग की प्रक्रिया को यूट्यूब ट्यूटोरियल्स के जरिए सीखा था।


कैसे हुआ इस हाई-टेक ठगी का खुलासा?

जालसाजी के इस खेल का पर्दाफाश लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम में तब हुआ, जब लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) और रॉयल चैलेंजर्स बंगलूरू (RCB) के बीच मुकाबला होना था। ठगी की शुरुआत तब हुई जब ओरई के रहने वाले एक क्रिकेट फैन ने इस गैंग के झांसे में आकर 1 हजार रुपये में एक टिकट खरीदा। हालांकि, जब वह स्टेडियम के एंट्री गेट पर पहुंचा तो सुरक्षा और वेरिफिकेशन टीम के स्कैनर ने टिकट के बारकोड को रीड करने से मना कर दिया।


बारकोड स्कैन न होने पर जब टिकट की गहनता से जांच की गई तो इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। पीड़ित ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। इसके बाद जांच टीम ने उस UPI पेमेंट का पीछा किया जिसके जरिए टिकट के पैसे ट्रांसफर किए गए थे। डिजिटल फुटप्रिंट्स और बैंकिंग ट्रांजैक्शन की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस सीधे आरोपियों तक जा पहुंची।

दिलचस्प बात यह है कि इस गैंग ने दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में भी ऐसी ही कोशिश की थी। लेकिन वहां क्रिकेट प्रेमी इनसे ज्यादा सतर्क निकले। उस वक्त टिकट की खराब प्रिंटिंग क्वालिटी और बारकोड में नजर आ रही गड़बड़ियों के कारण खरीदारों ने टिकट लेने से मना कर दिया था। इसके चलते वे वहां अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए थे।


आरोपियों की गिरफ्तारी और बरामदगी

पुलिस ने इस गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ के रहने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान मास्टरमाइंड श्रीकांत बोरकर के साथ राजेंद्र चौधरी, विश्वजीत साहू और नूतन कुमार साहू के रूप में हुई है। इन आरोपियों के पास से ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाला हाई-टेक साजो-सामान बरामद किया गया है।

इसमें एक लैपटॉप, चार स्मार्टफोन और 15 नकली आईपीएल टिकट शामिल हैं। इसके अलावा, पुलिस ने उनके पास से खास तरह की जीएसएम पेपर शीट, दो पेपर कटर, और लखनऊ आने-जाने में इस्तेमाल की गई एक कार भी जब्त की है।

तलाशी के दौरान इनके पास से कई बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, पैन कार्ड और आधार कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह गैंग मुख्य रूप से उन हाई-प्रोफाइल आईपीएल मैचों को निशाना बनाता था जहां टिकटों की मांग सबसे ज्यादा होती थी।

स्टेडियम के बाहर टिकट के लिए बेताब फैंस का फायदा उठाकर ये लोग आसानी से अपनी जालसाजी को अंजाम दे देते थे। तकनीक के इस गलत इस्तेमाल ने एक बड़ी चेतावनी दी है कि अब एआई टूल्स का एक्सेस अपराधियों तक भी पहुंच गया है। ऐसे में आम जनता को और भी ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
 

IPL में असली और नकली टिकट की पहचान कैसे करें?

2026 में असली और नकली IPL टिकटों के बीच फर्क करना बहुत जरूरी हो गया है। स्कैमर्स अब एआई और एडवांस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके हूबहू असली दिखने वाले नकली टिकट बना रहे हैं। इसे देखते हुए, बंगलूरू जैसे ज्यादातर स्टेडियम अब पूरी तरह से डिजिटल और QR-कोड वाले सिस्टम पर शिफ्ट हो गए हैं। अगर आप भी मैच देखने जाने वाले हैं तो अपने टिकट को वेरिफाई करने का आसान तरीका यहां बताया गया है:


1. डिजिटल टिकट (ई-टिकट) कैसे चेक करें?

डिजिटल टिकट या ई-टिकट की असलियत जांचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप इन्हें केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स जैसे BookMyShow, District या सीधे IPL टीम की वेबसाइट से ही खरीदें। टिकट खरीदते समय इसके QR कोड पर विशेष ध्यान दें। असली टिकटों के डायनामिक QR कोड अक्सर मैच से 3 से 48 घंटे पहले ही एक्टिवेट होते हैं। इसलिए अगर कोई आपको पहले से बना हुआ स्थायी QR कोड का स्क्रीनशॉट देता है, तो वह फर्जी हो सकता है। 

सुरक्षा के लिहाज से सबसे बेहतर तरीका यह है कि आप टिकट को सीधे आधिकारिक एप के पर्चेज या बुकिंग्स सेक्शन में जाकर लाइव चेक करें। साथ ही, यह ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है कि 2026 के नए नियमों के तहत कई ई-टिकट अब नॉन-ट्रांसफरेबल हैं। ये सीधे आपके फोन नंबर और आईडी से लिंक होते हैं, जिससे उन्हें किसी और को भेजना संभव नहीं है।
 

2. फिजिकल (प्रिंटेड) टिकट कैसे चेक करें?

फिजिकल या प्रिंटेड टिकट की शुद्धता जांचने के लिए सबसे पहले उस पर दिए गए सुरक्षा फीचर्स जैसे होलोग्राम, वाटरमार्क या उभरी हुई छपाई को देखें, क्योंकि इन बारीकियों की नकल करना बहुत मुश्किल होता है। इसके साथ ही टिकट की प्रिंटिंग क्वालिटी पर भी पैनी नजर रखें। 

अक्सर नकली टिकटों की छपाई हल्की या धुंधली होती है और उनमें लोगो के साफ न होने या टेक्स्ट में स्पेलिंग की गलतियां होने जैसी खामियां मिल सकती हैं। अंत में, टिकट पर दर्ज स्टैंड, गेट, कतार (Row) और सीट नंबर जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों को स्टेडियम के आधिकारिक मैप से क्रॉस-चेक जरूर करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि टिकट पर दी गई डिटेल्स सही और वैध हैं।


3. इन बातों का रखें विशेष सावधान

IPL टिकटों के नाम पर होने वाले फ्रॉड से बचने के लिए कुछ 'रेड फ्लैग्स' या चेतावनी के संकेतों को समझना बहुत जरूरी है। स्कैमर्स अक्सर इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहते हैं और 'DM for Tickets' जैसे विज्ञापनों के जरिए उन मैचों के टिकट होने का दावा करते हैं जो पहले ही सोल्ड-आउट हो चुके होते हैं। ऐसे निजी विक्रेताओं से हमेशा दूरी बनानी चाहिए। 

इसके अलावा, अगर कोई आपको हाई-डिमांड वाले प्रीमियम टिकट बहुत ही कम या लुभावने दामों पर दे रहा है तो समझ जाएं कि यह आपको फंसाने का एक लालच हो सकता है। ये जालसाज अक्सर 'सिर्फ 2 सीटें बची हैं' या 'ऑफर 10 मिनट में खत्म हो जाएगा' जैसी बातें कहकर आप पर जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर करने का मनोवैज्ञानिक दबाव भी बनाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये लोग किसी सुरक्षित पेमेंट गेटवे या आधिकारिक एप के बजाय सीधे अपनी व्यक्तिगत UPI ID पर पैसे मांगते हैं, जो धोखाधड़ी का सबसे बड़ा संकेत है।


4. अगर आपके साथ स्कैम हो जाए तो क्या करें?

अगर आपके साथ IPL टिकट को लेकर कोई धोखाधड़ी या स्कैम हो जाता है, तो सबसे पहले बिना समय गंवाए साइबर क्राइम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं या नेशनल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके साथ ही, अगर आपने गलती से अपनी बैंकिंग जानकारी या OTP किसी के साथ साझा कर दिया है, तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें ताकि आपके अकाउंट के ट्रांजेक्शन को समय रहते फ्रीज या ब्लॉक किया जा सके।

यहां एक और महत्वपूर्ण बात गौर करने वाली है कि 2026 से प्रीमियम स्टैंड्स के लिए 'डिजिटल KYC' (आधार/पैन अपलोड) अनिवार्य कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर कोई अनजान व्यक्ति आपको व्हाट्सएप पर महज एक स्क्रीनशॉट फॉरवर्ड करके टिकट बेच रहा है तो उसके नकली होने की 100% संभावना है। इसलिए सुरक्षित रहें और हमेशा आधिकारिक माध्यमों से ही टिकट खरीदकर स्मार्ट बनें।

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