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स्मार्टफोन का रिफ्रेश रेट: 60Hz से 120Hz तक कितना बदल जाता है आपका फोन? खरीदने से पहले जरूर जानें यह जरूरी बात
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Fri, 19 Jun 2026 06:32 PM IST
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सार
Smartphone Refresh Rate: कैमरा, रैम, बैटरी और प्रोसेसर देखकर ही ज्यादातर लोग स्मार्टफोन खरीद लेते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि फोन में एक ऐसा फीचर भी होता है, जो आपके पूरे यूजर एक्सपीरियंस को बदल सकता है। जिसे रिफ्रेश रेट कहते हैं? आइए जानते हैं यह क्या होता है, कैसे काम करता है और 60Hz, 90Hz या 120Hz में क्या अंतर है?
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
High Refresh Rate Display: पिछले कुछ समय में स्मार्टफोन में भी बहुत बदलाव आया है। पहले जहां हाई रिफ्रेश रेट वाली स्क्रीन केवल प्रीमियम और महंगे फोन में मिलती थी, वहीं अब स्मार्टफोन कंपनियों ने इसे 90Hz, 120Hz और यहां तक कि 144Hz तक पहुंचाकर मिड-रेंज (कम बजट वाले) स्मार्टफोन्स का भी हिस्सा बना दिया है। आइए जानते हैं कि डिस्प्ले से जुड़ी यह तकनीक कैसे आपके विजुअल एक्सपीरियंस को बदल सकती है।
Refresh Rate क्या होता है ?
Refresh Rate वाले फोन क्यों पसंद किए जा रहे हैं?
60Hz डिस्प्ले किसके लिए सही है?
90Hz डिस्प्ले में क्या मिलता है खास?
120Hz डिस्प्ले क्यों बन रहा नया स्टैंडर्ड?
तो क्या हाई Refresh Rate से बैटरी ज्यादा खर्च होती है?
हां, हाई रिफ्रेश रेट स्क्रीन को ज्यादा बार अपडेट करना पड़ता है, जिससे बैटरी की खपत बढ़ सकती है। इसी समस्या को कम करने के लिए अब कई स्मार्टफोन्स में एडॉप्टिव रिफ्रेश रेट तकनीक दी जाती है। यह जरूरत के अनुसार रिफ्रेश रेट को अपने आप बढ़ा या घटा देती है।
जैसे मान लीजिए कि वीडियो देखते समय रिफ्रेश रेट कम हो सकता है जबकि गेमिंग या स्क्रोलिंग के दौरान यह बढ़ जाता है। इससे स्मूद एक्सपीरियंस और बेहतर बैटरी बैकअप दोनों मिलते हैं।
Refresh Rate स्मार्टफोन खरीदते समय कितना जरूरी है?
अगर आप केवल सामान्य उपयोग करते हैं तो 60Hz डिस्प्ले भी पर्याप्त है, लेकिन अगर आप सोशल मीडिया, मल्टीटास्किंग, गेमिंग या बेहतर विजुअल एक्सपीरियंस चाहते हैं, तो 90Hz या 120Hz डिस्प्ले वाला स्मार्टफोन आपके लिए ज्यादा बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
Refresh Rate क्या होता है ?
- स्मार्टफोन में रिफ्रेश रेट का मतलब होता है कि डिवाइस की स्क्रीन एक सेकंड में कितनी बार खुद को अपडेट या रिफ्रेश करती है। इसे Hertz (Hz) में मापा जाता है। जैसे मान लीजिए 60Hz स्क्रीन एक सेकंड में 60 बार अपडेट होती है। 90Hz स्क्रीन एक सेकंड में 90 बार अपडेट होती है और 120Hz स्क्रीन एक सेकंड में 120 बार अपडेट होती है।
- यानी जितनी ज्यादा बार स्क्रीन रिफ्रेश होती है, उतनी ही स्मूद और फ्लूइड विजुअल क्वालिटी देखने को मिलती है। स्क्रीन पर होने वाली हर मूवमेंट ज्यादा नेचुरल और साफ दिखाई देती है।
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Refresh Rate वाले फोन क्यों पसंद किए जा रहे हैं?
- जिन्हें इस बारे में पता है, वह फोन खरीदते समय रिफ्रेश रेट जरूर देखते हैं। क्योंकि हाई रिफ्रेश रेट वाली स्क्रीन पर फोन इस्तेमाल करने का अनुभव काफी बेहतर हो जाता है। जैसे सोशल मीडिया स्क्रोल करना, एप्स के बीच स्विच करना, मेन्यू नेविगेट करना और एनीमेशन देखना ज्यादा स्मूद महसूस होता है।
- एक बार 120Hz डिस्प्ले इस्तेमाल करने के बाद कई यूजर्स को 60Hz स्क्रीन अपेक्षाकृत धीमी लगने लगती है। यही वजह है कि अब कंपनियां हाई रिफ्रेश रेट को अपनी बड़ी यूएसपी के रूप में पेश कर रही हैं।
60Hz डिस्प्ले किसके लिए सही है?
- 60Hz लंबे समय तक स्मार्टफोन इंडस्ट्री का स्टैंडर्ड रहा है। कॉलिंग, मैसेजिंग, वेब ब्राउजिंग, वीडियो देखने और सामान्य उपयोग के लिए यह आज भी पर्याप्त माना जाता है।
- हालांकि यह आपके इस्तेमाल पर भी निर्भर करता है। अगर यूजर का इस्तेमाल बेसिक है और आप बैटरी बैकअप को ज्यादा महत्व देते हैं, तो 60Hz डिस्प्ले भी अच्छा विकल्प हो सकता है।
90Hz डिस्प्ले में क्या मिलता है खास?
- 90Hz स्क्रीन 60Hz के मुकाबले ज्यादा स्मूद एक्सपीरियंस देती है। सोशल मीडिया फीड स्क्रोल करते समय, एप्स खोलते समय और इंटरफेस नेविगेट करते समय अंतर साफ महसूस किया जा सकता है।
- इसी वजह से पिछले कुछ वर्षों में 90Hz डिस्प्ले मिड-रेंज स्मार्टफोन सेगमेंट में काफी लोकप्रिय हुए हैं।
120Hz डिस्प्ले क्यों बन रहा नया स्टैंडर्ड?
- 120Hz रिफ्रेश रेट आज फ्लैगशिप के साथ-साथ कई मिड-रेंज स्मार्टफोन्स में भी देखने को मिल रहा है। यह सबसे ज्यादा फ्लूइड अनुभव प्रदान करता है।
- तेज स्क्रोलिंग, हाई फ्रेम रेट गेमिंग और स्मूद एनीमेशन का फायदा 120Hz डिस्प्ले पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। गेमिंग पसंद करने वाले यूजर्स और हैवी स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए यह एक बड़ा अपग्रेड माना जाता है।
तो क्या हाई Refresh Rate से बैटरी ज्यादा खर्च होती है?
हां, हाई रिफ्रेश रेट स्क्रीन को ज्यादा बार अपडेट करना पड़ता है, जिससे बैटरी की खपत बढ़ सकती है। इसी समस्या को कम करने के लिए अब कई स्मार्टफोन्स में एडॉप्टिव रिफ्रेश रेट तकनीक दी जाती है। यह जरूरत के अनुसार रिफ्रेश रेट को अपने आप बढ़ा या घटा देती है।
जैसे मान लीजिए कि वीडियो देखते समय रिफ्रेश रेट कम हो सकता है जबकि गेमिंग या स्क्रोलिंग के दौरान यह बढ़ जाता है। इससे स्मूद एक्सपीरियंस और बेहतर बैटरी बैकअप दोनों मिलते हैं।
Refresh Rate स्मार्टफोन खरीदते समय कितना जरूरी है?
अगर आप केवल सामान्य उपयोग करते हैं तो 60Hz डिस्प्ले भी पर्याप्त है, लेकिन अगर आप सोशल मीडिया, मल्टीटास्किंग, गेमिंग या बेहतर विजुअल एक्सपीरियंस चाहते हैं, तो 90Hz या 120Hz डिस्प्ले वाला स्मार्टफोन आपके लिए ज्यादा बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।