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IPL 2026: आईपीएल में चमका एक और गुदड़ी का लाल, 7 छक्के लगाकर पलट दी बाजी

Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Fri, 10 Apr 2026 02:21 PM IST
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सार

राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र के झुंझुनू जिले के छोटे से गांव खेदड़ों की ढाणी से क्रिकेट की चमकीली दुनिया में प्रवेश मुकुल के लिए आसान नहीं रहा है। वो बचपन में मध्यम तेज गति के गेंदबाज बनना चाहते थे।

mukul choudhary IPL 2026 Another lad shines in IPL turns the tables by hitting 7 sixes
मुकुल चौधरी - फोटो : IPL
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विस्तार

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में एक और गुदड़ी का लाल चमका है। नाम है मुकुल चौधरी। बेटा क्रिकेट में करियर बना सके, इसके लिए मुकुल के पिता ने घर तक बेच दिया।
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गुरुवार रात ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स में जब मुकुल चौधरी ने धोनी सिग्नेचर वाले हेलीकॉप्टर शॉट्स पर छक्के लगाए तो क्रिकेट फैन्स झूम उठा। मुकुल की आतिशी पारी की बदौलत लखनऊ सुपर जायंट्स ने कोलकाता नाइट राइडर्स को उसके घर में अंतिम गेंद पर शिकस्त दी।
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राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र के झुंझुनू जिले के छोटे से गांव खेदड़ों की ढाणी से क्रिकेट की चमकीली दुनिया में प्रवेश मुकुल के लिए आसान नहीं रहा है। वो बचपन में मध्यम तेज गति के गेंदबाज बनना चाहते थे।

उन्होंने फिर अपनी राह बदली और विकेटकीपिंग के साथ-साथ बल्लेबाजी को अपना मुख्य हथियार बनाया। हालांकि, क्रिकेट खेलना उनके लिए संघर्ष से कम नहीं रहा।

उनके पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि बेटे के लिए क्रिकेट की महंगी किट खरीद सकें। एक इंटरव्यू में मुकुल ने स्वयं बताया कि एक अच्छा बैट 20-30 हजार रुपए का आता है। मेरे करियर के लिए पिता ने हमारा घर बेच दिया। 

विकेटकीपर बल्लेबाज मुकुल ने राजस्थान में घरेलू क्रिकेट में अपने दमदार प्रदर्शन के दम पर सफलता की सीढ़ियां चढ़ी हैं। अंडर 23 लेवल क्रिकेट में मुकुल ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26 में पांच पारियों में 198.85 की स्ट्राइक रेट से 173 रन बनाकर अपनी ओर सभी का ध्यान खींचा था। पिछले साल आईपीएल की बोली में मुकुल का बेस प्राइस 30 लाख रुपए था।

उनके लिए लखनऊ सुपर जायंट्स, मुंबई इंडियन्स और राजस्थान रॉयल्स ने बोली में भाग लिया। मुंबई इंडियन्स 90 लाख रुपए की बोली लगाकर हट गई, जबकि राजस्थान रॉयल्स ने 2.4 करोड़ रुपए तक बोली लगाई, अंत में लखनऊ सुपर जायंट्स ने उन्हें 2.6 करोड़ रुपए में खरीदा था। 

जब मुकुल से पूछा गया था कि वो इतने पैसों से क्या करेंगे, तब उनका कहना था कि पहले पिता ने छोटे से होटल को चलाने के लिए जो लोन लिया है, वो चुकाना है। उसके बाद ही वो घर या कुछ और लेने की सोचेंगे। कोलकाता के खिलाफ 27 गेंदों पर 54 रन की आतिशी पारी, जिसमें 7 छक्के शामिल थे, ने लखनऊ सुपर जायंट्स के पैसे वसूल करा दिए। 

हालांकि, मुकुल चौधरी आईपीएल में ऐसे पहले खिलाड़ी नहीं हैं, जिन्होंने घोर अभावों, गरीबी और संघर्षों से निकलकर अपनी प्रतिभा के दम पर दुनिया के सबसे करोड़ों दिलों को जीता है। कोलकाता नाइड राइडर्स के उप कप्तान रिंकू सिंह के पिता घर-घर जाकर गैस सिलेंडर पहुंचाते थे।

एक ओवर में 5 छक्के जड़कर रिंकू रातों-रात हीरो बन गए। राजस्थान रॉयल्स के स्टार खिलाड़ी यशस्वी जायसवाल  क्रिकेट के लिए मुंबई के आजाद मैदान के टेंट में सोए और मैदान के बाहर गोल-गप्पे बेचे।

गुजरात टाइटंस के गेंदबाज मोहम्मद सिराज के पिता ऑटो रिक्शा चलाते थे। मुंबई इंडियन्स के खिलाड़ी तिलक वर्मा के पिता इलेक्ट्रीशियन थे। 'जम्मू एक्सप्रेस' के नाम से मशहूर सनराइजर्स हैदराबाद के गेंदबाज उमरान मलिक के पिता जम्मू में फल-सब्जी की दुकान लगाते थे।

कोलकाता नाइड राइडर्स के गेंदबाज चेतन सकारिया के पिता टेम्पो ड्राइवर थे। मुकुल चौधरी और बाकी गुदड़ी के लाल खिलाड़ी इस बात का प्रमाण हैं कि यदि प्रतिभा और कुछ कर गुजरने का जज्बा है तो आर्थिक स्थिति सफलता के आड़े नहीं आ सकती।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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