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तेज धूप में भी क्यों नहीं पिघलती पहाड़ों की बर्फ? इसका जवाब हमारे वायुमंडल में छिपा है

एली मजुरेक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitin Gautam Updated Thu, 09 Apr 2026 08:02 AM IST
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सार

पहाड़ों पर सूरज की किरणें सीधी पड़ती हैं, फिर भी वहां तापमान कम होता है, क्योंकि वायुमंडल की पतली परत गर्मी को रोक नहीं पाती।

Why does not the snow on mountains melt even in intense sunlight The answer lies hidden within atmosphere
पहाड़ों पर जमी बर्फ - फोटो : एएनआई
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विस्तार

पहाड़ों में एक साफ और धूप से भरा दिन, जब चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर बिछी हो, किसी जादुई दृश्य से कम नहीं लगता। लेकिन एक दिलचस्प सवाल अक्सर उठता है कि जब धूप इतनी तेज होती है, तो ऊंचाई पर जमी बर्फ क्यों नहीं पिघलती? दरअसल, इसका जवाब हमारे वायुमंडल में छिपा है।
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पृथ्वी का वायुमंडल उसकी सतह से लेकर अंतरिक्ष तक फैला हुआ एक सुरक्षात्मक घेरा है, जिसमें कई तरह की गैसें मौजूद हैं। ये सभी गैसें मिलकर पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाती हैं। वायुमंडल का एक महत्वपूर्ण काम हमें अंतरिक्ष से आने वाली हानिकारक चीजों से बचाना भी है। वायुमंडल की कुछ गैसें सूर्य की किरणों के एक हिस्से को अवशोषित कर लेती हैं, जिससे अत्यधिक गर्मी पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती। रात के समय यही गैसें पृथ्वी से निकलने वाली गर्मी को पूरी तरह बाहर जाने से रोकती हैं, जिससे तापमान बहुत ज्यादा नीचे नहीं गिरता। पृथ्वी के तापमान को संतुलित बनाए रखने की इस प्राकृतिक प्रक्रिया को ‘ग्रीनहाउस प्रभाव’ कहा जाता है। हालांकि, जब इन्सान वाहन चलाते हैं या कारखानों में जीवाश्म ईंधन जलाते हैं, तो वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ जाती है।
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इससे पृथ्वी का तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, जिसे हम ग्लोबल वार्मिंग के रूप में जानते हैं। अब सवाल उठता है कि ऊंचाई पर ऐसा क्या अलग होता है? दरअसल, जैसे-जैसे हम ऊपर जाते हैं, वायुमंडल पतला होता जाता है। इसका कारण है गुरुत्वाकर्षण, जो गैसों को पृथ्वी के करीब बनाए रखने की कोशिश करता है। ऊंचाई पर गैसों के अणु कम हो जाते हैं, जिससे हवा हल्की और कम घनी हो जाती है। यही वजह है कि ऊंचे पहाड़ों पर सांस लेना मुश्किल हो सकता है और लोगों को ‘एल्टीट्यूड सिकनेस’ (ऊंचाई की बीमारी) भी हो सकती है।

पतली हवा का मतलब है कम अणु, और कम अणुओं का मतलब है कम टकराव, यानी कम गर्मी। इसके अलावा, पहाड़ों की ऊंचाई पर वायुमंडल में पर्याप्त अणु न होने के कारण वह पतला हो जाता है, जो गर्मी को रोककर रखने में भी कमजोर होता है। इसलिए, भले ही पहाड़ों की चोटियों पर सूरज की किरणें सीधे पहुंचती हों, पर वहां का तापमान कम ही रहता है। यही वजह है कि ऊंचे पहाड़ी इलाकों में बारिश के बजाय बर्फ गिरने की संभावना अधिक होती है। इसके अलावा, जमीन पर जमी बर्फ भी तापमान को और कम बनाए रखने में मदद करती है। बर्फ सूर्य की किरणों को परावर्तित कर देती है, जिससे वे वापस अंतरिक्ष में लौट जाती हैं और जमीन को गर्म नहीं कर पातीं। यानी, पहाड़ों की ठंड और बर्फ का रहस्य सिर्फ ऊंचाई में नहीं, बल्कि वायुमंडल की बनावट और व्यवहार में छिपा है।  (द कन्वर्सेशन)
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