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बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: एसआईआर डाल सकता है मुस्लिम बहुल और कम मार्जिन वाली सीटों पर प्रभाव
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सार
एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद 28 फरवरी को प्रकाशित मतदाता सूची में 63 लाख 66 हजार 952 मतदाताओं का नाम बाद दे दिया गया था। 60 लाख 6 हजार 675 विवेचनाधीन मतदाता थे।
पश्चिम बंगाल में होने हैं विधानसभा चुनाव। (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदाता सूची को अंतिम रूप दे दिया गया है। अब इस चरण के मतदाता सूची में कोई और नाम शामिल नहीं किया जाएगा। पहले चरण के लिए नामांकन की अंतिम तिथि के बाद मतदाता सूची कानून के अनुसार आखिरी हो चुकी है। गौरतलब है कि 294 सदस्यीय विधानसभा की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को पहले चरण में मतदान होगा।
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राज्य की शेष 142 सीटों पर 29 अप्रैल को दूसरे चरण में वोट डाले जाएंगे। दूसरे चरण के लिए मतदाता सूची को नामांकन की अंतिम तिथि के बाद 9 अप्रैल को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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अब किसी भी बदलाव का फैसला उच्चतम न्यायालय के संभावित निर्देशों पर निर्भर करेगा। एसआईआर मामले पर उच्चतम न्यायालय अगली सुनवाई 13 अप्रैल को करेगा।
एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद 28 फरवरी को प्रकाशित मतदाता सूची में 63 लाख 66 हजार 952 मतदाताओं का नाम बाद दे दिया गया था। 60 लाख 6 हजार 675 विवेचनाधीन मतदाता थे।
दर्जन भर सूचियों के प्रकाशित होने के बाद न्यायिक जांच के दायरे में आए लगभग 45.22 प्रतिशत नाम हटा दिए गए। वहीं, इस श्रेणी के 32.68 लाख से अधिक मतदाताओं को बरकरार रखते हुए अंतिम सूची में शामिल किया गया है।
एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से 90 लाख 83 हजार 345 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई जांच में इन 60 लाख 6 हजार 675 विवेचनाधीन मतदाताओं में से 27 लाख 16 हजार 393 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य के अंतिम मतदाता आधार की घोषणा अभी बाकी है।
आयोग के आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक विवेचनाधीन नाम मुस्लिम बहुल जिलों में हटाए गए हैं। टॉप थ्री में बांग्लादेश की सीमा से लगे तीनों मुस्लिम बहुल जिले हैं और टॉप में मुर्शिदाबाद है। मुर्शिदाबाद में न्यायिक जांच में 11.01 लाख नामों में से 4 लाख 55 हजार 137 नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।
इस तरह, जिले में न्यायिक जांच के तहत हटाए गए नामों की संख्या लगभग 41.33 प्रतिशत है। दूसरे नंबर पर उत्तर 24 परगना है जहां 3 लाख 25 हजार 666 नाम हटाये गए हैं। तीसरे नंबर पर मालदा है जहां 2 लाख 39 हजार 375 नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
न्यायिक जांच में उत्तर 24 परगना जिला दूसरे नंबर पर है लेकिन कुल हटाये गए मतदाताओं की तालिका में टॉप पर है। टॉप टेन जिला पर यदि नजर डालें तो उत्तर 24 परगना में 12 लाख 60 हजार 96 लोगों का नाम कटा है।
दक्षिण 24 परगना में 10 लाख 91 हजार 98, मुर्शिदाबाद में 7 लाख 48 हजार 959, हावड़ा में 5 लाख 95 हजार 916, नदिया में 4 लाख 87 हजार 565, हुगली में 4 लाख 68 हजार 939, मालदा में 4 लाख 59 हजार 530, उत्तर कोलकाता में 4 लाख 47 हजार 541, पूर्वी बर्दवान में 4 लाख 35 हजार 864 और पश्चिम बर्दवान में 3 लाख 94 हजार 325 मतदाताओं का नाम सूची से कट गया है।
गौरतलब है कि आंकड़ों के अनुसार, नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों में सुनवाई के बाद हटाए गए सदस्यों की संख्या क्रमशः 77.86 प्रतिशत और 55.08 प्रतिशत है। इन दोनों जिलों में हिंदू नामशुद्र मतुआ समुदाय के सदस्यों की अच्छी खासी संख्या है। केंद्र में इस समुदाय के शांतनु ठाकुर मंत्री भी हैं।
वहीं, कोलकाता दक्षिण में 28,000 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल है। सुनवाई के दौरान हटाए गए नामों का प्रतिशत 36.19 प्रतिशत रहा। कोलकाता उत्तर में जांच के दायरे में आए करीब 39,000 मतदाता मतदान के लिए अयोग्य पाए गए, जिससे वहां हटाए गए नामों का प्रतिशत लगभग 64 प्रतिशत रहा।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नवंबर'25 में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से मतदाताओं की संख्या का लगभग 8.3 प्रतिशत यानी 63.66 लाख नाम हटा दिए गए, जिससे मतदाता आधार लगभग 7.66 करोड़ से घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गया। 7.04 करोड़ के मतदाता आधार में 60.06 लाख से अधिक मतदाता ऐसे थे, जिन्हें विवेचनाधीन श्रेणी में रखा गया था।
अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद मतदाताओं के पास उच्चतम न्यायालय के आदेशों के तहत विशेष रूप से गठित न्यायाधिकरणों में जाने का विकल्प है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि न्यायाधिकरण के न्यायाधीशों द्वारा योग्य पाए गए मतदाता आगामी चुनावों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर पाएंगे या नहीं।
निर्वाचन आयोग के अनुसार पुनरीक्षण प्रक्रिया चरणबद्ध और पारदर्शी तरीके से की गई है। पूर्ण जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अब जिला-वार आंकड़े सार्वजनिक कर दिए गए हैं।
विवेचनाधीन 60.06 लाख मतदाताओं में से 59.84 लाख का डेटा सार्वजनिक किया जा चुका है, जबकि शेष 22,163 मामलों का निस्तारण हो चुका है, लेकिन अभी ई-हस्ताक्षर होना बाकी है। ई-हस्ताक्षर सहित समस्त लंबित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नाम हटाने और जोड़ने के आंकड़ों में मामूली बदलाव संभव है।
बहरहाल, 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 2 करोड़ 29 लाख वोट मिले थे और तृणमूल कांग्रेस को 2 करोड़ 90 लाख। फासला 61 लाख वोटों का था। एसआईआर में लगभग 91 लाख मतदातों का नाम कट गया है।
जिले-वार आंकड़ा तो उपलब्ध है लेकिन सीट-वार नहीं। सवाल है कि क्या यह चुनाव परिणाम पर डाल सकता है प्रभाव ? दस हजार से कम मार्जिन से जीती हुई सीटों पर एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) का निश्चित प्रभाव पड़ेगा।
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