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मन की अपनी एक अलग दुनिया है: हम एक-दूसरे से जुड़े भी हैं और कहीं न कहीं अकेले भी

एल्डस हक्सले, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitin Gautam Updated Thu, 09 Apr 2026 07:52 AM IST
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सार

हर मनुष्य अपने आप में अलग होता है, जैसे एक विशाल समंदर में कई छोटे-छोटे द्वीप होते हैं। हम सब अलग जरूर हैं, पर हमारे बीच कुछ ऐसी बातें होती हैं, जो हमें एक-दूसरे से जोड़ती हैं।
 

The mind has a world of its own we are connected to one another yet, in some way we are also alone
blog - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हम साथ रहते हैं, एक-दूसरे के करीब होते हैं, एक-दूसरे के जीवन में दखल देते हैं, प्रभाव डालते हैं और प्रतिक्रियाएं भी देते हैं, फिर भी हर क्षण, हर परिस्थिति में हम अक्सर खुद को अकेला ही पाते हैं। यह अकेलापन कोई संयोग नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का मूल स्वभाव है। जब दो करीबी मृत्यु की ओर बढ़ते हैं, तब वे एक-दूसरे का हाथ थाम सकते हैं, पर अंतिम क्षणों की पीड़ा केवल उनकी अपनी ही होती है। कोई दूसरा उनके उस अनुभव को महसूस नहीं कर सकता है।
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प्रेमी भी जब एक-दूसरे को गले लगाते हैं, तो वे अपनी-अपनी सीमित खुशियों और अनुभूतियों को एक करने की पूरी कोशिश करते हैं। वे चाहते हैं कि उनका आनंद एक हो जाए, उनका अस्तित्व एक हो जाए, लेकिन यह प्रयास अंततः असफल ही रहता है। इसकी वजह यह है कि हर आत्मा अपनी ही अनुभूति के घेरे में बंधी होती है। कोई भी चेतन आत्मा, चाहे वह कितनी ही संवेदनशील क्यों न हो, अपने सुख और दुख को अंततः अकेले ही जीती है। हमारी संवेदनाएं, भावनाएं, गहरी समझ, और कल्पनाएं, ये सब हमारे भीतर की निजी दुनिया का हिस्सा हैं। हम उन्हें शब्दों में ढालकर दूसरों तक पहुंचाने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन शब्द केवल प्रतीक होते हैं, वे अनुभव को पूरी तरह से जाहिर नहीं कर पाते। दरअसल, हम अपने अनुभवों के बारे में जानकारी साझा तो कर सकते हैं, पर उस अनुभव की गहराई, उसकी सच्ची अनुभूति, कभी भी पूरी तरह किसी और तक नहीं पहुंचती है।
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हर मनुष्य अपने आप में अलग होता है, जैसे एक विशाल समंदर में कई छोटे-छोटे द्वीप होते हैं। हम सब अलग जरूर हैं, लेकिन हमारे बीच कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो हमें एक-दूसरे से जोड़ती हैं। जब हम किसी और के दर्द या खुशी को समझने की कोशिश करते हैं, खुद को उसकी जगह रखकर सोचते हैं, तो भले ही हम उसे पूरी तरह न समझ पाएं, फिर भी यही कोशिश हमें इन्सान बनाती है। हालांकि, कुछ स्थितियां ऐसी भी होती हैं, जहां समझ और संवाद लगभग असंभव हो जाता है। कुछ लोगों का मानसिक संसार इतना भिन्न होता है कि वह सामान्य अनुभवों से परे चला जाता है।

हर इन्सान के मन की अपनी एक अलग दुनिया होती है, खासकर जो लोग बहुत प्रतिभाशाली होते हैं, उनकी सोच और अनुभव आम लोगों से काफी अलग हो सकते हैं। इसलिए कई बार वे एक-दूसरे को पूरी तरह समझ नहीं पाते। फिर भी, यही जिंदगी की सच्चाई है कि हम एक-दूसरे से जुड़े भी हैं और कहीं न कहीं अकेले भी। लेकिन यही एहसास हमें सोचने, महसूस करने और खुद को समझने की ताकत और दिशा, दोनों देता है। (द डोर्स ऑफ परसेप्शन एंड हेवन एंड हेल के अनूदित अंश)
     
जीवन का सबसे गहरा सत्य यह है कि हम भीतर से अकेले हैं, पर यही अकेलापन हमारी सबसे बड़ी शक्ति भी है। अपने अनुभवों, भावनाओं व विचारों को समझना आत्मबोध की पहली सीढ़ी है। दूसरों को पूरी तरह समझ पाना संभव नहीं, फिर भी सहानुभूति और करुणा हमें आपस में जोड़ती है। खुद को जानना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
 
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